रविवार, 13 जनवरी 2019

डॉ. मंजु शर्मा श्रीनाथद्वारा में सारस्वत सम्मान से अलंकृत


हैदराबाद, 5 जनवरी, 2019. 
चिरेक इंटरनेश्नल स्कूल की हिंदी विभाग अध्यक्ष डॉ. मंजु शर्मा को श्रीनाथद्वारा में आयोजित विशाल सम्मान समारोह में श्रीनाथद्वारा साहित्य मंडल एवं केन्द्रीय हिंदी संस्थान के सयुंक्त तत्वावधान में ‘ललितशंकर दीक्षित स्मृति सम्मान’ से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उन्हें दक्षिण भारत में रहकर हिंदी भाषा और साहित्य की उत्कृष्ट सेवा के लिए विनोद बब्बर और किशोर काबरा जैसे साहित्यकारों की उपस्थिति में डॉ. बीना शर्मा और श्यामजी देवपुरा ने प्रदान किया। सम्मान के अंतर्गत श्रीफल, प्रमाणपत्र, अंगवस्त्र, मेवाती पगड़ी और नकद धनराशि शामिल है | 

कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 7 विचार सत्र संपन्न हुए जिनमें हिंदी भाषा और साहित्य के विविध पक्षों और समस्याओं पर गहन मंथन हुआ। डॉ. मंजु शर्मा ने ‘दक्षिण में हिंदी की स्थिति’ परअपना आलेख प्रस्तुत किया. उन्होंने यह सुझाव दिया कि दक्षिण में हिंदी की स्वीकार्यता को भावनात्मक स्तर पर बढ़ाने के लिए यह आवश्यक है कि हिंदी भाषी प्रान्तों में बच्चों को प्राथमिक स्तर से ही एक दक्षिण भारतीय भाषा की शिक्षा दी जाए। उनके इस प्रस्ताव का उपस्थित विद्वानों ने खुले मन से स्वागत किया। 

तीन दिन के इस समारोह में देशभर से आए हिंदी सेवियों और साहित्यकारों ने भाग लिया जिनमें डॉ. विजय प्रकाश त्रिपाठी (कानपुर), अवधेश शुक्ल (सीतापुर), डॉ सविता चड्ढा(दिल्ली), हेमराज मीणा, कल्पना गवली (बड़ोदरा),अमरेंद्र पत्रकार (लोकसभा चैनल) आदि के नाम प्रमुख हैं। 

[प्रेषक : समीक्षा .manju.samiksha@gmail.com]

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2018

एलूरु में द्विदिवसीय त्रिभाषी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

हिंदी भारतीय संस्कृति की संवाहक और दिल की भाषा है - को जोंग किम 

साहित्य यथार्थ की आलोचना करता है – ऋषभदेव शर्मा 

एलूरु (आंध्र प्रदेश, 15 दिसंबर)। 


प्रो. ऋषभदेव शर्मा 
साहित्य का मूल प्रयोजन लोक मंगल की साधना है, न कि मनोरंजन। समाज के लिए जो कुछ भी अशुभ और अमंगलकारी हो सकता है साहित्य उस यथार्थ की आलोचना करता है और मंगलकारी आदर्श की स्थापना करता है। इस दृष्टि से भारतीय भाषाओं का भक्ति आंदोलन, नवजागरण आंदोलन और स्वतंत्रता आंदोलन के समय का साहित्य पूरी तरह सुधारात्मक दृष्टिकोण से प्रेरित है। इसी प्रकार समकालीन विमर्शों का साहित्य भी कर्मक्षेत्र के सौंदर्य को सामने लाते हुए सामाजिक परिवर्तन के लिए दिशा प्रदान कर सकता है।"

ये विचार सर सी.आर. रेड्डी (स्वायत्त) महाविद्यालय में आयोजित संस्कृत, तेलुगु और हिंदी के द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के हिंदी केंद्रित विचार-विमर्श के बीज भाषण के दौरान दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के पूर्व आचार्य डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने प्रकट किए। उन्होंने हर्ष व्यक्त किया कि भयंकर मूल्य विघटन और उपभोक्ता संस्कृति से ग्रसित वर्तमान परिस्थितियों में इस प्रकार एक सार्थक सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक ठेठ तेलुगु प्रदेश में इतने बड़े पैमाने पर हिंदी में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन होना अपूर्व है। 

