सोमवार, 30 दिसंबर 2013

ग़ालिब ने दिल की भाषा में दिमाग को अभिव्यक्त किया - ऋषभ देव शर्मा


13 दिसंबर 2013 को नॅशनल बुक ट्रस्ट के हैदराबाद पुस्तक मेले के मंच पर मुझे डॉ. करन सिंह ऊटवाल की 2 पुस्तकों - 'ग़ालिब और विज्ञान' तथा 'रीतिकालीन साहित्य पर संस्कृत साहित्य का प्रभाव' - का लोकार्पण करने का सुयोग प्राप्त हुआ. डॉ. ऊटवाल की आत्मीयता से अभिभूत हूँ.


चित्र विलंब से आज मिले है. स्लाइड शो साझा कर रहा हूँ.....




गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

आर. के. तलरेजा महाविद्यालय में द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

उल्हासनगर.

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा संपोषित हिंदी विभाग आर. के. तलरेजा महाविद्यालय, उल्हासनगर एवं साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में गत दिनों नवंबर 2013 को द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन ‘भक्ति साहित्य में विश्व बंधुत्व की भावना’ विषय पर किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन श्रद्धेय आचार्य डॉ. शिवेंद्रपुरी के करकमलों से संपन्न हुआ. पं. शांडिल्य ने अपने सुमधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की. उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. शिवेंद्रपुरी ने कहा कि भक्ति जनमानस का मूल्य है. बीज वक्तव्य में मुंबई विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ. रामजी तिवारी ने भारतीय समाज के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना पर प्रकाश डाला. प्राचार्य डॉ. ललितांबाल नटराजन ने स्वागत भाषण देते हुए संगोष्ठी में पधारे सभी व्यक्तियों का सम्मान किया. आर. के. तलरेजा विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. दशरथ सिंह ने भक्ति साहित्य के महत्व को स्पष्ट किया. सिंधी भाषा की एकमात्र डी.लिट. उपाधि ग्रहण करने वाले डॉ. दयाल आशा ने सिंधी भक्ति साहित्य में विश्वकल्याण की भावना पर प्रकाश डाला. 

डॉ. शिवेंद्रपुरी ने उद्घाटन सत्र में सोनभाऊ बसवंत महाविद्यालय, शाहपुर के उपप्राचार्य एवं हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल सिंह द्वारा संपादित पुस्तक ‘वैश्विक परिदृश्य में साहित्य, मीडिया एवं समाज’ का विमोचन किया. इसी कड़ी में डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, हिंदी विभागाध्यक्ष, साठेय महाविद्यालय की पुस्तक ‘सूफी साहित्य का पुनर्मूल्यांकन’ का भा विमोचन किया गया. दक्षिण कोरिया से पधारे हिंदी के विद्वान डॉ. को. जोग. किम ने भक्ति साहित्य को भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर तथा विश्वकल्याण का मार्गदर्शक माना. इसी सत्र में साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था की ओर से साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली विभूतियों को शाल, श्रीफल और प्रशस्तिपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया. इस अवसर पर डॉ. दिलीप सिंह ने डॉ. शिवेंद्र, डॉ.रामजी तिवारी, डॉ. दयाल आशा, डॉ. एस. एन. सिंह, डॉ. रामआह्लाद चौधरी, डॉ. बीना खेमचंदानी, डॉ. सतीश पांडेय आदि को सम्मानित किया. डॉ. किम ने साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था की वेबसाईट का उद्घाटन किया. 

प्रथम सत्र में डॉ. शीतला प्रसाद दुबे ने भक्ति साहित्य में व्यक्त विश्वकल्याण की भावना पर प्रकाश डाला. कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रामआह्लाद चौधरी ने वर्तमान व्यावहारिकता एवं आपाधापी से भरे जीवन में भक्ति साहित्य की प्रासंगिकता को स्पष्ट किया. सत्र के सम्माननीय अतिथि डॉ. किम ने बड़ी सहजता से हिंदी भक्ति साहित्य की भावभूमि की कलातीत सार्वभौमिकता को स्वीकार किया. 

उच्च शिक्षा और शोध संस्था, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद के आचार्य एवं अध्यक्ष डॉ.ऋषभ देव शर्मा ने भक्ति को चेतना एवं व्यावहारिकता से जोड़ते हुए समय के साथ उसे गंभीरता से ग्रहण करने की अनिवार्यता पर बल दिया. 

औरंगाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अंबादास देशमुख ने भक्ति साहित्य की भाषा को विश्व मानव से जोड़ने वाला मूल तंतु बताया. सत्र की अध्यक्षता डॉ. दिलीप सिंह ने की. डॉ. मुक्ता नायडू ने संचालन किया और सभी का आभार व्यक्त किया. 

इस सत्र के आरंभ में इस वर्ष दिवंगत हुए हिंदी साहित्यकारों को स्मरण कर श्रद्धांजलि समर्पित की गई. डॉ. राजेंद्र यादव, डॉ. के. पी. सक्सेना, डॉ. शिवकुमार आदि साहित्यकारों की आत्मा की शांति हेतु संगोष्ठी में दो मिनट का मौन रखा गया. 

