मंगलवार, 17 अप्रैल 2018

लोकतंत्र और समकाल के सापेक्ष साहित्य और मीडिया पर समग्र मंथन

डॉ. ऋषभदेव शर्मा सहित दस लेखक-पत्रकार सम्मानित 

आजमगढ़ में ‘मीडिया समग्र मंथन-2018’ के अवसर पर सम्मानित लेखक और पत्रकार
 (बाएँ से) डॉ. ऋषभदेव शर्मा, डॉ. मधुर नज्मी, गिरीश पंकज, डॉ. देवराज,
डॉ. योगेंद्र्नाथ शर्मा अरुण, जयशंकर गुप्त, यशवंत, सतीश सिंह रघुवंशी एवं अन्य.

आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश, (डॉ. चंदन कुमारी)। 

पुराण-प्रसिद्ध तमसा नदी के तट पर बसे नगर आजमगढ़ में हर दूसरे वर्ष मीडियाकर्मियों और साहित्यकारों का जलसा होता जो आजमगढ़ की पहचान और परंपरा में बदलाव का प्रतीक बनता जा रहा “मीडिया समग्र मंथन – 2018” के रूप में इस वर्ष यह जलसा 7 और 8 अप्रैल को जनपद मुख्यालय के नेहरु हाल में संपन्न हुआ। 

प्रथम दिवस कार्यक्रम का उद्घाटन समारोह अध्यक्ष जैन राम साहित्य के विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्रनाथ शर्मा अरुण और मुख्य अतिथि पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने अन्य अतिथियों महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से आए प्रो. देवराज, दैनिक देशबंधु, दिल्ली के कार्यकारी संपादक जयशंकर गुप्त, गोपाल जी राय, विजयनारायण, गोपाल नारसन आदि ने सरस्वती के दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद ‘लोकतंत्र, मीडिया और हमारा समय’ विषय पर अत्यंत गंभीर व सार्थक संवाद के आयोजन के साथ-साथ ‘शार्प रिपोर्टर’ मासिक पत्रिका के उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड विशेषांक का विमोचन भी किया गया। 

उपस्थित विद्वानों के संबोधन के अतिरिक्त उद्घाटन सत्र में दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के चर्चित पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी का लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से संवाद अत्यंत विचारोत्तेजक रहा। उन्होंने प्रतिभागियों के प्रश्नों के बेबाकी से जवाब भी दिए। उन्होंने कहा कि भारत में राजनीतिक सत्ता ही सब कुछ नियंत्रित करना चाहती है। राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों में संविधान से कॉपी-पेस्ट किया हुआ माल होता है। संवैधानिक संस्थाओं पर सत्ता का दबाव लोकतंत्र को कमजोर करता है। मीडिया उस राजनीतिक सत्ता से ही प्रभावित और सरकार केंद्रित हो जाता है। 

प्रो. देवराज ने ‘मीडिया, लोकतंत्र और हमारा समय’ विषय का प्रवर्तन करते हुए लोकतंत्र के बारे में लोहिया, अंबेडकर और नरेंद्रदेव के योगदान का स्मरण किया। उन्होंने तीनों विद्वानों के बारे में बताया कि वे ऐसा लोकतंत्र चाहते थे, जिसमें व्यक्ति महज मत न होकर मूल्य होना चाहिए, सौंदर्य की कसौटी गौर नहीं श्याम वर्ण को होना चाहिए तथा विचार की आवश्यकता और उसकी स्वतंत्रता के अनुकूल वातावरण होना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि लोकतंत्र में लोक की भागीदारी कम हुई है तथा पिछले सात दशक में सबसे अधिक उपेक्षा शिक्षा और संस्कृति की हुई उन्होंने कहा कि जब मीडिया ने अपनी रखवाली करने की कोशिश की तब उसे सकारात्मक बने रहने के नाम पर उद्देश्य से भटका दिया गया है। सकारात्मक मीडिया के नाम पर मीडिया भटकाव की राह पर है। सकारात्मक या नकारात्मक कुछ नहीं होता जो आप देते हैं वही जरूरत है। आज सकारात्मक वह है जो सत्ता को सुख पहुँचाए। मीडिया को इससे बचकर देश के ज़मीनी यथार्थ से जुड़ना होगा अन्यथा आने वाला समय उसे माफ़ नहीं करेगा। 

डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि हम संविधान के नाम पर जातियों को बांट रहे हैं। हम माइंड गिनने के बजाय सिर गिनने की नीतियों का पालन कर रहे हैं। कथित सोशल मीडिया सर्वेंट की जगह मास्टर बन गया है। उन्होंने मीडिया को पुनः मिशन बनाने का आह्वान करते हुए शाश्वत मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा दी। 

‘मीडिया से उम्मीदें’ पर केंद्रित विचार सत्र में विविध प्रांतों से आए मीडियाकर्मियों ने अपने अनुभव साझा किए। ‘आज तक’ के पत्रकार रामकिंकर ने कहा कि मीडिया की निष्पक्षता को लेकर कितनी भी आलोचना क्यों न करें लेकिन जब लोग संकट मे होते हैं तो वे अपनी आवाज उठाने के लिए मीडिया के पास ही आते है। ‘मीडिया मिरर’ के संपादक प्रशांत राजावत ने कहा कि मीडिया में जो सच्चाई परोसना चाहता है उनकी आवाज मीडिया के लोग ही निजी स्वार्थ की चाहत में दबा देते हैं। जुझारू पत्रकार अखिलेश अखिल ने बिहार में सत्ताधीशों द्वारा पत्रकारों की आवाज दबाने के लिए अपनाए जाने वाले हथकंडों की जानकारी दी और अपने उत्पीड़न की दास्तां सुनाई। 

वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त ने मीडिया को कमजोर करने के लिए सरकार द्वारा बनाए जा रहे मनमाने कानूनों पर सवाल उठाए। पत्रकार अतुल मोहन सिंह ने कहा कि पत्रकार को खबरों के साथ न्याय करना चाहिए। अनामी शरण बबल ने कहा कि हम अंतहीन महाभारतकाल में जी रहे हैं और समाज नपुंसकता की ओर जा रहा है। ‘भड़ास 4 मीडिया’ के संचालक एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ यशवंत सिंह ने कहा कि आधुनिक समाज में समस्त परिवर्तन टेक्नालाजी से आए हैं, विचार से नहीं। अतः टेक्नालाजी से ही क्रांति भी लाई जा सकती है और लोकतंत्र को बचाया जा सकता है। 

दूसरे दिन ‘लोकतंत्र, साहित्य व हमारा समय’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के पूर्व आचार्य डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने कहा कि भारत में लोकतंत्र अभी प्रयोग की दशा में है तथा उसे असफल घोषित करना जल्दबाजी माना जाएगा। हर चुनाव में भारतीय जनता निरंतर परिपक्वता के प्रमाण देती है और संसदीय लोकतंत्र के निजी प्रादर्श की उसकी तलाश अभी जारी है। उन्होंने आगे कहा कि हमारा समय निस्संदेह खतरनाक समय है जिसमें सारी दुनिया आतंक, युद्ध और तानाशाही की ओर बही जा रही है लेकिन सृष्टि का इतिहास गवाह है कि खतरों के बीच ही मनुष्यता ने सदा नई राहें खोजी हैं। वर्तमान में मीडिया और साहित्य को इस चुनौती का सामना करना है और लोकतंत्र के विकेंद्रीकरण द्वारा जनपक्ष को मजबूती प्रदान करने की जिम्मेदारी निभानी है। उन्होंने विरुद्धों के सामंजस्य के भारतीय दर्शन को व्यावहारिक रूप देने का आह्वान करते हुए समकालीन साहित्य के जुझारू तेवर की प्रशंसा की। 

इस सत्र के मुख्य वक्ता मदनमोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान, काशी विद्यापीठ के निदेशक प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि समाज के कल्याण के लिए लिखा गया साहित्य ही श्रेष्ठ होता है। उन्होंने कहा कि आजादी से राजसत्ता तो मिली मगर विचारसत्ता को भुला दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिक आचरण गिर रहा है। उस पर संवाद आखिर कब होगा? नागरिक ही पत्रकार, साहित्यकार व मतदाता होता है। उसका आचरण खराब होगा तो लोकतंत्र कैसे आएगा? 

