मंगलवार, 10 मार्च 2020

(तकनीकी संगोष्ठी) रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और डीआरडीओ

हैदराबाद, 5 मार्च 2020. अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई) में रक्षा अनुसंधान एवं विकस संगठन की आठ प्रयोगशालाओं की द्वि दिवसीय अखिल भारतीय संयुक्त तकनीकी संगोष्ठी "रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और डीआरडीओ " का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने किया। (चित्र सौजन्यः- काज़िम अहमद, हिंदी अधिकारी, आरसीआई)
संगोष्ठी अध्यक्ष अरविंद कुमार पाठक, वैज्ञानिक 'जी' आरसीआई ने मुख्य अतिथि प्रो. ऋषभदेव शर्मा को सम्मान चिह्न समर्पित किया।  

आठों प्रयोगशालाओं के निदेशकों के साथ दीप प्रज्वलन 

मुख्य अतिथि का उद्बोधनः सरल भाषा में वैज्ञानिक साहित्य रचें

 मुख्य अतिथि प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने 'रक्षा अनुसंधान राजभाषा पोर्टल' लोकार्पित किया।

 
दीप ज्योति नमोस्तु ते : मुख्य अतिथि ने उद्घाटन-दीप प्रज्वलित किया 

डॉ.अर्चना पांडेय द्वारा संपादित काव्य संकलन "गुलमोहर" का विमोचन 

आयोजक प्रयोगशाला (आरसीआई) को शील्ड प्रदान की गई।

मुख्य अतिथि के हाथों सभी प्रयोगशाला निदेशकों को सम्मान चिह्न प्रदान किए गए।

मुख्य अतिथि का संबोधन : वैज्ञानिक और तकनीकी साहित्य सृजन के लिए हिंदी पूर्णतः समर्थ भाषा 
 :
आरसीआई की हिंदी गृह-पत्रिका 'इमारत' का विमोचन

आरसीआई, एएसएल, डीआरडीएल, डीएलआरएल, डीएमआरएल, अनुराग, चेस हैदराबाद एवं एनएसटीेल विशाखापट्टणम के निदेशकों के साथ मुख्य अतिथि

एक्सपोजिशन हॉल में... 

।। तमसो मा ज्योतिर्गमय ।।

आरंभ से पहले...
-प्रस्तुतिडॉ.बी.बालाजी, 
उप प्रबंधक, 
हिंदी अनुभाग एवं निगम संचार, 
मिश्र धातु निगम लिमिटेड

मंगलवार, 3 मार्च 2020

भाषा और संस्कृति पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न


दीप प्रज्वलन :
गोवा की पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा। साथ में, डॉ. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी, प्रो. दिलीप सिंह, प्रो. विनय कुमार, डॉ, विनय कुमार, डॉ. विद्योत्तमा कुंजल एवं ऋषभदेव शर्मा। 


नई दिल्ली, 29 फरवरी, 2020.
"आज का समय पूरी दुनिया में मानवीय मूल्यों के संकट, आसुरी शक्तियों के आतंक और आदर्शों के अभाव का समय है। ऐसे में पूरी दुनिया भारत की ओर उम्मीद की नज़रों से देख रही है। भारत के पास राम और कृष्ण जैसे आदर्श चरित्र उपलब्ध हैं, जो विश्व कल्याण की प्रेरणा दे सकते हैं। इनके माध्यम से दुनिया भर में मानवमूलक संस्कृति की पुनः स्थापना की जा सकती है। तरह-तरह के खंड-खंड विमर्शों के स्थान पर 'परिवार विमर्श' आज की आवश्यकता है और इसी के साथ रामत्व और कृष्णत्व की प्रतिष्ठा जुड़ी है।" ये विचार प्रख्यात साहित्यकार, लोक संस्कृति विशेषज्ञ और गोवा की पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने नई दिल्ली महानगर निगम  के विशाल कन्वेंशन हॉल में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रकट किए।
पुस्तक लोकार्पण सत्र :
पूर्व सांसद सुनील शास्त्री, डॉ. लीना सरीन, डॉ. ऋषभदेव शर्मा, डॉ. विपिन कुमार, प्रो. दिलीप सिंह एवं डॉ. यंतु देव बुधु