आंध्र प्रदेश के पूर्व सांसद और
फिल्म विकास निगम के अध्यक्ष अंबिका कृष्ण
भाषा और संस्कृति विभाग, आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रायोजित तथा हिंदी, तेलुगु व संस्कृत विभागों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में समाज पर भाषा एवं साहित्य के प्रभाव को लेकर कई महत्वपूर्ण चर्चाओं को स्थान मिला। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पांडिच्चेरी आदि राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, कोरिया और जापान से आए विद्वानों, हिंदी सेवियों और छात्रों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस सम्मेलन को सफल बनाया। 

दक्षिण कोरिया से पधारे हिंदी लेखक और आलोचक डॉ. को जोंग किम ने कहा कि दक्षिण कोरिया और भारत के बीच बहुत प्राचीनकाल से अच्छे रिश्ते रहे हैं। उन्होंने हिंदी को भारतीय संस्कृति की संवाहक बताते हुए उसे ‘दिल की भाषा’ कहा। 

आंध्र प्रदेश के पूर्व सांसद और फिल्म विकास निगम के अध्यक्ष अंबिका कृष्ण ने अपने संबोधन में तेलुगु भाषा और साहित्य को संरक्षित करने की बता कही तथा उसके आंदोलनात्मक और सुधारवादी चरित्र पर प्रकाश डाला। 

प्रो.एस.वी.एस.एस.नारायण राजु 
हिंदी साहित्य संबंधी विचार सत्रों में समाज और भाषा के संबंध में आंध्र विश्वविद्यालय के प्रो. एन. सत्यनारायण, सैंट जोसेफ महिला महाविद्यालय की डॉ. पी.के.जयलक्ष्मी, नरसापुर के डॉ. कुमार नागेश्वर राव, तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ. एस.वी.एस.एस.नारायण राजु, कांचीपुरम विश्वविद्यालय के डॉ. दंडिबोट्ला नागेश्वर राव, नागार्जुन विश्वविद्यालय के डॉ. काकानि कृष्ण, मानु के डॉ. डी. शेषुबाबु, काकिनाडा के डॉ. पी. हरिराम प्रसाद तथा हैदराबाद की डॉ. पूर्णिमा शर्मा सहित अनेक विद्वानों और शोधार्थियों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। 

सर सी.आर.रेड्डी शैक्षिक संस्थाओं के अध्यक्ष श्री कोम्मारेड्डि राम बाबू, महाविद्यालय के कॉरस्पॉन्डन्ट एवं अन्य पदाधिकारियों ने समारोह में भाषा के महत्व पर अपनी राय जताई। समापन समारोह में प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने तेलुगु में भाषण देकर श्रोताओं को अभिभूत कर दिया।


सर सी.आर. रेड्डी (स्वायत्त) महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ.आर.एन.वी.एस.राजाराव और प्राध्यापक के.शैलजा ने अतिथियों का स्वागत और धन्यवाद किया। साथ ही सम्मेलन के दौरान ही शोधपत्रों का संग्रह प्रकाशित करके अपनी कार्य-दीक्षा और लगन का परिचय दिया। 








प्रस्तुति 
डॉ. आर.एन.वी.एस. राजाराव 
सहायक आचार्य 
हिंदी विभाग, सर सी.आर. रेड्डी (स्वायत्त) महाविद्यालय
एलुरु, आंध्र प्रदेश - 5347007
....
यहाँ भी....
http://hindimedia.in/hindi-is-the-language-of-indian-culture-and-heart-language-to-jong-kim/

http://www.hindikunj.com/2018/12/hindi-sammelan.html



रविवार, 14 अक्तूबर 2018

"ईश्वर करुण अभिनंदन ग्रंथ" : रचनाएँ 15 नवंबर तक आमंत्रित

चेन्नई निवासी वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार ईश्वर करुण (ईश्वर चंद्र झा) के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केंद्रित हैदराबाद की साहित्य सेवी संस्था ‘साहित्य मंथन’ द्वारा शीघ्र प्रकाशनाधीन अभिनंदन ग्रंथ के लिए उनके शुभचिंतकों, मित्रों और प्रशंसकों से रचनाएँ आमंत्रित हैं। 