वरिष्ठ व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने अध्यक्षासन से संबोधित करते हुए कहा कि साहसी साहित्यकार और पत्रकार कभी समझौता नहीं करता । उन्होंने कहा कि सही कलम वही होती है जो किसी भी परिस्थिति में न रुके, न झुके और न ही बिके। 

इस द्विदिवसीय राष्ट्रीय उत्सव के अंतर्गत इसकी संयोजक संस्था ‘शार्प रिपोर्टर’ द्वारा पत्रकारिता व साहित्य जगत से दस कलमकारों को आजमगढ़ अंचल की विश्वप्रसिद्ध महान विभूतियों की स्मृति में सम्मानित किया गया। सम्मानित विद्वानों में डॉ. योगेन्द्रनाथ शर्मा अरुण को ‘महापंडित राहुल सांकृत्यायन स्मृति साहित्य सम्मान-2018’, गिरीश पंकज को ‘मुखराम सिंह स्मृति पत्रकारिता सम्मान-2018’, जयशंकर गुप्त को ‘गुंजेश्वरी प्रसाद स्मृति पत्रकारिता सम्मान-2018’, प्रो. ऋषभदेव शर्मा को ‘विवेकी राय स्मृति साहित्य सम्मान-2018’, पुण्यप्रसून
ऋषभदेव शर्मा को 'विवेकी राय साहित्य सम्मान-2018' प्रदान करते हुए
दीनपाल राय, देवराज, अरविंद कुमा सिंह एवं अन्य 
वाजपेयी को ‘सुरेंद्र प्रताप सिंह स्मृति टीवी पत्रकारिता सम्मान-2018’, यशवंत सिंह को ‘विजयशंकर वाजपेयी स्मृति पत्रकारिता सम्मान-2018’, विजयनारायण को ‘शार्प रिपोर्टर लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड-2018’, सतीश सिंह रघुवंशी को ‘शार्प रिपोर्टर युवा पत्रकारिता सम्मान-2018’ तथा डॉ. मधुर नज्मी को ‘अल्लामा शिब्ली नोमानी स्मृति अदबी अवार्ड-2018’ दिया गया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता वर्धा से पधारे प्रो. देवराज ने की। 

पहले दिन भोजपुरी गायिका चंदन तिवारी की लोक आधारित गीत संध्या विशेष रसपूर्ण रही तो दूसरे दिन के अर्धरात्रि के बाद तक चले कवि सम्मेलन व मुशायरे ने आयोजन को नई ऊँचाई दीजिसमें महेन्द्र अश्क, हैदर किरतपुरी, डॉ. मधुर नज्मी, ईश्वरचन्द त्रिपाठी, रूचि दुबे, गीता त्रिपाठी, शीला पांडे, अनामिका श्रीवास्तव, पुरुषार्थ सिंह, मैकश आजमी, प्रेम ग़म आजमी, शिवकुमार सैनी डंक, नागेश शांडिल्य, बालेदीन बेसहारा, राजाराम सिंह, भालचन्द त्रिपाठी, आनंद श्रीवास्तव आदि ने काव्यपाठ किया। 

कार्यक्रम का सफल संचालन अमन त्यागी ने किया तो शार्प रिपोर्टर पत्रिका के संपादक अरविंद सिंह व संस्थापक वीरेंद्र सिंह ने अतिथियों का भावपूर्ण स्वागत किया। 

इस अवसर पर तीन प्रस्ताव भी पारित किए गए जिनमें आजमगढ़ में महापंडित राहुल सांकृत्यायन के नाम पर केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग, पत्रकारों की राष्ट्रव्यापी सुरक्षा के लिए केंद्र व राज्यों की सरकारों द्वारा तुरंत प्रभावी कानून बनाए जाने की मांग और अपना दायित्व निभाते हुए पत्रकार की हत्या पर या मौत पर उसके परिवार को शहीद सैनिकों के परिवार जैसी सुविधा दी जाने की मांग की गई। 

[डॉ. चंदन कुमारी : आजमगढ़ से लौट कर] 
द्वारा : श्री संजीव कुमार IDAS, एकाउंट्स ऑफिस, 
स्माल आर्म्स फैक्टरी, 
अरमापुर, कानपुर-208009, उत्तर प्रदेश 