संगोष्ठी के उपरांत सभी अतिथियों और प्रतिभागियों को 5000 वर्ष पुराने अंबरनाथ मंदिर, टिटवाला गणेश गणेश मंदिर (जिसे सिद्धि मंदिर माना जाता है) का भ्रमण करवाया गया. 

प्रतिभागियों की विशाल संख्या को ध्यान में रखकर संगोष्ठी के दूसरे दिन छह समानांतर स्तरों में संगोष्ठी आयोजित की गई. अस्सी से अधिक प्रपत्र प्रस्तुत किए गए जिनमें सूर, कबीर आदि के अलावा मराठी, सिंधी, तमिल, कन्नड़, पंजाबी आदि अन्य भारतीय भाषाओं के भक्तों के साहित्य में वर्णित विश्वकल्याण और विश्वबंधुत्व की भावना पर प्रकाश डाला गया. इन छह समानांतर सत्रों में विभक्त संगोष्ठी के विषय थे – साहित्य और मानव मूल्य, सूफी साहित्य और लोक संग्रह, हिंदीतर भाषाओं में विश्वबंधुत्व की भावना, भक्ति, दर्शन एवं कृष्ण काव्य, राम साहित्य और लोकमंगल आदि. इन सत्रों की अध्यक्षता क्रमशः डॉ. दिलीप सिंह, डॉ. रामआह्लाद चौधरी, डॉ. अनिल सिंह, डॉ. अंबादास देखमुख, डॉ. ऋषभ देव शर्मा और डॉ. अशोक धुलधुले ने की. 

संगोष्ठी के समानांतर सत्रों में डॉ. श्रीराम परिहार, डॉ. श्रीराम जी तिवारी, डॉ. घरत अर्जुन, डॉ. नारायण, डॉ. उत्तम भाई पटेल, डॉ. माधव पंडित, डॉ. विष्णु सर्वदे, डॉ. शेषारत्नम, डॉ. रामनाथम और डॉ. मधुकर पाडवी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहें. उक्त सत्रों का संचालन डॉ. मोहसिन खान, प्रा. संजय निबलाकर, डॉ. एम. एच. सिद्दीकी, डॉ. शील अहुजा तथा डॉ. मिथिलेश शर्मा ने किया.

समापन सत्र में साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था द्वारा डॉ. शीला गुप्ता, डॉ. शेषारत्नम, डॉ. मुक्ता नायडू, डॉ. अशोक धुलधुले, डॉ. शेख हसीना, डॉ. शीतला प्रसाद दुबे का प्राचार्य ललितांबाल नटराजन एवं डॉ. दिलीप सिंह ने शाल, श्रीफल एवं प्रशस्तिपत्र प्रदान कर सम्मानित किया. इस सत्र के अध्यक्ष डॉ. दिलीप सिंह ने संगोष्ठी की सफलता और उपलब्धियों की चर्चा करते हुए संस्था की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया. इस अवसर पर उपप्राचार्य नंद वघारिया, कोंकण से पधारे प्रा. अर्शद आवटे, गुजरता से आए डॉ. उत्तम भाई पटेल, प्रा. रीना सिंह एवं छात्र प्रतिनिधि डॉ. उपाध्याय सूर्यभान ने संगोष्ठी के विभिन्न पक्षों पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत की. 

समापन सत्र का कुशल संचालन डॉ. अनिल सिंह ने किया. संगोष्ठी को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग देने हेतु डॉ. अनिल सिंह, सह संयोजिका प्रा. रीना सिंह, प्रा. योगेंद्र खत्री, डॉ. अजय सिंह, डॉ. पी. के. सिंह और कर्मठ छात्राओं को धन्यवाद देते हुए संगोष्ठी के संयोजक डॉ. संतोष मोटवानी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया. 






बुधवार, 18 दिसंबर 2013

'मिट्टी के रंग' का लोकार्पण


12 दिसंबर 2013 (गुरुवार) को लेखनी महिला चैतन्य साहिती सांस्कृतिक संस्था ने चिकडपल्ली, हैदराबाद स्थित श्री त्यागराज गाना सभा में डॉ. वासा प्रभावती की तेलुगु कृति के आर. चंद्रशेखर कृत अनुवाद 'मिट्टी के रंग' का लोकार्पण समारोह आयोजित किया.

अध्यक्ष :  डॉ. राधेश्याम शुक्ल
मुख्य अतिथि/ लोकार्पणकर्ता : प्रो. ऋषभ देव शर्मा
विशिष्ट अतिथि : प्रो. पी. माणिक्यांबा
पुस्तक परिचय : श्रीमती आर. शांता सुंदरी
आत्मीय अतिथि : डॉ. कलावेंकट दीक्षितुलु
अतिथि : डॉ. बी. वाणी


सोमवार, 9 दिसंबर 2013

''महाभारत की प्रेम कथाएँ'' लोकार्पित


''भक्ति साहित्य में विश्वबंधुत्व की भावना'' पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न




