रविवार, 14 अक्तूबर 2018

"ईश्वर करुण अभिनंदन ग्रंथ" : रचनाएँ 15 नवंबर तक आमंत्रित

चेन्नई निवासी वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार ईश्वर करुण (ईश्वर चंद्र झा) के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केंद्रित हैदराबाद की साहित्य सेवी संस्था ‘साहित्य मंथन’ द्वारा शीघ्र प्रकाशनाधीन अभिनंदन ग्रंथ के लिए उनके शुभचिंतकों, मित्रों और प्रशंसकों से रचनाएँ आमंत्रित हैं। 

अभिनंदन ग्रंथ के प्रधान संपादक प्रो. ऋषभ देव शर्मा ने बताया हैं कि देश भर के बहुत से लेखक इस ग्रंथ के लिए अपनी रचनाएँ उपलब्ध कराने वाले हैं। इसलिए त्यौहारों के मौसम की व्यस्थता को देखते हुए रचनाएँ भेजने की तिथि एक महीना आगे बढ़ा दी गई है। अब इस ग्रंथ के लिए रचनाएँ 15 नवंबर, 2018 तक भेजी जा सकती हैं। 

ये रचनाएँ rishabhadeosharma@yahoo.com, neerajagkonda@gmail.com, ishwarkarunchennai@gmail.com पते पर ईमेल द्वारा भेजी जा सकती है। 

- डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा 

शनिवार, 22 सितंबर 2018

"ईश्वर करुण अभिनंदन ग्रंथ" हेतु रचनाएँ आमंत्रित

ईश्वर करुण 
साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था 'साहित्य मंथन' के तत्वावधान में चेन्नै के सुप्रतिष्ठित साहित्यकार और हिंदीसेवी ईश्वर करुण (ईश्वर चंद्र झा) के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केंद्रित अभिनंदन ग्रंथ के प्रकाशन की योजना निश्चित हुई है। इस ग्रंथ का संपादन प्रो. ऋषभ देव शर्मा और डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा संयुक्त रूप से करेंगे। संपादकों ने ईश्वर करुण और उनके साहित्य से परिचित लेखकों से अनुरोध किया है कि लगभग 1000 शब्दों में ईश्वर करुण से संबंधित अपना संस्मरण या समीक्षात्मक आलेख अभिनंदन ग्रंथ के लिए उपलब्ध कराएँ। ग्रंथ की प्रकृति के अनुसार आलेख - ईश्वर करुण : जैसा मैंने देखा (अंतरंग संस्मरण), कवि सम्मेलनों का लाड़ला रचनाकार ईश्वर करुण, ईश्वर करुण और उनके गीत, हिंदी ग़ज़ल को ईश्वर करुण की देन, पत्रकार और संपादक ईश्वर करुण, राजभाषा अधिकारी के रूप में ईश्वर करुण की उपलब्धियाँ, ईश्वर करुण की कहानियों में समकालीन समाज, नई कविता और ईश्वर करुण की रचनाधर्मिता, ईश्वर करुण के साहित्य में मैथिल लोक, ईश्वर करुण के साहित्य में चेन्नई की धड़कन, इलेक्ट्रानिक जनसंचार : ईश्वर करुण की उपलब्धियाँ, ईश्वर करुण के काव्य में लालित्य आदि विषयों पर केंद्रित हो सकते हैं। 

यह सामग्री rishabhadeosharma@yahoo.com , neerajagkonda@gmail.com, ishwar_karun@yahoo.co.in पते पर ईमेल द्वारा भेजी जा सकती है। 

रविवार, 2 सितंबर 2018

मारीशस में रामकथा पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियाँ और सम्मान समारोह संपन्न


मुंबई।(प्रेस विज्ञप्ति)। 2 सितंबर,2018।

भारत और मारीशस का संबंध दुनिया के किन्हीं अन्य दो देशों से बिलकुल अलग किस्म का है। मारीशस अपनी पहचान और इतिहास की जड़ें खोजने के लिए भारत की ओर देखता है। हिंदी भाषा और रामकथा के मजबूत धागों से इन दोनों देशों के रिश्ते बुने हुए हैं। मारीशस की नई पीढ़ी को अपने पुरखों की ज़मीन से जोड़े रखने के लिए हमें हिंदी और राम की आज भी ज़रूरत है। 