अभिनंदन ग्रंथ के प्रधान संपादक प्रो. ऋषभ देव शर्मा ने बताया हैं कि देश भर के बहुत से लेखक इस ग्रंथ के लिए अपनी रचनाएँ उपलब्ध कराने वाले हैं। इसलिए त्यौहारों के मौसम की व्यस्थता को देखते हुए रचनाएँ भेजने की तिथि एक महीना आगे बढ़ा दी गई है। अब इस ग्रंथ के लिए रचनाएँ 15 नवंबर, 2018 तक भेजी जा सकती हैं। 

ये रचनाएँ rishabhadeosharma@yahoo.com, neerajagkonda@gmail.com, ishwarkarunchennai@gmail.com पते पर ईमेल द्वारा भेजी जा सकती है। 

- डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा 

शनिवार, 22 सितंबर 2018

"ईश्वर करुण अभिनंदन ग्रंथ" हेतु रचनाएँ आमंत्रित

ईश्वर करुण 
साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था 'साहित्य मंथन' के तत्वावधान में चेन्नै के सुप्रतिष्ठित साहित्यकार और हिंदीसेवी ईश्वर करुण (ईश्वर चंद्र झा) के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केंद्रित अभिनंदन ग्रंथ के प्रकाशन की योजना निश्चित हुई है। इस ग्रंथ का संपादन प्रो. ऋषभ देव शर्मा और डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा संयुक्त रूप से करेंगे। संपादकों ने ईश्वर करुण और उनके साहित्य से परिचित लेखकों से अनुरोध किया है कि लगभग 1000 शब्दों में ईश्वर करुण से संबंधित अपना संस्मरण या समीक्षात्मक आलेख अभिनंदन ग्रंथ के लिए उपलब्ध कराएँ। ग्रंथ की प्रकृति के अनुसार आलेख - ईश्वर करुण : जैसा मैंने देखा (अंतरंग संस्मरण), कवि सम्मेलनों का लाड़ला रचनाकार ईश्वर करुण, ईश्वर करुण और उनके गीत, हिंदी ग़ज़ल को ईश्वर करुण की देन, पत्रकार और संपादक ईश्वर करुण, राजभाषा अधिकारी के रूप में ईश्वर करुण की उपलब्धियाँ, ईश्वर करुण की कहानियों में समकालीन समाज, नई कविता और ईश्वर करुण की रचनाधर्मिता, ईश्वर करुण के साहित्य में मैथिल लोक, ईश्वर करुण के साहित्य में चेन्नई की धड़कन, इलेक्ट्रानिक जनसंचार : ईश्वर करुण की उपलब्धियाँ, ईश्वर करुण के काव्य में लालित्य आदि विषयों पर केंद्रित हो सकते हैं। 

यह सामग्री rishabhadeosharma@yahoo.com , neerajagkonda@gmail.com, ishwar_karun@yahoo.co.in पते पर ईमेल द्वारा भेजी जा सकती है। 

रविवार, 2 सितंबर 2018

मारीशस में रामकथा पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियाँ और सम्मान समारोह संपन्न


मुंबई।(प्रेस विज्ञप्ति)। 2 सितंबर,2018।

भारत और मारीशस का संबंध दुनिया के किन्हीं अन्य दो देशों से बिलकुल अलग किस्म का है। मारीशस अपनी पहचान और इतिहास की जड़ें खोजने के लिए भारत की ओर देखता है। हिंदी भाषा और रामकथा के मजबूत धागों से इन दोनों देशों के रिश्ते बुने हुए हैं। मारीशस की नई पीढ़ी को अपने पुरखों की ज़मीन से जोड़े रखने के लिए हमें हिंदी और राम की आज भी ज़रूरत है। 


 ये विचार पिछले दिनों विश्व हिंदी सम्मेलन के संदर्भवश मारीशस गए साहित्यिक-सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई के प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में महात्मा गांधी संस्थान, मारीशस के सुब्रह्मण्य भारती सभागार में वहाँ के हिंदी छात्रों के निमित्त आयोजित एक विशिष्ट परिसंवाद (एन इंटेरेक्टिव सेशन)का उदघाटन करते हुए महात्मा गांधी संस्थान की निदेशक डॉ. विद्योत्तमा कुंजल ने प्रकट किए। छात्रों को संबोधित करने वाले विद्वानों में मारीशस के प्रो. हेमराज सुंदर, प्रो. अलका धनपत और प्रो. प्रीति हरदयाल, रूस के डॉ. रामेश्वर सिंह और नादिया सिंह तथा भारत के प्रो. संतप्रसाद गौतम, प्रो. प्रदीप कुमार सिंह, प्रो. प्रदीप के. शर्मा और प्रो. हरिमोहन के नाम सम्मिलित है। 