गुरुवार, 21 नवंबर 2013

'आंध्र में हिंदी लेखन.......' लोकार्पित





'तेलुगु साहित्य का हिंदी पाठ' प्रो. एन. गोपि को समर्पित



प्रो. ऋषभ देव शर्मा की सद्यःप्रकाशित समीक्षा पुस्तक 'तेलुगु साहित्य का हिंदी पाठ' का समर्पण वाक्य तेलुगु के शीर्षस्थ समकालीन साहित्यकार प्रो. एन. गोपि को लक्ष्य करके लिखा गया है, जो इस प्रकार है - "समकालीन भारतीय कविता के उन्नायक 'नानीलु' के प्रवर्तक परम आत्मीय अग्रज कवि प्रो. एन. गोपि को सादर"

20 नवंबर 2013 को इस पुसतक की पहली प्रति समर्पित करने जब डॉ. ऋषभ देव शर्मा रात्रि 8 बजे डॉ. एन. गोपि के घर पहुँचे तो पुस्तक का समर्पण वाक्य पढ़कर प्रो. एन. गोपि रोमांचित और गद्गद हो उठे. उल्लासपूर्वक उन्होंने अपनी अर्धांगिनी प्रतिष्ठित तेलुगु कवयित्री एन. अरुणा जी को आवाज लगाई और अभ्यागत लेखक को अंगवस्त्र द्वारा सम्मानित करने के लिए कहा. 

भावविभोर होकर बार बार प्रो. एन. गोपि कहते रहे - पुस्तक समर्पण और स्वीकार मेरे लिए कोई नई बात नहीं है लेकिन आपने यह पुस्तक मुझे समर्पित करके हिंदी की ओर से तेलुगु का जो सम्मान किया है उसे मैं आजीवन एक सुखद अनुभव की तरह याद रखूँगा. 

ऐसे अवसर पर प्रो. ऋषभ देव शर्मा का अवाक् रह जाना सहज ही था! 




शनिवार, 9 नवंबर 2013

आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी : श्रद्धा-समर्पण





अभी कल दोपहर जब श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, हैदराबाद, के अध्यक्ष राजकुमार सुराणा जी का फोन आया कि आचार्य तुलसी (1914-1997) जन्मशती समारोह के अंतर्गत उनकी संस्था ने नगर के वरिष्ठ हिंदी साहित्यकारों के सम्मान का निश्चय किया है तो मैंने लपक कर उनके इस शुभ-संकल्प को सराहा और आचार्य तुलसी की काव्यकृति 'अग्निपरीक्षा' का भी स्मरण कराया. लेकिन तब मैं संकोच में पड़ गया जब उन्होंने बताया कि सम्मान पाने वालों की सूची में मेरा भी नाम है.

 XXX 

अस्तु, यह सम्मान-कार्यक्रम 10 नवंबर 2013 को 'आचार्य तुलसी : साहित्य साधना' विषयक सत्र के साथ होना तय हुआ है. आयोजकों के प्रति हार्दिक आभार!!!

गुरुवार, 7 नवंबर 2013

गोइन्का साहित्य पुरस्कार 2014 हेतु प्रविष्टियाँ आमंत्रित



KAMALA GOENKA FOUNDATION
'Madhukunj' 118, 9th Main, 7th Cross, RMV Extn. Sadashivnagar, Bangalore-560080
Tel : 080-28567755, 28562478 Fax : 080-28461395, 28567134 E-mail: kgf@gogoindia.com
Please visit us at: www.kgfmumbai.com

Press release for Publication


Goenka Literary Awards 2014 - Entries Invited

Shri Shyam Sunder Goenka, Managing Trustee of Kamala Goenka Foundation (KGF) has invited entries for an award for best literary translation work either from Hindi to Kannada or from Kannada to Hindi. Literary work may be prose or poetry.

KGF had initiated this award viz. "Pitashree Gopiram Goenka Hindi-Kannada Translation Award" in the year 2006 for the best translation work either from Hindi to Kannada or from Kannada to Hindi. Under this award, the best translator will be presented Rs. 21000/- in cash. The eligibility criteria would be literary translation book published during last ten years viz. from the period of 2004 to 2013. The applicant has to submit a proposal on prescribed form along with four copies each of his published translated book and four copies of original book which has been translated, with his bio-data and two photographs on or before 15th January 2014 at Bangalore office. 

Shri Goenka further announced that an award is also instituted for young Hindi writers of Karnataka (whose age is not more than 35 years). This award is to support new breed of writers in getting published their literary work. Such young eligible writers get a support of Rs.15000/-. This award is named "Hiranmay Yuva Sahityakar Puraskar". The awardees will be selected against submitted manuscripts with evidence of age-limit.The Participants are requested to submit their entry forms at "Kamala Goenka Foundation", No.6, KHB. Industrial Area, 2nd Cross, Yelahanka New Town, Bangalore - 560064. For further information, copies of rules and regulations and entry forms please contact office secretary Mr.Kamlesh no. 080-28562478, 28562479, Mob : 9620207976, email id: kgf@gogoindia.com or visit us at: www.kgfmumbai.com.