 ये विचार पिछले दिनों विश्व हिंदी सम्मेलन के संदर्भवश मारीशस गए साहित्यिक-सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई के प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में महात्मा गांधी संस्थान, मारीशस के सुब्रह्मण्य भारती सभागार में वहाँ के हिंदी छात्रों के निमित्त आयोजित एक विशिष्ट परिसंवाद (एन इंटेरेक्टिव सेशन)का उदघाटन करते हुए महात्मा गांधी संस्थान की निदेशक डॉ. विद्योत्तमा कुंजल ने प्रकट किए। छात्रों को संबोधित करने वाले विद्वानों में मारीशस के प्रो. हेमराज सुंदर, प्रो. अलका धनपत और प्रो. प्रीति हरदयाल, रूस के डॉ. रामेश्वर सिंह और नादिया सिंह तथा भारत के प्रो. संतप्रसाद गौतम, प्रो. प्रदीप कुमार सिंह, प्रो. प्रदीप के. शर्मा और प्रो. हरिमोहन के नाम सम्मिलित है। 


दूसरे चरण में हिंदी प्रचारिणी सभा, मारीशस में “वैश्विक राम की कथायात्रा” पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह संपन्न हुआ। अध्यक्षता करते हुए सभा के वर्तमान प्रधान डॉ. यंतु देव बुधु ने मारीशस में हिंदी के इतिहास और हिंदीसेवियों के संघर्ष पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि के रूप में सभा के मंत्री धनराज शंभु और कोषाध्यक्ष टहल रामदीन ने संबोधित किया। विषयविशेषज्ञ के रूप में कुलपति प्रो. एसपी गौतम ने जिज्ञासाओं का समाधान किया। 



अवसर पर मारीशस, रूस और भारत के 50 हिंदी सेवियों को हिंदी प्रचारिणी सभा, मारीशस और साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई की ओर से “अंतरराष्ट्रीय हिंदीसेवी सम्मान” से अलंकृत किया गया तथा विभिन्न विधाओं की 12 पुस्तकें लोकार्पित की गईं। दोनों आयोजनों का संचालन प्रो. ऋषभदेव शर्मा और डॉ. सत्यनारायण ने किया। धन्यवाद प्रो. प्रदीप कुमार सिंह और डॉ. सतीश कनौजिया ने व्यक्त किया। 


प्रेषक- सतीश कनौजिया, 
प्रबंधक, साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, 
उल्हासनगर, मुंबई, भारत 


रविवार, 5 अगस्त 2018

मारीशस में “वैश्विक राम की कथायात्रा” पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 16 अगस्त को

मुंबई, 4 अगस्त (प्रेस विज्ञप्ति)|

मुंबई स्थित साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था और मारीशस स्थित हिंदी प्रचारिणी सभा के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 16 अगस्त को सभा के लोंग माउन्टेन, मारीशस स्थित सम्मेलन कक्ष में “वैश्विक राम की कथायात्रा” पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है| इस कार्यक्रम में भारत से 22 हिंदी सेवी विद्वानों का एक प्रतिनिधि मंडल साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था की ओर से सम्मिलित होगा| इस प्रतिनिधि मंडल में मुंबई से डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, डॉ. सतीश कनोजिया, श्री बिजय कुमार जैन, डॉ. गोविंद निर्मल, भोपाल से डॉ. एस. पी. गौतम, चेन्नै से डॉ. प्रदीप के शर्मा, तेलंगाना से डॉ. ऋषभ देव शर्मा, बिहार से डॉ. नीलिमा सिंह, डॉ. गीता सहाय, डॉ. कविता सहाय, उत्तर प्रदेश से श्री आलोक चतुर्वेदी, आदि उपस्थित रहेंगे| इनके साथ-साथ समारोह में मॉस्को के नादिया सिंह और डॉ. रामेश्वर सिंह,  मारीशस के विश्व हिंदी सचिवालय के महासचिव डॉ. विनोद कुमार मिश्र, हिंदी प्रचारिणी सभा के प्रधान डॉ. यन्तुदेव बुधु, महात्मा गाँधी संस्थान की निदेशक डॉ. विद्योत्तमा कुंजल के अतिरिक्त डॉ. अलका धनपत, मोहन श्रीकिसुन, राज हीरामन, प्रो. हेमराज सुंदर, धनराज शम्भु, हनुमान दुबे आदि विद्वानों को हिंदी के प्रचार-प्रसार में विशिष्ट योगदान के लिए ‘हिंदी सेवी सम्मान’ से अलंकृत किया जाएगा| ये सभी साहित्यकार 18 से 20 अगस्त के दौरान मारीशस में आयोजित 11 वें विश्व हिंदी सम्मेलन में भी शिरकत करेंगे|          