सम्मेलन का आयोजन साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था (मुंबई), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (अमरकंटक) तथा विश्व हिंदी परिषद (दिल्ली) ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता अमरकंटक से पधारे कुलपति डॉ. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने की और बीज वक्तव्य प्रो. दिलीप सिंह ने दिया। समारोह में देश भर से आए विद्वानों और साहित्यकारों के अलावा रूस की डॉ. लीना सरीन तथा हिंदी प्रचारिणी सभा, मॉरीशस के अध्यक्ष डॉ. यंतुदेव बुधु, महात्मा गांधी संस्थान, मॉरीशस की निदेशक डॉ. विद्योत्तमा कुंजल तथा प्रो.अलका धनपत और लिथुआनिया की कत्थक नृत्यांगना कैटरीना ने विभिन्न विचार सत्रों को संबोधित किया। पटना विश्वविद्यालय के प्रो. विनय कुमार ने अतिथियों का स्वागत-सत्कार करते हुए संगोष्ठी के विचारणीय विषयों का परिचय दिया। समारोह के विचारणीय विषय 'आधुनिक समय में रामकथा और कृष्णकथा का वैश्विक संदर्भ' तथा 'नई शिक्षा नीति और हिंदी भाषा' रहे। 

समापन सत्र के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद सुनील शास्त्री।
साथ में- डॉ. लीना सरीन, डॉ. ऋषभदेव शर्मा, प्रो. दिलीप सिंह, डॉ. यंतु देव बुधु, डॉ. विद्योत्तमा कुंजल एवं प्रो- गिरीश जोशी। 

समापन सत्र में बतौर  मुख्य अतिथि पधारे पूर्व सांसद सुनील शास्त्री ने राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण में राम और कृष्ण की लोक कल्याणकारी संघर्षगाथाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा और संस्कृति का सीधा संबंध हमारी भाषाओं के साथ है तथा हमारी भाषाओं में ही जीवन मूल्यों की जड़ें होती हैं, इसलिए यह जरूरी है कि हम भारतीय लोग अपनी भाषाओं का सम्मान करें। उन्होंने हिंदी के साथ साथ अन्य भारतीय भाषाओं को शिक्षा का अनिवार्य अंग बनाने पर ज़ोर दिया।
भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के तृतीय सुपुत्र सुनील शास्त्री के हाथों 'संपादक रत्न' सम्मान ग्रहण करते हुए डॉ. ऋषभदेव शर्मा। साथ में - प्रो. दिलीप सिंह, डॉ. यंतु देव बुधु, डॉ. विद्योत्तमा कुंजल एवं अन्य। 

अवसर पर कई हिंदीसेवियों,साहित्यकारों और शिक्षाविदों को अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया, जिनमें प्रो.दिलीप सिंह, प्रो. विनय कुमार, प्रो. टी वी कट्टीमनी, प्रो ऋषभदेव शर्मा, ज्ञानचंद्र मर्मज्ञ, डॉ. श्रीराम परिहार, डॉ. कैलाश नाथ पांडे, डॉ. मधुकर पाड़वी, और डॉ. भावेश जाधव आदि सम्मिलित हैं। समारोह का समापन  डॉ.प्रदीप कुमार सिंह के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।0

बुधवार, 29 जनवरी 2020

एकदिवसीय राष्ट्रीय शिक्षक उन्नयन कार्यशाला संपन्न

बैंगलोर, 29 जनवरी (मीडिया विज्ञप्ति)।
बिशप कॉटन वीमेन्स क्रिश्चियन कॉलेज की ओर से एकदिवसीय राष्ट्रीय शिक्षक उन्नयन कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न महाविद्यालयों के लगभग 75 हिंदी शिक्षक-शिक्षिकाओं और छात्राओं ने प्रतिभागिता निभाई। अवसर पर बेंगलुरु केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं बेंगलुर विश्वविद्यालय के बी.काम. द्बितीय सेमेस्टर की पाठ्यपुस्तक 'काव्य मधुवन' एवं 'काव्य निर्झर' की कविताओं व उनके कवियों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की गई। 

कार्यशाला का उद्घाटन मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद के परामर्शी प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि किया। उन्होंने दोनों कार्यसत्रों की अध्यक्षता भी की।

मुख्य अतिथि प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने सभी आमंत्रित जनों के बारे में अपने स्नेह को प्रदर्शित करते हुए सभी को शुभकामनाएं दीं व सभी प्रतिभागियों को कार्यक्रम के विषय पर वार्ता के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कविता की ताकत को सभी भिन्नताओं व कुंठाओं के तालों को खोलने की चाबी बताया व इसे व्यक्तित्व के विकास की संभावनाओं का हिस्सा बताया। हिंदी कविता के शिक्षण के क्षेत्र में इस प्रकार के कार्यक्रमों से छात्रों व अध्यापकों के मार्गदर्शन के लिए मुख्य अतिथि ने ऐसे कार्यक्रमों के बार बार होने पर बल दिया । 