बुधवार, 28 मार्च 2018

एमएमटीसी में राजभाषा कार्यशाला संपन्न




हैदराबाद, 27 मार्च, 2018.भारत के दो सबसे बड़े विदेशी मुद्रा कमाने वाले संस्थानों में से  एक  खनिज तथा धातु व्यापार निगम लिमिटेड या एमएमटीसी लिमिटेड भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक व्यापारिक प्रतिष्ठान है. इसके हैदराबाद स्थित कार्यालय में त्रैमासिक राजभाषा कार्यशालाओं के सिलसिले में आज "भारत की राजभाषा नीति" और "कार्यालयीन शब्दावली और पत्राचार" पर डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने दो प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) दिए और प्रतिभागी अधिकारियों को राजभाषा-व्यवहार का प्रशिक्षण दिया. एमएमटीसी के महाप्रबंधक टी. श्रीनिवास राव ने कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि राजभाषा हिंदी को अपने कामकाज में अपनाना हमारी संवैधानिक दायित्व और राष्ट्रीय कर्तव्य है. सुरेश ताईशेट्टे और अजय मिश्र ने समन्वयक की ज़िम्मेदारी बखूबी निभाई.

गुरुवार, 30 नवंबर 2017

सफलता की कहानी और सोशल मीडिया लेखन पर कार्यशाला संपन्न


हैदराबाद, 29 नवंबर,2017. 
राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान (मैनेज) में नराकास-4 की बैठक के अवसर पर विभिन्न संस्थानों से आए हिंदीकर्मियों के निमित्त ''कल्पतरु : सृजनात्मक लेखन कार्यशाला'' संपन्न हुई.  विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने प्रतिभागियों को ''सफलता की कहानी'' (सक्सेस स्टोरी) लिखने और ''सोशल मीडिया लेखन'' का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया. डॉ. कस्तूरी श्रीवल्ली  ने कार्यक्रम का संचालन  किया. 


मंगलवार, 3 अक्टूबर 2017

प्रो. ऋषभदेव शर्मा को 'अंतरराष्ट्रीय हिंदी मित्र सम्मान'








28 -29 सितंबर,2017 को मुंबई में विले पार्ले स्थित साठ्ये महाविद्यालय में संपन्न "रामकथा और आदिवासी साहित्य" विषयक "द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी" के अवसर पर हैदराबाद के हिंदी आचार्य एवं साहित्यकार प्रो.ऋषभदेव शर्मा को मॉस्को की संस्था रूसी-भारतीय मैत्री संघ 'दिशा' एवं मुंबई की संस्था साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्थान की ओर से "अंतरराष्ट्रीय हिंदी मित्र सम्मान" से अलंकृत किया गया। यह सम्मान प्रो.ऋषभ को उनकी हिंदी भाषा, शिक्षा, साहित्य और सामाजिक कार्यों के प्रति अनवरत सेवाओं के लिए प्रदान किया गया है। साथ ही, पूर्वोत्तर भारत के सम्मान चिह्नों द्वारा भी उनका अभिनंदन किया गया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता साठ्ये कॉलेज की प्राचार्य डॉ. कविता रेगे ने की। इस अवसर पर अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ. दिलीप सिंह, महात्मा गांधी संस्थान-मॉरीशस की निदेशक डॉ. विद्योत्तमा कुंजल, हिंदी प्रचारिणी सभा-मॉरीशस के प्रधान डॉ. यंतु देव बुधु, श्रीलंका की हिंदी लेखिका डॉ. वजीरा गुणसेना, सिने अभिनेत्री पुष्पा वर्मा, हिंदी संगम फाउंडेशन-अमेरिका के निदेशक डॉ. अशोक ओझा, वैश्विक राम साहित्य के विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, स्पाइल दर्पण-नार्वे के संपादक डॉ. सुरेश शुक्ल, संवाद पत्रिका के संपादक डॉ. अमित कुमार पांडेय, कुतुबनुमा की संपादक डॉ. राजम नटराजन पिल्लै सहित देश-विदेश के अनेक हिंदीसेवी एवं साहित्यकार उपस्थित थे। संचालन डॉ. अनिल सिंह ने किया।

(रिपोर्ट : डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा)
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गुरुवार, 24 अगस्त 2017

'समकालीन सरोकार और साहित्य' लोकार्पित



हैदराबाद, 20 अगस्त,2017. 