 प्रस्तुति : डॉ. सतीश कनोजिया, प्रबंधक, साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई     

शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

मिधानि में राजभाषा ‘वाक प्रतियोगिता’ संपन्न





हैदराबाद, 26.07.2018।
आज यहाँ नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम) के तत्वावधान में मिश्र धातु निगम लिमिटेड के सभागृह में विभिन्न उपक्रमों में कार्यरत कार्मिकों के लिए ‘वाक प्रतियोगिता’ आयोजित की गयी। प्रतियोगिता में 19 उन्नीस उपक्रमों से आए हुए 25 प्रतिभागियों ने ‘ एक देश-एक भाषा (संघ की राजभाषा के संदर्भ में)’ तथा ‘देश और अभिव्यक्ति की आजादी’ पर अपने विचार प्रकट किए।
प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए मिश्र धातु निगम लिमिटेड के अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन एवं परिवर्तन प्रबंधन) के आनंद कुमार ने कहा इससे हम किसी विषय को तथ्यात्मक ढंग से संक्षेप में और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करना सीख सकते हैं। नराकास के सदस्य सचिव और बीडीएल के उप महाप्रबंधक (राजभाषा) होमनिधि शर्मा ने राजभाषा के रूप में हिंदी की व्यापक स्वीकार्यता बताते हुए प्रतिभागियों का स्वागत किया। प्रयोजक संस्था मिधानि की ओर से सहायक प्रबंधक (राजभाषा) डॉ बी बालाजी ने प्रतियोगिता के नियम स्पष्ट किए। निर्णायकद्वय प्रकाश जैन और ऋषभदेव शर्मा ने व्यक्तित्व विकास में मनुष्य के भाषाई और शारीरिक व्यवहार की महत्ता पर चर्चा की।
प्रतियोगियों के भाषणों के मूल्यांकन के आधार पर हिंदी भाषी वर्ग में ईएसआई आदर्श नगर के संदीप सिंह को प्रथम,बीएचईएल आरसी पुरम के विनोद सिंह को द्वितीय तथा बीडीएल के धीरज जोशी और एनएमडीसी की पल्लवी डांगे को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। अन्य भाषी वर्ग में एनएमडीसी की लक्ष्मी कुमार को प्रथम, एचपीसीएल की के एस अनंत लक्ष्मी को द्वितीय और बीएचईएल अनुसंधान एवं विकास के रामचंदर राव को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। नराकास के इन पुरस्कारों के अलावा डेली हिंदी मिलाप की ओर से चतुर्थ स्थान प्राप्त मिधानि के अमित सिंह (हिंदी भाषी वर्ग) और एचएएल की जयश्री (अन्य भाषी वर्ग) के लिए विशेष पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई।
आरंभ में सुरेखा, वर्षा, रमा मल्लिका, रतनसिंह और प्रतीक शर्मा ने मिधानि गीत प्रस्तुत किया। अंत में सभी प्रतिभागियों को मिधानी की ओर से स्मृति चिह्न के रूप में उपहार भेंट किया गया।
प्रतियोगिता में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से श्रद्धा नीलकंठ; बीडीएल से अंबिका मिशा; ईएसआई चिकित्सा महाविद्यालय से मिर्ज़ा असद बेग; बीएचईएल, आरसी पुरम से पी बाल सुब्रह्मण्यम; ईएसआई, अतिविशिष्ट अस्पताल से रत्नदीप सरकार; एचपीसीएल से नेहा कटारिया; आईटीआई से बी नंद किशोर; एमएमटीसी से राजेंद्र प्रसाद; मिधानि से डॉ प्रवीण ज्योति; ईसीआईएल से शर्मीला मुर्मू; एअर इंडिया से पी आर रवींद्र; आईओसीएल से ज़ाहिद अली एवं टीके शेखर; एचएएल से मंजय कुमार; तथा यूनाइटेड इंडिया इन्शुरेंस कंपनी से वी श्रवण कुमार ने उत्साह पूर्वक अपनी भागीदारी दर्ज कराई और राजभाषा हिंदी के प्रति निष्ठा व्यक्त की। इस अवसर पर हिंदी अधिकारीगण - बीडीएल के अवर प्रबंधक डॉ शिव कोटि, बीडीईएल आरसी पुरम के नवदीप कुमार, एनएमडीसी की जी सुजाता, एमएमटीसी के अजय कुमार मिश्र आईओसीएल के जितेंद्र साह तथा यूनाइटेड इंडिया इन्शुरेंस कंपनी की जी लक्ष्मी ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रेषक:
डॉ बी बालाजी, सहायक प्रबंधक (राजभाषा), मिधानि।