बुधवार, 6 नवंबर 2013

सोमवार, 4 नवंबर 2013

शनिवार, 26 अक्तूबर 2013

दीपावली मिलन-सम्मान गोष्ठी संपन्न


हैदराबाद, 20 अक्टूबर, 2013.
ऑथर्स गिल्ड ऑफ इण्डिया, साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति एवं कादम्बिनी क्लब  के तत्वावधान में रविवार दि.20 अक्तूबर को कृष्णदेवराय आंध्रभाषा निलयम भवन में क्लब की 254 वीं मासिक गोष्ठी में दीपावली मिलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया |  डॉ.देवेन्द्र शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की तथा  रामाश्रय गोयल (उ.प्र.), सुरेखा शर्मा (हरियाणा), विजय कुमार संपत्ति, डॉ.गोरखनाथ तिवारी, डॉ.जी.नीरजा, शिवराज सोनी, डॉ.अहिल्या मिश्र मंचासीन हुए |

 प्रथम सत्र में  शुभ्रा महंतो ने सरस्वती वंदना एवं दीपावली गीत प्रस्तुत किया | डॉ.अहिल्या मिश्र ने स्वागत भाषण में क्लब की 20 वर्षों की यात्रा को संक्षेप में बताया, साथ ही मंचासीन अतिथियों से परिचित कराया | उपस्थित सभा को दीपावली की शुभकामनाएं दी | डॉ.रमा द्विवेदी ने विजयकुमार का परिचय दिया | तत्पश्चात क्लब की ओर से मंचासीन अतिथियों का अंगवस्त्र, माला, पुष्प से सम्मान किया गया | पुष्पक (क्लब प्रकाशन) भेंट की गई | इसी सत्र में रामाश्रय कृत “संचिता” काव्य संग्रह एवं सुरेखा शर्मा कृत “आओ पढ़े मनन करें” बाल एकांकी संग्रह का डॉ.देवेन्द्र शर्मा के करकमलों से तालियों की गूँज में लोकार्पण संपन्न हुआ | रामाश्रय ने क्लब की गतिविधि जानकर प्रसन्नता व्यक्त की | सुरेखा जी ने भी हैदराबाद में चल रहे इस साहित्यिक कार्य  की प्रशंसा की | विजयकुमार ने कहा कि हिंदी भाषा की सेवा में हमें जुड़े रहना है | 

डॉ.गोरखनाथ तिवारी ने पत्रकारिता पुरस्कार से हाल ही में सम्मानित होने पर अपने विचार रखे | डॉ.जी. नीरजा ने कहा कि मुझे सफलता की सीढ़ी तक पहुंचाने में मेरे गुरु की प्रेरणा रही है | डॉ.देवेन्द्र ने अध्यक्षीय बात में कहा कि शहर में पधारे अतिथियों से परिचय हुआ तथा उनके साहित्य का विमोचन कादम्बिनी क्लब के मंच से हुआ है यह मंच की उपलब्धि है | इस सत्र का संचालन मीना मूथा ने किया |

दूसरे सत्र में भंवरलाल उपाध्याय के संचालन में कविगोष्ठी का आयोजन हुआ | वेणुगोपाल भट्टड़, श्रीनिवास सावरीकर के सानिध्य में दीप पर्व को केन्द्रित करते हुए कविता, गीत, गजल, मुक्तक, हायकू सुनाए गए | इसमें भावना पुरोहित, संपत देवी मुरारका, एल.रंजना, लीला बजाज, सत्यनारायण काकडा, गौतम दीवाना, विजय विशाल, सीताराम माने, पुष्पा वर्मा, डॉ.रमा द्विवेदी, ज्योति नारायण, डॉ.अहिल्या मिश्र, मीना मूथा, आशीष नैथानी सलिल, एफ.एम,सलीम, गुरुदयाल अग्रवाल, सूरजप्रसाद सोनी, उमा सोनी, सरिता सुराणा जैन, पुरुषोतम कडेल, सुनीता गुप्ता, रतनलाल दरक, एस. सुजाता, जुगल बंग जुगल, प्रमोद कुमार पयासी, अजीत गुप्ता, शिवकुमार कोहिर तिवारी, डॉ.जी. नीरजा, विनीता शर्मा, रामाश्रय गोयल, सुरेखा शर्मा, विजयकुमार सम्पति, श्रीनिवास सावरीकर, वेणुगोपाल भट्टड़ ने भाग लिया | डॉ.सीता मिश्र, डॉ.मदन देवी पुकरणा, चंद्रलेखा कोठारी, श्रीनिवास सोमानी, वी.कृष्णराव भी अवसर पर उपस्थित थे |

 ज्योति नारायण के धन्यवाद के साथ गोष्ठी का समापन हुआ
[रिपोर्ट : संपत देवी मुरारका]

सोमवार, 7 अक्तूबर 2013

डॉ। गोरख नाथ तिवारी सम्मानित




शनिवार, 5 अक्तूबर 2013

‘प्रेम बना रहे’ का तेलुगु अनुवाद ‘प्रिये चारुशीले’ लोकार्पित


‘प्रेम बना रहे’ के तेलुगु अनुवाद ‘प्रिये चारुशीले’ के लोकार्पण के अवसर पर (बाएँ से) डॉ.नंडूरि राजगोपाल, अनुवादक डॉ.बी.हेमलता, लोकार्पणकर्ता डॉ.राधेश्याम शुकल, अध्यक्ष डॉ.एम.वेंकटेश्वर, मूल रचनाकार डॉ.ऋषभदेव शर्मा, विशेष अतिथिगण डॉ.वेन्ना वल्लभराव एव. डी.देवानंद रेड्डी. 

