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बुधवार, 13 जुलाई 2022

प्रो. ऋषभदेव शर्मा की तपस्या का फल है 'धूप के अक्षर'






हैदराबाद।

प्रो. ऋषभदेव शर्मा की तपस्या का फल है 'धूप के अक्षर'

हैदराबाद।


भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री और प्रसिद्ध लेखक डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, खैरताबाद, हैदराबाद के सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह में 'धूप के अक्षर' का लोकार्पण करते हुए कहा कि यह ग्रंथ प्रो. ऋषभदेव शर्मा की जीवन भर की तपस्या का फल है। उनकी इस तपस्या को दक्षिण भारत ने हृदय से स्वीकार किया है जिसके दर्शन उनके अभिनंदन समारोह में हो रहे हैं। वे डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा के प्रधान संपादकत्व में दो खंडों में प्रकाशित प्रो. ऋषभदेव शर्मा के सम्मान में लोकार्पित किए जाने वाले आयोजन में बोल रहे थे।

डॉ. निशंक ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारतवर्ष को विश्वगुरु के पथ पर पुनः प्रतिष्ठित करने के लिए तेलुगु, तमिल, कन्नड, मलयालम, बंगला, मराठी, पंजाबी, असमी आदि सभी भाषाओं को सम्मिलित भूमिका निभानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रो. ऋषभदेव शर्मा हिंदी के माध्यम से सारी भारतीय भाषाओं के लिए कार्य कर रहे हैं। यह कार्य हैदराबाद में हो रहा है जिस पर हम गर्व कर सकते हैं।


अभिनंदन समारोह का उद्घाटन शीर्षस्थ भारतीय लेखक प्रो. एन. गोपि ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रो. शर्मा एक आदर्श अध्यापक और प्रख्यात लेखक ही नहीं है, बल्कि वे एक उत्तम मनुष्य भी हैं। दक्षिण में उनका आना भाषा और साहित्य के लिए एक वरदान जैसा है।


प्रो. ऋषभदेव शर्मा के अभिनंदन समारोह की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व अधिष्ठाता प्रो.देवराज ने कहा हर एक को चारों दिशाओं की संस्कृति को आत्मसात करना होगा। साहित्य और संस्कृति में ही देश को जोड़ने की शक्ति निहित है। संस्कृति और साहित्य केवल पाखंड नहीं हैं। ये सबसे पहले व्यक्ति के भीतर जिज्ञासा जगाते हैं। सवाल करना असिखाते हैं और फिर उनका समाधान ढूँढ़ने की जज्बा पैदा करते हैं। हर तरह से व्यक्ति को प्रशिक्षित करते हैं।

अतिविशिष्ट अतिथि रूप में डॉ. पुष्पा खंडूरी (देहारदून) के साथ प्रो. गोपाल शर्मा, जसवीर राणा, डॉ. अहिल्या मिश्र, डॉ. वर्षा सोलंकी, डॉ. राकेश कुमार शर्मा, पी. ओबय्या, जी. सेल्वराजन, एस. श्रीधर, प्रो. संजय एल मादार आदि मौजूद थे।

सभी वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने हैदराबाद, चेन्नै और एरणाकुलम आदि में रहते हुए जो कार्य किया उसका भाषायी और साहित्यिक महत्व ही नहीं है बल्कि सांस्कृतिक महत्व भी है। उनका कार्य दक्षिणापथ और उत्तरापथ के मध्य संस्कृति सेतु का कार्य है।

आयोजन का संचालन 'धूप के अक्षर' ग्रंथ की प्रधान संपादक डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा ने किया। समारोह के प्रारंभ में कलापूर्ण सस्वर सरस्वती वंदना शुभ्रा मोहंता ने प्रस्तुत की। 'धूप के अक्षर' ग्रंथ के सहयोगी लेखकों को यह ग्रंथ भेंट भी किया गया।