गुरुवार, 5 जुलाई 2018

'मानव संसाधन विकास के नए आयाम’ पुस्तक लोकार्पित


प्रो. ऋषभ देव शर्मा  द्वारा डॉ. मोहसिन उद्दीन की पुस्तक
 “मानव संसाधन विकास के नए आयाम : भारतीय परिप्रेक्ष्य” का लोकार्पण 
हैदराबाद, 5 जुलाई, 2018। 

काचिगुड़ा स्थित बद्रुका कॉलेज के सभाकक्ष में बुधवार को हिंदी अध्यापकों और लेखकों की संस्था ‘हिंदी हैं हम विश्व मैत्री मंच’ की साहित्यिक सभा आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता प्रो. शकुंतला रेड्डी ने की तथा संयोजन डॉ. रियाजुल अंसारी ने किया। मुख्य अतिथि प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने एनआईआरडी में वरिष्ठ प्रोजेक्ट फ़ैकल्टी के रूप में कार्यरत डॉ. मोहसिन उद्दीन की सद्य:प्रकाशित पुस्तक “मानव संसाधन विकास के नए आयाम : भारतीय परिप्रेक्ष्य” को लोकार्पित किया। लोकार्पण वक्तव्य में प्रो. शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक प्रबंधन जैसे आधुनिक विषय पर स्तरीय पाठ्यपुस्तकों के अभाव की पूर्ति का एक सफल प्रयास है। उन्होंने प्रत्येक अध्याय में सम्मिलित वास्तविक समस्याओं के अध्ययन और उससे जुड़े अभ्यासों के समावेश की विशेष प्रशंसा की। 
‘हिंदी हैं हम विश्व मैत्री मंच’ द्वारा प्रो. ऋषभदेव शर्मा का सम्मान 

इस अवसर पर डॉ. ऋषभदेव शर्मा के 62वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में उनकी चर्चित स्त्रीवादी काव्यकृति ‘देहरी’ के राजस्थानी अनुवाद की पांडुलिपि अनुवादिका डॉ.मंजु शर्मा द्वारा उन्हें भेंट की गई। मंच की ओर से अतिथियों का स्वागत-सत्कार डॉ. विद्याधर, डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा, डॉ. संध्या दास और शीला इंगले ने किया। समारोह को जीवंत बनाने में चिरक इंटरनेशनल स्कूल की छात्राओं के विचारोत्तेजक प्रश्नों की विशेष भूमिका रही। डॉ. सुषमा, डॉ. बी एल मीणा, डॉ. प्रभा कुमारी, डॉ. सुपर्णा बंद्योपाध्याय, डॉ. सीमा मिश्रा, अशोक तिवारी, फ़ौजिया बेगम, वुल्ली कृष्णा और जयदीप मुखर्जी आदि ने हिंदी भाषा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर इस चर्चा में सक्रिय भागीदारी निभाई । 
'देहरी' का राजस्थानी भाषा में अनुवाद कवि को समर्पित 