विजयवाडा, 5 अक्टूबर, 2013. 
यहाँ होटल ऐलापुरम के सम्मलेन कक्ष में आयोजित एक साहित्यिक समारोह में डॉ.बी.हेमलता द्वारा अनुसृजित काव्यकृति ‘प्रिये चारुशीले’ का लोकार्पण ‘भास्वर भारत’ के संपादक डॉ.राधेश्याम शुक्ल के हाथों संपन्न हुआ. समारोह की अध्यक्षता अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ.एम.वेंकटेश्वर ने की. 

पुस्तक का परिचय देते हुए ‘चिनुकु’ पत्रिका के संपादक नंडूरी राजगोपाल ने बताया कि ‘प्रिये चारुशीले’ हिंदी कवि ऋषभदेव शर्मा की चर्चित काव्यकृति ‘प्रेम बना रहे’ का तेलुगु काव्यानुवाद है. उन्होंने कहा कि इस काव्य में प्रेम के अनेक धरातल और आयाम उद्घाटित हुए हैं जो सौंदर्य और औदात्य की गरिमा के कारण विशेष रूप से आकर्षित करते हैं. 

लायोला कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ.वेन्ना वल्लभराव ने मूल रचना और अनुवाद की तुलना करते हुए कहा कि सांस्कृतिक और मिथकीय प्रसंगों से युक्त होने का कारण ऋषभदेव शर्मा की कविता का अनुवाद करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण है परंतु अनुवादिका डॉ.बी.हेमलता ने अत्यंत सावधानीपूर्वक इन कविताओं का तेलुगु में सफल संप्रेषणीय अनुवाद किया है. 

इस अवसर पर डॉ.ऋषभदेव शर्मा ने ‘प्रेम बना रहे’ की पांच प्रतिनिधि कविताओं का वाचन किया तथा भागवतुल हेमलता ने उनका अनुवाद पढ़कर सुनाया जिसे उपस्थित साहित्यिक समुदाय ने खूब सराहा. विशेष अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी डी.देवानंद रेड्डी ने कहा कि मनुष्य और मनुष्य को निकट लाने के लिए कविता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा बहुभाषी समाज में अनुवाद इसी मानवीयकार्य को संपन्न करता है अतः डॉ.हेमलता का अनुवादकार्य अभिनंदनीय है. 

आरंभ में अध्यक्ष और अतिथियों ने सरस्वती पूजन और द्वीप प्रज्वलन किया. अतिथियों का स्वागत सत्कार डॉ.गुर्रमकोंडा नीरजा, सीता, पद्मा, मूर्ति, प्रसाद ने किया. साथ ही कवि और अनुवादक का सारस्वत सम्मान भी किया गया. 

बुधवार, 2 अक्तूबर 2013

डॉ.अजीत गुप्ता के सम्मान में काव्य-संध्या आयोजित


इण्डिया काइन्डनेस मूवमेंट हैदराबाद एवं कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में रविवार दि. 29 सितंबर 2013 को श्रीकृष्ण मुरारका पैलेस में सम्मान एवं काव्य-संध्या का आयोजन संपन्न हुआ | यह काव्य-संध्या डॉ.अजीत गुप्ता (भारत विकास परिषद्, राष्ट्रीय चैयरमेन: महिला सहभागिता) के सम्मान में रखी गई |

इस अवसर पर डॉ.ऋषभदेव शर्मा (अध्यक्ष, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, द. भा. हि. प्रचार सभा, खैरताबाद) अध्यक्ष, डॉ.अजीत गुप्ता (मुख्य अतिथि), प्रो.शुभदा वांजपे (उस्मानिया विश्वविद्यालय, हिन्दी विभागाध्यक्ष) विशेष अतिथि, डॉ.अहिल्या मिश्र (क्लब संयोजिका), संपत देवी मुरारका (अध्यक्षा,इण्डिया काईन्डनेस मूवमेंट, हैदराबाद), रत्नमाला साबू (अध्यक्षा, है. सि. मारवाड़ी महिला संगठन) मंचासीन हुए | 

तनुजा व्यास ने उपस्थित सभा का स्वागत किया | संपत देवी मुरारका ने सुमधुर स्वर में सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की | डॉ.ऋषभदेव शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित सम्मान एवं काव्य-संध्या में संपत देवी मुरारका ने मुख्य अतिथि डॉ.अजीत गुप्ता का परिचय देते हुए कहा कि डॉ. गुप्ता जी से साहित्यिक कार्यक्रम में भोपाल में भेंट हुई थी तथा महिला साहित्यकार के नाते लेखन क्षेत्र में उनके योगदान की प्रशंसा की | 

डॉ.अजीत गुप्ता अखिल भारतीय महिला समन्वय की बैठक में हैदराबाद पधारी है | डॉ. अजीत गुप्ता ने कहा कि हैदराबाद में साहित्यिक माहौल है, वे गद्गद हुई और अपनी एक कविता सुनाई जिससे सभी श्रोता मंत्र-मुग्ध हुये |

 प्रो.शुभदा वांजपे ने कहा कि कार्यक्रम का आयोजन बहुत अच्छा रहा | आपने मेरा सम्मान किया उसके प्रति धन्यवाद | 