इस समारोह में हैदराबाद के साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। पद्मश्री एडलप्पली वेंकटेश्वर राव, विनीता शर्मा, वेणुगोपाल भट्टड, अजित गुप्ता, लक्ष्मीनारायण अग्रवाल, पवित्रा अग्रवाल, रामदास कृष्ण कामत, सुरेश गुगालिया, जी. परमेश्वर, डॉ. श्रीपूनम जोधपुरी, डॉ. जयप्रकाश नागला, डॉ. रियाजुल अंसारी, डॉ. बी. एल. मीणा, मुकुल जोशी, डॉ. शिवकुमार राजौरिया, रवि वैद, डॉ. एस. राधा, सरिता सुराणा, वर्षा कुमारी, हुडगे नीरज, रूपा प्रभु, उत्तम प्रसाद, नीलम सिंह, नेक परवीन, संदीप कुमार, मुकुल जोशी, डॉ. कोकिला, एफ. एम. सलीम, डॉ. के. श्रीवल्ली, डॉ. बी. बालाजी, डॉ. करन सिंह ऊटवाल, वुल्ली कृष्णा राव, ए. जानकी, किशोर बाबु, रमाकांत, राधाकृष्ण मिरियाला, शीला बालाजी, समीक्षा शर्मा, डॉ. सुषमा देवी, सुनीता लुल्ला, प्रवीण प्रणव,, डॉ. गंगाधर वानोडे, डॉ. सी. एन. मुगुटकर, डॉ. रामा द्विवेदी, डॉ. संगीता शर्मा, प्रो. दुर्गेशनंदिनी, डॉ. रेखा शर्मा, चवाकुल रामकृष्णा राव, एम. सूर्यनरायन, नागराज, प्रवीण, केशवलु, जे. रामकृष्ण, मुरली, एम. शिवकुमार, नृपुतंगा सी. के., डॉ. के. चारुलता, जी, एकांबरेश्वरुडु, शैलेषा नंदूरकर, जाकिया परवीन, शेक जुबर अहमद, डॉ. गौसिया सुलताना, विकास कुमार आजाद, पल्लवी कुमारी, निशा देवी, डॉ. पठान रहीम खान, के. राजन्ना, डॉ. एस. तुलसीदेवी, डॉ. रजनी धारी, गीतिका कुम्मूरी, डॉ. गोरखनाथ तिवारी, डॉ. साहिरा बानू बी. बोरगल, डॉ. बिष्णु कुमार राय, डॉ. शक्ति कुमार द्विवेदी, डॉ. ए. जी. श्रीराम, हरदा राजेश कुमार, डॉ. संतोष विजय मुनेश्वर, काज़िम अहमद, अनिल लोखंडे और अनेक लोग अंडमान, दिल्ली, वर्धा, खतौली, नांदेड, कर्नाटक, चेन्नै, अहमदाबाद, बनारस से भी पधारे थे।






गुरुवार, 12 अगस्त 2021

"तत्त्वदर्शी निशंक" लोकार्पित



"तत्त्वदर्शी निशंक" लोकार्पित

वर्धा, 12 अगस्त, 2021 (मीडिया विज्ञप्ति)।

'आज़ादी का अमृत महोत्सव' कार्यक्रम के तहत महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में आयोजित लोकार्पण समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ल ने पूर्व शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' पर एकाग्र समीक्षा ग्रंथ "तत्त्वदर्शी निशंक" सहित चार पुस्तकों का विमोचन किया। अध्यक्ष के रूप में बोलते हुए प्रोफेसर शुक्ल ने कहा कि निशंक राष्ट्रीय और सांस्कृतिक धारा के अग्रगण्य समकालीन साहित्यकार हैं तथा उन्हें समर्पित ग्रंथ के लोकार्पण से बिश्वविद्यालय गौरवान्वित हुआ है।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महाकवि प्रोफेसर योगेंद्र नाथ शर्मा 'अरुण' ने कहा कि "तत्त्वदर्शी निशंक" दक्षिण भारत के हिंदी विद्वानों की ओर से हिमालय-पुत्र निशंक का भावपूर्ण अभिनंदन है, जिसमें उनके जीवन संघर्ष और साहित्य सृजन से लेकर उनकी विश्वदृष्टि तक का  पहली बार इतना विशद मूल्यांकन किया गया है।

कोरोना के कारण लंबे समय तक चिकित्साधीन और एकांतवास में रहने के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने पहली बार इस कार्यक्रम में आभासी माध्यम से जुड़कर अपनी उपस्थिति दर्ज की। उन्होंने कहा कि यदि कभी उन्हें राजनीति और साहित्य में से किसी एक को चुनना पड़े तो वे निश्चित रूप से साहित्य को चुनेंगे। डॉ. निशंक ने अपने समीक्षकों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की और ज़ोर देकर कहा कि हिंदी विश्व की एक सर्वसमर्थ भाषा है तथा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषाओं पर बल देने के मूल में भारतीयता का संस्कार निहित है। 

लोकार्पित ग्रंथ के प्रधान संपादक प्रोफेसर ऋषभदेव शर्मा ने ऑनलाइन उपस्थित होकर पुस्तक का परिचय देते हुए कहा कि प्रो. गोपाल शर्मा, प्रो. निर्मला मौर्य, प्रवीण प्रणव, डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा और डॉ. बी. बालाजी सहित इस ग्रंथ में 19 लेखकों के 21 शोधपत्र शामिल हैं तथा शीला बालाजी इसकी सह-संपादक हैं। उन्होंने कहा कि इसमें डॉ. निशंक के काव्य और कथा साहित्य के अलावा पहली बार उनके अकाल्पनिक गद्य का भी विस्तृत विवेचन किया गया है।

समारोह में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति-द्वय प्रोफेसर हनुमान प्रसाद शुक्ल, प्रोफेसर चंद्रकांत तथा प्रोफेसर कृपा शंकर चौबे सहित विविध संकायों के अध्यक्ष, आचार्यगण, शोधार्थी तथा छात्र उपस्थित थे। प्रोफेसर रमा पांडेय और डॉ. बेचैन कंडियाल ने भी ऑनलाइन सहभागिता निभाई। 

समारोह के दूसरे सत्र में प्रोफेसर योगेंद्र नाथ शर्मा 'अरुण' के सम्मान में काव्य संध्या संपन्न हुई। 000