प्रस्तुति : डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा, 
सह-संपादक : ‘स्रवंति’, 
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा,
 हैदराबाद-500004.

गुरुवार, 24 मई 2018

रूस के विश्वविद्यालयों और काव्यसंध्या में गूँजी राम-संस्कृति और हिंदी



मुंबई, 24 मई, 2018 (प्रदीप कुमार सिंह)। 

साहित्यिक-सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई द्वारा 10 से 17 मई, 2018 तक आयोजित 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सप्ताह भर की साहित्यिक यात्रा के दौरान रूस के अलग-अलग महानगरों में दो अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियाँ और एक बहुभाषी काव्यसंध्या सफलतापूर्वक संपन्न हुईं। इन संगोष्ठियों का आयोजन संस्थान ने रूसी-भारतीय मैत्री संघ -दिशा (मास्को, रूस) तथा अयोध्या शोध संस्थान- (अयोध्या, भारत) के साथ मिलकर कजान फेडरल यूनिवर्सिटी (कजान, रूस) और मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी (मास्को, रूस) के संयुक्त तत्वावधान में किया जिनमें भारतीय और रूसी विशेषज्ञों ने “राम संस्कृति की विश्वयात्रा : साहित्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी” विषय पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। काव्यसंध्या डॉ. लीना सरीन के सौजन्य से संपन्न हुई जिसमें दोनों देशों के प्रतिभागी कवियों ने रूसी और हिंदी के साथ संस्कृत, कोंकणी, पंजाबी तथा मराठी में काव्यपाठ किया। 

कजान फेडरल यूनिवर्सिटी में आयोजित प्रथम अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन कुलपति प्रो. लतीपोव ने किया। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति को जानने के लिए राम साहित्य को जानना अपरिहार्य है। समकुलपति प्रो. स्वेतलाना ने भारतीय दर्शन और रूसी संस्कृति के आपसी संबंध पर प्रकाश डाला तो साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था के संस्थापक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने वर्तमान विश्व के लिए राम-संस्कृति की प्रासंगिकता को रेखांकित किया तथा रामलीलाओं तथा ललित कलाओं के माध्यम से विश्व भर में भारतीय जीवन दृष्टि के प्रसार की व्याख्या करते हुए रूस के महान रामलीला-कलाकार स्वर्गीय गेन्नाडि मिखाइलोविच पेचनिकोव (1926-2018) को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। भारतीय दूतावास से संबद्ध डॉ. जयसुंदरम ने भारत और रूस के आपसी संबंधों की दृढ़ता के लिए रामकथा की आवश्यकता बताई। प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने अपने संचालकीय वक्तव्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से राम-संस्कृति के वैश्विक प्रसार की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए अमेरिका में बनी एनीमेशन फिल्म 'सीता सिंग्स द ब्ल्यूज़' की चर्चा की। इस अवसर पर डॉ. प्रदीप कुमार सिंह के प्रधान संपादकत्व में प्रकाशित ग्रंथ "राम-संस्कृति की विश्वयात्रा : साहित्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी " को कुलपति प्रो. लतीपोव ने लोकार्पित किया। साथ ही "रामलीला की विश्वयात्रा" का भी लोकार्पण संपन्न हुआ।

