रविवार, 9 अगस्त 2020

'तुलसी साहित्य की वर्तमान अर्थवत्ता' पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार संपन्न


'तुलसी साहित्य की वर्तमान अर्थवत्ता' पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार संपन्न

 

कोलकाता, 6 अगस्त ( मीडिया विज्ञप्ति) पश्चिम बंगाल की प्रमुख साहित्यिक संस्था  'बंगीय हिंदी परिषद, कोलकाता' द्वारा आयोजित तुलसी जयंती समारोहों  के अंतर्गत 'तुलसी साहित्य की वर्तमान अर्थवत्ता' विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता विख्यात कवि-समीक्षक तथा उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, हैदराबाद के प्राक्तन प्रोफेसर और अध्यक्ष डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने की। अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने अनेक उदाहरण देकर वर्तमान में तुलसी  साहित्य की राजनैतिक, सामाजिक और विमर्शपरक अर्थवत्ता का प्रतिपादन किया। उन्होंने कहा कि तुलसीदास ने राजकाज और सामाजिक कार्यों में स्त्री की सम्मति को आवश्यक बताया है। डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि तुलसी को शंबूक वध और सीता परित्याग दोनों स्वीकार नहीं हैं, क्योंकि  वे दलित और स्त्री के प्रति अन्याय का समर्थन नहीं कर सकते।

 

संगोष्ठी के प्रधान वक्ता, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दर्शन विभाग के पूर्व प्रोफेसर और देश के सुप्रसिद्ध विद्वान डॉ. देवव्रत चौबे ने कहा कि तुलसी का आज भी कोई विकल्प नहीं है। रामचरितमानस लोकमंगल की व्यापक अवधारणा का दुनिया के पास  इकलौता महाकाव्य है।

 

मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्त्री-चिंतक एवं डीएवीएसएस, ह्यूस्टन, अमेरिका की निदेशक डॉ. कविता वाचक्नवी ने कहा कि तुलसी साहित्य की मुख्य चिंता व्यक्ति-निर्माण, परिवार-निर्माण और समाज-निर्माण की है। राम को समाज ने उनके गुणों के कारण नायक बनाया। राम और कृष्ण दो ऐसे चरित्र हैं जो पूरे विश्व को अन्याय से लड़ने की प्रेरणा देते रहेंगे।

 

तुलसी साहित्य के चिंतक और  वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रेमनाथ चौबे ने अपने बीज वक्तव्य में तुलसी साहित्य के उन पक्षों पर सविस्तार प्रकाश डाला जो जनसामान्य के लिए आज सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं।उन्होंने माया, मनुष्य और हरि-तत्व के आपसी संबंधों पर भी प्रकाश डाला।

 

समारोह की शुरूआत परिषद के मंत्री डॉ. राजेंद्रनाथ त्रिपाठी के स्वागत वक्तव्य से हुई। वक्ता आचार्य कौशल्यायन शास्त्री ने कहा कि तुलसी के रामराज्य में स्त्री और दलितों के अधिकारों पर चर्चा की। विश्व भारती के हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. जगदीश भगत ने कहा कि  कथा संरचना को औदात्य रूप देने के लिए तुलसी ने अतिरिक्त विवेक सजगता अपनाई है। कार्यक्रम का सफल संचालन परिषद के साहित्य मंत्री डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन परिषद की कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. राजश्री शुक्ला ने किया। लगभग तीन सौ श्रोताओं ने  इस आयोजन से लाइव जुड़कर इसे सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। 

 

प्रस्तुतिडॉ. सत्य प्रकाश तिवारीसाहित्य मंत्री, बंगीय हिंदी परिषद, कोलकाता।