दूसरे चरण में हिंदी प्रचारिणी सभा, मारीशस में “वैश्विक राम की कथायात्रा” पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह संपन्न हुआ। अध्यक्षता करते हुए सभा के वर्तमान प्रधान डॉ. यंतु देव बुधु ने मारीशस में हिंदी के इतिहास और हिंदीसेवियों के संघर्ष पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि के रूप में सभा के मंत्री धनराज शंभु और कोषाध्यक्ष टहल रामदीन ने संबोधित किया। विषयविशेषज्ञ के रूप में कुलपति प्रो. एसपी गौतम ने जिज्ञासाओं का समाधान किया। 



अवसर पर मारीशस, रूस और भारत के 50 हिंदी सेवियों को हिंदी प्रचारिणी सभा, मारीशस और साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई की ओर से “अंतरराष्ट्रीय हिंदीसेवी सम्मान” से अलंकृत किया गया तथा विभिन्न विधाओं की 12 पुस्तकें लोकार्पित की गईं। दोनों आयोजनों का संचालन प्रो. ऋषभदेव शर्मा और डॉ. सत्यनारायण ने किया। धन्यवाद प्रो. प्रदीप कुमार सिंह और डॉ. सतीश कनौजिया ने व्यक्त किया। 


प्रेषक- सतीश कनौजिया, 
प्रबंधक, साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, 
उल्हासनगर, मुंबई, भारत 


रविवार, 5 अगस्त 2018

मारीशस में “वैश्विक राम की कथायात्रा” पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 16 अगस्त को

मुंबई, 4 अगस्त (प्रेस विज्ञप्ति)|

मुंबई स्थित साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था और मारीशस स्थित हिंदी प्रचारिणी सभा के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 16 अगस्त को सभा के लोंग माउन्टेन, मारीशस स्थित सम्मेलन कक्ष में “वैश्विक राम की कथायात्रा” पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है| इस कार्यक्रम में भारत से 22 हिंदी सेवी विद्वानों का एक प्रतिनिधि मंडल साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था की ओर से सम्मिलित होगा| इस प्रतिनिधि मंडल में मुंबई से डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, डॉ. सतीश कनोजिया, श्री बिजय कुमार जैन, डॉ. गोविंद निर्मल, भोपाल से डॉ. एस. पी. गौतम, चेन्नै से डॉ. प्रदीप के शर्मा, तेलंगाना से डॉ. ऋषभ देव शर्मा, बिहार से डॉ. नीलिमा सिंह, डॉ. गीता सहाय, डॉ. कविता सहाय, उत्तर प्रदेश से श्री आलोक चतुर्वेदी, आदि उपस्थित रहेंगे| इनके साथ-साथ समारोह में मॉस्को के नादिया सिंह और डॉ. रामेश्वर सिंह,  मारीशस के विश्व हिंदी सचिवालय के महासचिव डॉ. विनोद कुमार मिश्र, हिंदी प्रचारिणी सभा के प्रधान डॉ. यन्तुदेव बुधु, महात्मा गाँधी संस्थान की निदेशक डॉ. विद्योत्तमा कुंजल के अतिरिक्त डॉ. अलका धनपत, मोहन श्रीकिसुन, राज हीरामन, प्रो. हेमराज सुंदर, धनराज शम्भु, हनुमान दुबे आदि विद्वानों को हिंदी के प्रचार-प्रसार में विशिष्ट योगदान के लिए ‘हिंदी सेवी सम्मान’ से अलंकृत किया जाएगा| ये सभी साहित्यकार 18 से 20 अगस्त के दौरान मारीशस में आयोजित 11 वें विश्व हिंदी सम्मेलन में भी शिरकत करेंगे|          

 प्रस्तुति : डॉ. सतीश कनोजिया, प्रबंधक, साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई     

शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

मिधानि में राजभाषा ‘वाक प्रतियोगिता’ संपन्न





हैदराबाद, 26.07.2018।
आज यहाँ नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम) के तत्वावधान में मिश्र धातु निगम लिमिटेड के सभागृह में विभिन्न उपक्रमों में कार्यरत कार्मिकों के लिए ‘वाक प्रतियोगिता’ आयोजित की गयी। प्रतियोगिता में 19 उन्नीस उपक्रमों से आए हुए 25 प्रतिभागियों ने ‘ एक देश-एक भाषा (संघ की राजभाषा के संदर्भ में)’ तथा ‘देश और अभिव्यक्ति की आजादी’ पर अपने विचार प्रकट किए।
प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए मिश्र धातु निगम लिमिटेड के अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन एवं परिवर्तन प्रबंधन) के आनंद कुमार ने कहा इससे हम किसी विषय को तथ्यात्मक ढंग से संक्षेप में और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करना सीख सकते हैं। नराकास के सदस्य सचिव और बीडीएल के उप महाप्रबंधक (राजभाषा) होमनिधि शर्मा ने राजभाषा के रूप में हिंदी की व्यापक स्वीकार्यता बताते हुए प्रतिभागियों का स्वागत किया। प्रयोजक संस्था मिधानि की ओर से सहायक प्रबंधक (राजभाषा) डॉ बी बालाजी ने प्रतियोगिता के नियम स्पष्ट किए। निर्णायकद्वय प्रकाश जैन और ऋषभदेव शर्मा ने व्यक्तित्व विकास में मनुष्य के भाषाई और शारीरिक व्यवहार की महत्ता पर चर्चा की।
प्रतियोगियों के भाषणों के मूल्यांकन के आधार पर हिंदी भाषी वर्ग में ईएसआई आदर्श नगर के संदीप सिंह को प्रथम,बीएचईएल आरसी पुरम के विनोद सिंह को द्वितीय तथा बीडीएल के धीरज जोशी और एनएमडीसी की पल्लवी डांगे को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। अन्य भाषी वर्ग में एनएमडीसी की लक्ष्मी कुमार को प्रथम, एचपीसीएल की के एस अनंत लक्ष्मी को द्वितीय और बीएचईएल अनुसंधान एवं विकास के रामचंदर राव को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। नराकास के इन पुरस्कारों के अलावा डेली हिंदी मिलाप की ओर से चतुर्थ स्थान प्राप्त मिधानि के अमित सिंह (हिंदी भाषी वर्ग) और एचएएल की जयश्री (अन्य भाषी वर्ग) के लिए विशेष पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई।
आरंभ में सुरेखा, वर्षा, रमा मल्लिका, रतनसिंह और प्रतीक शर्मा ने मिधानि गीत प्रस्तुत किया। अंत में सभी प्रतिभागियों को मिधानी की ओर से स्मृति चिह्न के रूप में उपहार भेंट किया गया।
प्रतियोगिता में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से श्रद्धा नीलकंठ; बीडीएल से अंबिका मिशा; ईएसआई चिकित्सा महाविद्यालय से मिर्ज़ा असद बेग; बीएचईएल, आरसी पुरम से पी बाल सुब्रह्मण्यम; ईएसआई, अतिविशिष्ट अस्पताल से रत्नदीप सरकार; एचपीसीएल से नेहा कटारिया; आईटीआई से बी नंद किशोर; एमएमटीसी से राजेंद्र प्रसाद; मिधानि से डॉ प्रवीण ज्योति; ईसीआईएल से शर्मीला मुर्मू; एअर इंडिया से पी आर रवींद्र; आईओसीएल से ज़ाहिद अली एवं टीके शेखर; एचएएल से मंजय कुमार; तथा यूनाइटेड इंडिया इन्शुरेंस कंपनी से वी श्रवण कुमार ने उत्साह पूर्वक अपनी भागीदारी दर्ज कराई और राजभाषा हिंदी के प्रति निष्ठा व्यक्त की। इस अवसर पर हिंदी अधिकारीगण - बीडीएल के अवर प्रबंधक डॉ शिव कोटि, बीडीईएल आरसी पुरम के नवदीप कुमार, एनएमडीसी की जी सुजाता, एमएमटीसी के अजय कुमार मिश्र आईओसीएल के जितेंद्र साह तथा यूनाइटेड इंडिया इन्शुरेंस कंपनी की जी लक्ष्मी ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रेषक:
डॉ बी बालाजी, सहायक प्रबंधक (राजभाषा), मिधानि।