डॉ.ऋषभदेव शर्मा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि डॉ.अजीत गुप्ता जी से साहित्यिक कार्यक्रम में वर्धा में भेंट हुई थी, यहाँ पुन: भेंट का संजोग बन आया  | इससे उपस्थित सभी साहित्यिक वर्ग ने यह विचार व्यक्त किया कि इस तरह के स्नेह मिलन से आपस में आत्मीयता बढ़ेगी |

तत्पश्चात संयुक्त तत्वावधान में मंचासीन अतिथियों का शॉल, पुष्पगुच्छ से सम्मान किया गया | कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुये डॉ. मिश्र ने इण्डिया काईन्डनेस मूवमेंट एवं कादम्बिनी क्लब कि जानकारी दी एवं संपत देवी मुरारका को ब्लॉगर उत्सव काठमांडू में “परिकल्पना साहित्य सम्मान” से सम्मानित किया गया, उसकी विस्तार पूर्वक जानकारी भी दी |

तनुजा व्यास के संचालन में विनीता शर्मा, जी.नीरजा, पवित्रा अग्रवाल, संपत देवी मुरारका, डॉ.अहिल्या मिश्र, सुषमा वैद, सरिता सुराणा जैन, हेमलता शर्मा, लता व्यास, पुष्पा वर्मा, सुरेश जैन,तनुजा व्यास, लीला बजाज, रत्नमाला साबू, डॉ.अजीत गुप्ता, प्रो.सुभदा वांजपे, प्रिया गर्ग, आनिया अग्रवाल ने गीत, कविता, गजल, मुक्तक, लघुकथा सुनाकर सभी की तालियाँ बटोरी | डॉ.ऋषभदेव शर्मा ने अध्यक्षीय काव्यपाठ किया | 

इस अवसर पर राजेश मुरारका, वी.कृष्णा राव, श्रीसाहिती, श्री विनोद कुमार अग्रवाल, सिमरन अग्रवाल, सीता अग्रवाल गीता अग्रवाल, श्रीनिवास माहेश्वरी,आशा माहेश्वरी, सरोज शर्मा, सन्नी गर्ग, भूपेंद्र मिश्र, सी.एम. दयानंद भी उपस्थित थें | प्रिया गर्ग के धन्यवाद के साथ गोष्ठी का समापन हुआ |



- संपत देवी मुरारका, अध्यक्षा, इण्डिया काईन्डनेस मूवमेंट,हैदराबाद

रविवार, 29 सितंबर 2013

कार्यक्रम : ' प्रिये चारुशीले ' काव्यसंग्रह लोकार्पण समारोह :1/10/2013

  ' ప్రియే చారు శీలే ' గ్రంథావిష్కరణ  : కార్యక్రమం
1       వేదిక మీద అతిథుల ఆహ్వానం    :        డా  భాగవతుల హేమలత 
2       ప్రార్ధనా  గీతం                        :        సుశ్రీ  శ్రీ లలిత                       
3       దీప ప్రజ్వలన                         :        అతిథులు                      
4      స్వాగతోపన్యాసం                      :        డా భాగవతుల హేమలత     
5       అతిథుల పరిచయం                  :        ప్రొ ఎం వెంకటేశ్వర్           
                                                        డా బీ హేమలత               
6       'ప్రియే చారుశీలే' -  పరిచయం      :        శ్రీ నండూరి రాజగోపాల్       
7       'ప్రియే చారు శీలే ' ఆవిష్కరణ       :        డా రాధేశ్యామ్ శుక్ల         
8       పుస్తకావిష్కర్త భావాలు              :        డా రాధేశ్యామ్ శుక్ల
9       కవితా పఠనం                         :        ప్రొ ఋషభ్ దేవ్ శర్మ
                                                        డా భాగవతుల హేమలత
10      కవి సన్మానం                                 :        డా భాగవతుల హేమలత
                                                        ప్రొ ఎం వెంకటేశ్వర్  
11      అనుసృజనకర్త సన్మానం            :        డా రాధేశ్యామ్ శుక్ల, 
                                                        ప్రొ ఋషభ్ దేవ్ శర్మ
                                                        ప్రొ ఎం వెంకటేశ్వర్
12     అతిథుల సన్మానం                    :        డా హేమలత కుటుంబ సభ్యులు
13      ప్రియే చారు శీలే - సమీక్ష           :        డా వెన్నా వల్లభ రావు
14      శుభాశీషులు                                 :        శ్రీ డీ దేవానంద రెడ్డి
15      కవి స్పందన                          :        ప్రొ ఋషభ్ దేవ్ శర్మ
16      అనుసృజనకర్త స్పందన             :        డా భాగవతుల హేమలత   
17      అధ్యక్షోపన్యాసం                      :        ప్రొ ఎం వెంకటేశ్వర్
18      వందన సమర్పణ                    :        డా నండూరి రాజగోపాల్
                                         : శుభం : 

' प्रिये चारुशीले ' काव्यसंग्रह लोकार्पण समारोह :
 दिनांक 1 अक्तूबर 2013
सायं 6 बजे, होटल ईलापुरम, विजयवाड़ा ।
                                     