बिशप कॉटन वीमेन्स क्रिश्चियन कॉलेज की प्रधानाचार्या प्रोफेसर एस्थर प्रसन्नकुमार व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार यादव ने भी कविता-शिक्षण की आवश्यकता और पेचीदगियों पर सूक्ष्म चर्चा की। 

दो कार्यसत्रों के दौरान डॉ. रेणु शुक्ला, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ कोयल बिस्वास, डॉ. ज्ञान चंद मर्मज्ञ, डॉ. राजेश्वरी वीएम, डॉ. जी नीरजा डॉ. एम. गीताश्री ने बतौर विषय विशेषज्ञ निर्धारित कविताओं की बारीकियों पर विस्तार से चर्चा की। 

प्रथम सत्र में हरिवंशराय बच्चन की कविता - जुगनू, जगदीश गुप्त की कविता - सच हम नहीं ,सच तुम नहीं, नागार्जुन की कविता -कालिदास सच सच बतलाना, अटल बिहारी वाजपेयी की कविता - मन का संतोष और जयशंकर प्रसाद की कविता -- अशोक की चिंता पर चर्चा व वार्ता की गई। द्वितीय सत्र कवि गोपाल दास नीरज की कविता -स्वप्न झरे फूल से गीत चुभे शूल से, रामधारी सिंह दिनकर की कविता - पुरुरवा और उर्वशी पर केंद्रित रहा। 

प्रतिभागियों ने बताया कि कार्यशाला छात्रों व अध्यापकों के लिए बहुत ज्ञानवर्धक रही। कार्यक्रम की सफल प्रस्तुति का अंत राष्ट्रगान से हुआ । 

प्रस्तुति- 
डॉ . विनय कुमार यादव 
अध्यक्ष,हिंदी विभाग 
बिशप कॉटन वीमेन्स क्रिश्चियन कॉलेज 
बैंगलोर।


शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

सृजनलोक अंतरराष्ट्रीय साहित्योत्सव संपन्न

हैदराबाद, 20 सितंबर, 2019। 
डॉ. संगीता शर्मा की पुस्तक का लोकार्पण करते हुए सुप्रसिद्ध कथाकार चित्रा मुद्गल।
विशेष अतिथि डॉ. ऋषभदेव शर्मा को सम्मानित करते हुए 
कुलपति डॉ. संदीप संचेती, मुख्य अतिथि चित्रा मुद्गल 
और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिविक रमेश।
एस आर एम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलोजी, चेन्नै तथा सृजनलोक प्रकाशन समूह के संयुक्त तत्वावधान में एस आर एम विश्वविद्यालय के चेन्नै स्थित सभागार में ‘हिंदी की विकास यात्रा : विविध आयाम’ विषयक द्विदिवसीय सृजनलोक अंतरराष्ट्रीय साहित्योत्सव संपन्न हुआ। इस समारोह में चित्रा मुद्गल, डॉ. दिविक रमेश, शरद आलोक (नॉर्वे), डॉ. सत्यनारायण मुंडा, डॉ. बी.एल.आच्छा, डॉ. पुष्पिता अवस्थी (सूरीनाम), कुसुम भट्ट, रानू मुखर्जी, कंचन शर्मा, डॉ. उषा रानी राव आदि उपस्थित रहे। समारोह का उद्घाटन एस आर एम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संदीप संचेती ने किया। 

दो-दिवसीय सम्मेलन में सृजनलोक के चित्रा मुद्गल विशेषांक सहित आठ पुस्तकों का लोकार्पण भी संपन्न हुआ। अवसर पर हैदराबाद की डॉ. संगीता शर्मा की पुस्तक ‘चित्रा मुद्गल की कहानियों में यथार्थ और कथाभाषा’ का लोकार्पण स्वयं चित्रा मुद्गल के हाथों हुआ। इस अवसर पर देश भर के 9 मौलिक रचनाकारों को ‘सृजनलोक सम्मान’ प्रदान किया गया।


मंगलवार, 3 सितंबर 2019

ज्ञानचंद मर्मज्ञ के निबंध संग्रह "खूँटी पर आकाश" का लोकार्पण समारोह संपन्न



बंगलौर, 1 सितंबर, 2019 (प्रेस विज्ञप्ति)। 

यहाँ जयनगर स्थित मानंदी संस्कृति सदन में आयोजित भव्य समारोह में प्रसिद्ध कवि एवं लेखक ज्ञानचंद मर्मज्ञ के सद्यःप्रकाशित निबंध संग्रह "खूँटी पर आकाश" का लोकार्पण सम्पन्न हुआ। अखिल भारतीय साहित्य साधक मंच, बंगलौर के सौजन्य से आयोजित, इस समारोह में हैदराबाद से आये, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के पूर्व प्रोफ़ेसर एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ ऋषभदेव शर्मा बतौर मुख्य अतिथि शामिल रहे। बतौर विशिष्ट अतिथि राजस्थान पत्रिका के प्रभारी संपादक राजेंद्र शेखर व्यास, बिशप कॉटन वुमंस कृश्टीयंस कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार यादव, और हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका के संपादक डॉ. मनोहर भारती उपस्थित थे। अध्यक्षताआकाशवाणी बंगलौर के पूर्व निदेशक एवं उर्दू साहित्यकार मिलनसार अहमद ने की। 


