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गुरुवार, 5 जुलाई 2018

'मानव संसाधन विकास के नए आयाम’ पुस्तक लोकार्पित


प्रो. ऋषभ देव शर्मा  द्वारा डॉ. मोहसिन उद्दीन की पुस्तक
 “मानव संसाधन विकास के नए आयाम : भारतीय परिप्रेक्ष्य” का लोकार्पण 
हैदराबाद, 5 जुलाई, 2018। 

काचिगुड़ा स्थित बद्रुका कॉलेज के सभाकक्ष में बुधवार को हिंदी अध्यापकों और लेखकों की संस्था ‘हिंदी हैं हम विश्व मैत्री मंच’ की साहित्यिक सभा आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता प्रो. शकुंतला रेड्डी ने की तथा संयोजन डॉ. रियाजुल अंसारी ने किया। मुख्य अतिथि प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने एनआईआरडी में वरिष्ठ प्रोजेक्ट फ़ैकल्टी के रूप में कार्यरत डॉ. मोहसिन उद्दीन की सद्य:प्रकाशित पुस्तक “मानव संसाधन विकास के नए आयाम : भारतीय परिप्रेक्ष्य” को लोकार्पित किया। लोकार्पण वक्तव्य में प्रो. शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक प्रबंधन जैसे आधुनिक विषय पर स्तरीय पाठ्यपुस्तकों के अभाव की पूर्ति का एक सफल प्रयास है। उन्होंने प्रत्येक अध्याय में सम्मिलित वास्तविक समस्याओं के अध्ययन और उससे जुड़े अभ्यासों के समावेश की विशेष प्रशंसा की। 
‘हिंदी हैं हम विश्व मैत्री मंच’ द्वारा प्रो. ऋषभदेव शर्मा का सम्मान 

इस अवसर पर डॉ. ऋषभदेव शर्मा के 62वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में उनकी चर्चित स्त्रीवादी काव्यकृति ‘देहरी’ के राजस्थानी अनुवाद की पांडुलिपि अनुवादिका डॉ.मंजु शर्मा द्वारा उन्हें भेंट की गई। मंच की ओर से अतिथियों का स्वागत-सत्कार डॉ. विद्याधर, डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा, डॉ. संध्या दास और शीला इंगले ने किया। समारोह को जीवंत बनाने में चिरक इंटरनेशनल स्कूल की छात्राओं के विचारोत्तेजक प्रश्नों की विशेष भूमिका रही। डॉ. सुषमा, डॉ. बी एल मीणा, डॉ. प्रभा कुमारी, डॉ. सुपर्णा बंद्योपाध्याय, डॉ. सीमा मिश्रा, अशोक तिवारी, फ़ौजिया बेगम, वुल्ली कृष्णा और जयदीप मुखर्जी आदि ने हिंदी भाषा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर इस चर्चा में सक्रिय भागीदारी निभाई । 
'देहरी' का राजस्थानी भाषा में अनुवाद कवि को समर्पित 

प्रस्तुति : डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा, 
सह-संपादक : ‘स्रवंति’, 
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा,
 हैदराबाद-500004.

बुधवार, 28 अगस्त 2013

"स्त्री-भाषा" पर पुनश्चर्या व्याख्यान : पावर पॉइंट प्रस्तुति

21 अगस्त 2013 को मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू  यूनिवर्सिटी, हैदराबाद में आयोजित
 'विविध विमर्श' विषयक 21 दिवसीय पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के दौरान
 ''स्त्री विमर्श : स्त्री भाषा'' पर व्याख्यान देते हुए ऋषभ देव शर्मा
[चित्र सौजन्य - डॉ. राजेंद्र कुमार / प्रतिभागी]

शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

पुरुषभाषा : स्त्रीभाषा :: धमकाना : रिरियाना

हैदराबाद, 23 नवंबर 2012 

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के अकादमिक स्टाफ कॉलेज में समकालीन हिंदी साहित्य के अध्ययन-अध्यापन और शोध की संभावनाओं पर केंद्रित 21 दिवसीय पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के अंतर्गत ‘स्त्री विमर्श : स्त्रीभाषा’ पर उच्च शिक्षा और शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रो.ऋषभ देव शर्मा का विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया. 

आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर राज्यों से इस पुनश्चर्या कार्यक्रम में आए प्रतिभागी हिंदी प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए प्रो.शर्मा ने कहा कि साहित्य की भाषा समाज की वास्तविक भाषा पर आधारित होती है जिसमें वक्ता-श्रोता संबंध, परिस्थिति, प्रसंग और प्रयोजन के अनुसार ही नहीं सामाजिक स्तर और प्रतिष्ठा के भेद के आधार पर भी भाषा वैविध्य पाए जाते हैं. उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से यह प्रतिपादित किया कि समाज में गौण स्थान होने के कारण परंपरागत स्त्री भाषा में जहाँ विनम्रता और अनुरोध की मूल प्रवृत्ति पाई जाती है वहीं आत्मनिर्भर और स्वतंत्र स्त्री की भाषा में आदेश और निषेध की नई प्रवृत्ति को परिलक्षित किया जा सकता है.  

परिवार और समाज में वर्चस्व के साथ भाषिक व्यवहार का अपरिहार्य संबंध बताते हुए प्रो. शर्मा ने पुरुषसत्तात्मक समाज में पुरुषभाषा को ‘धमकाने’ की भाषा तथा स्त्रीभाषा को ‘रिरियाने’ की भाषा मानते हुए स्त्रियों के भाषा व्यवहार के वर्जित क्षेत्रों की ओर भी इशारा किया और कहा कि हिंदी भाषा का स्त्री केन्द्र बनना अभी बाकी है.

आरंभ में प्रतिभागियों की ओर से विशेष वक्ता का स्वागत किया गया. इस अवसर पर पुनश्चर्या कार्यक्रम के संयोजक प्रो.वी.कृष्णा और अकादमिक स्टाफ कॉलेज के निदेशक प्रो.आर.एस.सर्राजू भी उपस्थित थे.