                                                कार्यक्रम
1       अतिथियों का मंच पर आह्वान       :         डॉ बी हेमलता
2       सरस्वती वंदना                            :         सुश्री श्रीललिता
3       दीप प्रज्वलन                               :         मंचासीन अतिथि गण
4       अतिथियों का पुष्प गुच्छ से स्वागत :         आयोजन समिति के सदस्य
5       स्वागत भाषण                             :         डॉ बी  हेमलता
6       मंचासीन अतिथियों का  परिचय     :         प्रो एम वेंकटेश्वर
                                                                   डॉ बी हेमलता                  
7       प्रिये चारु शीले - संग्रह का परिचय   :         श्री एन राजगोपाल
8       प्रिये चारु शीले का लोकार्पण          :         डॉ राधेश्याम शुक्ला
9       लोकार्पणकर्ता के उद्गार                 :         डॉ राधेश्याम शुक्ला
10     कविता पाठ                                :         प्रो ऋषभदेव शर्मा
                                                                   डॉ बी हेमलता
11     कवि सम्मान                               :         प्रो एम वेंकटेश्वर
                                                                   डॉ बी हेमलता
12     अनुवादिका सम्मान                      :         डॉ ऋषभदेव शर्मा
                                                                   प्रो एम वेंकटेश्वर
13     मंचासीन अतिथियों का सम्मान      :         डॉ बी हेमलता ( परिजन )
14     प्रिये चारु शीले - समीक्षा               :         डॉ वी वल्लभ राव
15     शुभाशीष                                   :         श्री देवानंद रेड्डी       
16     शुभाशंसा                                   :         डॉ जी नीरजा
17     कवि का प्रतिस्पन्दन                     :         प्रो ऋषभदेव शर्मा
18     अनुवादिका का प्रतिस्पन्दन            :         डॉ बी हेमलता
19     अध्यक्षीय वक्तव्य                          :         प्रो एम वेंकटेश्वर

20     धन्यवाद ज्ञापन                            :         श्री एन राजगोपाल 

शनिवार, 28 सितंबर 2013

निमंत्रण : 'प्रेम बना रहे' के एक और तेलुगु अनुवाद 'प्रिये चारुशीले' का लोकार्पण 1/10/2013 को

निमंत्रण
डॉ.भागवतुल हेमलता द्वारा अनूदित काव्य ‘प्रिये चारुशीले’ का लोकार्पण समारोह
समारोह स्थल : होटल इलापुरम कॉन्फ्रेंस हाल, गांधीनगर, विजयवाडा
दिनांक : 1.10.2013, मंगलवार
समय : सायं 6 बजे

अध्यक्ष :                 प्रो.एम.वेंकटेश्वर,
पूर्व अध्यक्ष, हिंदी विभाग, अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय,हैदराबाद

लोकार्पणकर्ता :                   डॉ.राधेश्याम शुक्ल,
संपादक, ‘भास्वर भारत’, हैदराबाद

मुख्य अतिथि/ मूल रचनाकार : प्रो.ऋषभदेव शर्मा,
अध्यक्ष, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदरबाद

विशिष्ट अतिथि :           श्री डी.देवानंद रेड्डी,
जिला शिक्षा अधिकारी, कृष्णा जिला

विश्लेषक :                डॉ.वेन्ना वल्लभराव,
अध्यक्ष, हिंदी विभाग, आंध्र लॉयोला कॉलेज

                        श्री नंडूरि राजगोपाल, संपादक, चिनुकु
अनुवादक के उद्गार :        डॉ.भागवतुल हेमलता

संयोजन :                चिनुकु पब्लिकेशन्स, दत्ता’स नया बाजार, राज युवराज थियेटर्स के सामने, गांधीनगर, विजयवाडा. मोबाइल – 9848132208

गुरुवार, 26 सितंबर 2013

गोइन्का राजस्थानी पुरस्कार : वर्ष 2013




चित्रावली : वैश्वीकरण की आंधी में हिंदी कहानी से गायब होता मनुष्य : बैरकपुर : संगोष्ठी


सोमवार, 23 सितंबर 2013

वैश्वीकरण की आंधी में हिंदी कहानी से गायब होता मनुष्य : बैरकपुर (पश्चिम बंगाल)

20/21 सितंबर 2013 को बैरकपुर राष्ट्रगुरु सुरेंद्रनाथ महाविद्यालय, बैरकपुर, पश्चिम बंगाल में 'वैश्वीकरण की आंधी में हिंदी कहानी से गायब होता मनुष्य' पर केंद्रित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गयी. इस संगोष्ठी का उद्घाटन प्रसिद्ध कथाकार काशीनाथ सिंह ने किया तथा 'वैश्वीकरण का परिप्रेक्ष्य' विषयक प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो.ऋषभदेव शर्मा (हैदराबाद) ने की. इस सत्र के विषय विशेषज्ञ रहे  प्रो.राजमणि शर्मा (बनारस) और डॉ.बजरंग बिहारी तिवारी (दिल्ली). इस सत्र का संचालन डॉ.नीरज शर्मा (कार्यक्रम संयोजिक) ने किया.

दूसरा सत्र 'वैश्वीकरण और हिंदी कहानी' पर केंद्रित था. इस सत्र के विषय विशेषज्ञ रहे  प्रो.ऋषभदेव शर्मा और प्रो..अरुण होता. इस सत्र की अध्यक्षता डॉ.बजरंग बिहारी तिवारी ने की.