मास्को विश्वविद्यालय के भारत-अध्ययन विभाग में संपन्न द्वितीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी/परिसंवाद में विशेष रूप से रूसी भारतविदों प्रो.बरीस अलेक्सेइविच ज़ख़रिन, प्रो. लुदमिला खोखलोवा, प्रो.गुजेल म्रात्खूजीना और प्रो. आन्ना बाचकोश्का ने इतिहास, साहित्य, अनुवाद और ललित कलाओं के माध्यम से रूस में राम-संस्कृति के प्रति अध्येताओं की अभिरुचि पर सप्रमाण विचार-विमर्श किया। विभिन्न कार्यकमों का संचालन प्रो. ऋषभ देव शर्मा, प्रो. दिमित्री बोबकोव और स्थानीय प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से हिंदी और रूसी भाषा में किया। .डॉ. सत्यनारायण ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर लगभग 50 भारतीय और विदेशी विद्वानों का सारस्वत सम्मान भी किया गया। सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने में हिंदी भाषा और साहित्य के रूसी छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी की केंद्रीय भूमिका रही। सभी प्रतिभागियों ने रूस के भारतविदों/ हिंदी प्राध्यापकों/ हिंदी छात्रों से भारतीय प्रतिनिधि मंडल के भाषा और संस्कृति विषयक विचार-विनिमय को इन संगोष्ठियों की विशिष्ट उपलब्धि माना। 

सप्ताह भर के इस सारस्वत अनुष्ठान की पूर्णाहुति के रूप में सेंट पीटर्सबर्ग में पाँच रूसी विद्वानों के सान्निध्य में बहुभाषी काव्यसंध्या का आयोजन किया गया। रूसी रचनाकारों और अनुवादकों ने अपनी भाषा-चेतना और सहज सहृदयता ने प्रतिनिधिमंडल का मन मोह लिया। राम संस्कृति को समर्पित इस काव्य संध्या की अध्यक्षता डॉ. वंदना प्रदीप ने की तथा संचालन डॉ. सत्यनारायण ने किया। डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने संस्था के उद्देश्य और योजनाओं के बारे में बताया और कहा कि हिंदी तथा राम भारतीयता के दो पर्याय हैं। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रशियन एकेडमी ऑफ साइंस की भारतविद प्रोफेसर डॉ.एलेना सोबोलेवा ने भारत रूस संबंधों की दृढ़ता की चर्चा करते हुए दोनों देशोँ की वैश्विक चिंताओं को समान बताया और राम संस्कृति की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. मारिया यकोलेवा ने भरतनाट्यम और राम संस्कृति के संदेश की चर्चा रूसी भाषा में की जिसका हिंदी अनुवाद डॉ. विश्वजीत विश्वास ने किया। रूस में हिंदी अध्यापन के लिए समर्पित विदुषियों इरीना सोकोलोवा तथा यूलिया बेशुक ने धाराप्रवाह हिंदी बोलते हुए रूस में हिंदी शिक्षण की स्थिति के बारे में बताया तथा मौलिक हिंदी कविताओं के अलावा रूसी लोकगीत तथा उनका अनुवाद प्रस्तुत कर भारतीय कवियों का मन मोह लिया। संस्था की ओर से पुष्पगुच्छ समर्पित कर सभी अतिथियों का स्वागत-सत्कार किया गया तथा डॉ. अमर ज्योति, डॉ. ऋषभ देव शर्मा, डॉ. पुष्पा गुप्ता, डॉ. प्रदीप कुमार सिंह , रघुनाथ प्रसाद गुप्ता, डॉ. वंदना प्रदीप, डॉ. जगदीश प्रसाद शर्मा, शरद शिरोडकर, डॉ. मधुलता व्यास, डॉ. मीना ढोले, डॉ. सविता सिंह,सरिता नागपाल, कर्मा देवी, वीना धमीजा , किंजल पटेल, और विरंची आदि ने अपने काव्यपाठ द्वारा इस काव्यसंध्या को सफल बनाया। इन समस्त सारस्वत आयोजनों के साथ-साथ रूस के तीन महानगरों कजान, मास्को और पीटर्सबर्ग का भ्रमण तो खैर अपनी जगह अविस्मरणीय है ही। 

(प्रस्तुति : प्रदीप कुमार सिंह, मुंबई)