समारोह के मुख्य अतिथि और लोकार्पणकर्ता ऋषभदेव शर्मा ने अपने लोकार्पण भाषण में आलोच्य पुस्तक के साथ ही लेखक की रचनाधर्मिता की विशेष चर्चा की। उन्होनें कहा कि मर्मज्ञ के साहित्य के मूल त्रिकोण में एक कोण पर "लोक" है, दुसरे कोण पर "समाज और संस्कृति" एवं तीसरे कोण पर "राष्ट्र"। ऋषभ देव शर्मा ने आगे कहा कि ज्ञानचंद मर्मज्ञ के साहित्य में नारी मन की पीड़ा, समाज की लोक से बढती दूरी, मानवीय मूल्यों का क्षरण, जंगलों के शहर होने एवं शहरों के जंगल होने की व्यथा मुखरित होती है। उन्होंने "खूँटी पर आकाश" में संकलित निबंधों में व्यक्त लेखक की चिंताओं का जिक्र करते हुए कहा कि लेखक विनाश से अधिक विनाशकारी प्रवृत्तियों को लेकर चिंतित है। 

अध्यक्षीय टिप्पणी में मिलनसार अहमद ने मर्मज्ञ के साहित्य-सृजन को 'लोक-कल्याण' से प्रेरित बताया। उन्होंने निबंध की बारीकियों और समकालीन साहित्य में इसके महत्व को रेखांकित करते हुए 'खूँटी पर आकाश' में संकलित निबंधों की विशेषताओं की चर्चा की और कहा कि इनमें एक नया मेटाफर है, एक नयी फैंटसी है और स्वयं से संवाद है। 

पुस्तक की समीक्षा करते हुए केशव कर्ण ने "खूँटी पर आकाश" को गद्यकाव्य की संज्ञा दी और इसे जीवन की क्षणभंगुरता एवं जिजीविषा के बीच सामंजस्य पर केंद्रित बहु-आयामी एवं विविधवर्णी निबंधों का संकलन बताया। 

राजेंद्र शेखर व्यास ने साहित्य एवं पत्रकारिता के संबंधों को चिह्नित करते हुए इन दोनों विधाओं में 'टाइम और स्पेस' के महत्व पर बल दिया, तो डॉ विनय यादव ने मर्मज्ञ के साहित्य की पठनीयता एवं उपादेयता पर चर्चा की। डॉ मनोहर भारती ने लेखक ज्ञानचंद मर्मज्ञ को जन-मन का रचनाकार बताया।


लेखक ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने अतिथियों एवं उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए पुस्तक से जुडी अपनी भावनाओं को भी व्यक्त किया। लेखक ने कहा कि इन निबंधों में आकुल मन के प्रश्न हैं, कुछ चिंता है कुछ व्यथा है। 

आरंभ में अतिथियों ने दीप-प्रज्वलन किया। अर्जुनसिंह धर्मधारी ने सरस्वती-वंदना की। डॉ. उषा रानी राव ने अतिथियो परिचय दिया। मुख्य अतिथि का परिचय डॉ संतोष मिश्रा ने दिया। मंच संचालन मंजु वेंकट ने किया तथा धन्यवाद डॉ. अरविंद गुप्ता ने दिया। 

-प्रस्तुति केशव कर्ण, साहित्य साधक मंच, बंगलौर

बुधवार, 1 मई 2019

शोध प्रविधि पर व्याख्यान



29 अप्रैल, 2019 से 1 मई, 2019 की अवधि में डॉ. बी. आर. अंबेडकर सार्वत्रिक विश्वविद्यालय, हैदराबाद में हिंदी भाषा और साहित्य के शोधार्थियों के निमित्त आयोजित व्याख्यानमाला के अंतर्गत प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने चार सत्रों में - शोध के उपागम, हिंदी अनुसंधान में उपागमों का अनुप्रयोग, शोधप्रबंध लेखन  तथा हिंदी में अनुसंधान का विकास - पर व्याख्यान दिए। इस अवसर पर अधिष्ठाता प्रो. शकीला खानम, अकादमिक सहयोगी डॉ. अविनाश तथा प्रतिभागी शोधर्थियों के साथ सामूहिक चित्र।