यह प्रविष्टि लिखने के दौरान संयोजक द्वारा प्रेषित आधिकारिक मीडिया विज्ञप्ति प्राप्त हो जाने के कारण इसे यहीं पूर्ण करते हुए वह विज्ञप्ति प्रस्तुत की जा रही है.... (नीरजा गुर्रमकोंडा)

‘‘वैश्वीकरण की आँधी में हिन्दी कहानी से गायब होता मनुष्य’’
बैरकपुर में द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
बैरकपुर,21 सितंबर 2013 (मीडिया विज्ञप्ति).


20 और 21 सितंबर 2013 को ‘‘बैरकपुर राष्ट्रगुरु सुरेन्द्रनाथ महाविद्यालय प.बं.’ में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ के तत्वाधान में ‘‘वैश्वीकरण की आँधी में हिन्दी कहानी से गायब होता मनुष्य’’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी भव्यतापूर्वाक संपन्न हुई। गोष्ठी का शुभारंभ पश्चिम बंग  राज्य विश्वविद्यालय के उपाचार्य एवं महाविद्यालय के प्राचार्य ने दीप प्रज्वलित करके आये हुए विद्वान अतिथियों के स्वागत से किया। 

उद्घाटन सत्र में बीज व्याख्यान देते हुए प्रसिद्ध कथाकार प्रो0 काशीनाथ सिंह ने कहा कि सच्चे अर्थों में मनुष्य आज वैश्वीकरण के जाल में उलझा हुआ है किन्तु उसके बाद भी वह संघर्षरत है। उन्होंने कहा कि जब भी कहानी में आम आदमी की बात की जायेगी तो सर्वप्रथम हमें प्रेमचंद याद आयेगें। 

गोष्ठी के प्रथम तकनीकी सत्र में अध्यक्ष प्रो0 ऋषभदेव शर्मा ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण से लड़ने में हमारी कुटुंब संस्कृति के मूल्य बहुत सहायता कर सकते हैं. लोक और स्थानीयता के सहारे वैश्वीकरण का सामना करने में दलित, आदिवासी और महिला कथाकारों की अग्रणी भूमिका की उन्होंने सराहना की। हिन्दी कहानी और दलित साहित्य के आधिकारिक विद्वान डॉ0 बजरंग बिहारी तिवारी ने देश की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था पर बात करते हुए हिन्दी कहानी में गायब होते हुए आम आदमी की पीड़ाओं को उद्घाटित किया। काशी से आये हुए विद्वान प्रो0 राजमणि शर्मा ने ‘विश्व बैंक’ और ‘अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष’ की व्यवस्था विरोधी नीतियों पर विचार करते हुए हिन्दी कहानी पर बहस की। 

अन्य सत्रों में प.बं. राज्यविश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 अरुण होता ने कहा कि आज हमें अपने युवा रचनाकारों को एक प्रेरणादायी परिवेश उपलब्ध कराना होगा जिससे वे बाजारवाद से लड़ सकें। महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय निदेशक एवं मशहूर पत्रकार कृपाशंकर चौबे ने काशीनाथ सिंह, ज्ञानरंजन और अखिलेश की कहानियों के आलोक में वैश्वीकरण की अमानुषिकता को उजागर किया। बाँदा उ0 प्र0 से आये हुए विद्वान डॉ0 देवलाल मौर्य ने कहा कि समूचे साहित्य और समाज के सामने बाजार सुरसा की तरह मुँह बाये खड़ा है। इस दृष्टि से उन्होंने काशीनाथ सिंह जी की कहानी ‘कौन ठगवा नगरिया लूटल हो’ को एक महत्वपूर्ण कहानी बताया। 

‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में वरिष्ठ कथाकार डॉ0 काशीनाथ सिंह ने सुधी श्रोताओं के शताधिक प्रश्नों का उत्तर देते हुए साहित्य के प्रति उनकी संवेदनाओं को सराहा। 

संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए प्रो0 ऋषभदेव शर्मा ने कहा कि संतोष का विषय है कि भारतीय भाषाओँ का साहित्य वैश्वीकरण और बाजार के प्रतिपक्ष में खड़ा हुआ है। समापन सत्र के अध्यक्ष प्रो0 अरुण होता ने कहा कि भारतीय कहानी में पहाड़ी जीवन के ऊपर लिखी गयी कहानियाँ उस संवेदना से परिचित कराती है जो आज भी आम आदमी में बची हुई हैं। 

विभिन्न सत्रों का संचालन प्रो0 अरुण होता, डॉ0 नीरज शर्मा, डॉ0 रमा मिश्र, डॉ0 विवेक साव, श्रीपर्णा तरफदार और काजू कुमारी साव ने किया। धन्यवाद प्रस्ताव में डॉ. नीरज शर्मा ने सुदूर अंचलों से आये हुए गणमान्य विद्वानों को साधुवाद देते हुए कहा कि उन्होंने अपने लोकोन्मुखी चिंतन से राष्ट्रीय संगोष्ठी को ऊर्जावान बनाया। 

प्रस्तुति : डॉ. नीरज शर्मा, बैरकपुर (पश्चिम बंगाल)