कादंबिनी क्लब-हैदराबाद एवं साहित्य मंथन के संयुक्त तत्वावधान में रविवार, 20 अगस्त को हिंदी प्रचार सभा, नामपल्ली परिसर में क्लब की 301वीं गोष्ठी एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह अरबामिंच विश्वविद्यालय, इथियोपिया के आचार्य डा० गोपाल शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ .क्लब की अध्यक्ष डा० अहिल्या मिश्र एवं कार्यकारी संयोजक मीना मुथा ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस अवसर पर मुख्य अतिथि कानपुर से पधारे वरिष्ठ गीतकार बृजनाथ श्रीवास्तव और अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य डा० एम० वेंकटेश्वर के साथ डा० अहिल्या मिश्र और डा० ऋषभदेव शर्मा मंचासीन हुए. संचालन प्रवीण प्रणव और मीना मुथा ने किया.

समारोह के पहले सत्र में मंचासीन अतिथियों ने तालियों की गूँज के बीच ‘पुष्पक’ के पैंतीसवें अंक को लोकार्पित किया. विमोचित पत्रिका का परिचय देते हुए कार्यकारी संपादक अवधेश कुमार सिन्हा ने कहा कि हर बढ़ते अंक से साथ ‘पुष्पक’ अधिक से अधिक पाठकों तक अपनी पहुँच बना रहा है तथा स्थानीय रचनाकारों के साथ-साथ भारत भर से सशक्त रचनाएँ प्राप्त हो रही हैं. संपादकीय को ‘पुष्पक’ की विशेषता बताते हुए उन्होंने कहा कि कहानी, गीत, कविता, ग़ज़ल, संस्मरण, समीक्षा, लघु कथा, आलेख, पुस्तक परिचय आदि विधाओं में बेहतरीन रचनाओं का चुनाव संपादक मंडल की दूरदृष्टि का परिचायक है.

दूसरे सत्र में डा० ऋषभदेव शर्मा एवं डा० जी० नीरजा द्वारा संपादित पुस्तक ‘समकालीन सरोकार और साहित्य’ को मुख्य अतिथि प्रो० एम० वेंकटेश्वर ने लोकार्पित किया. लोकार्पण वक्तव्य में डा० एम० वेंकटेश्वर ने कहा कि साहित्य जटिल अनुशासन है तो शोधपरक लेखन जटिलतर है. उन्होंने अध्यापकों और शोधार्थियों से लेकर सामान्य जनता तक में स्वाध्याय की प्रवृत्ति के अकाल पर चिंता जताते हुए कहा कि साहित्य कभी चलकर मनुष्य के पास नहीं जाएगा, हमें मनुष्य को साहित्य के पास जाने को प्रेरित करते रहना पड़ेगा. उन्होंने विमोचित पुस्तक से कई लेखों का उद्धरण देते हुए उनकी गुणवत्ता की चर्चा की और उसे न सिर्फ शोधार्थियों के लिए बल्कि सभी साहित्य प्रेमियों के किए पठनीय और संग्रहणीय बताया. साथ ही उन्होंने संपादकों की अति उदारता की आलोचना करते हुए उन्हें चयन में निर्मम होने की सलाह भी दी. 
लोकार्पित पुस्तक की प्रथम प्रति डा० अहिल्या मिश्र को उनकी सप्ततिपूर्ति की पूर्ववेला के उपलक्ष्य में समर्पित की गई. हिंदी साहित्य सेवा में तन-मन-धन से समर्पित वरिष्ठ स्त्रीविमर्शकार लेखिका, नाटककार, कहानीकार, कवयित्री, निबंधकार और संपादक डा० अहिल्या मिश्र को जीवन के 70वें वर्ष के पायदान पर शुभकामनाएँ देते हुए ‘साहित्य मंथन’ की ओर से सारस्वत सम्मान से अलंकृत किया गया. इसके अंतर्गत अभिनंदन पत्र, शाल, माला, श्रीफल, लेखनी और पुस्तक समर्पित की गई. अभिनंदन पत्र एवं समर्पण वाक्य का वाचन डा० ऋषभदेव शर्मा ने किया.
डा० अहिल्या मिश्र ने सम्मान-स्वीकृति-वक्तव्य में कहा कि कादंबिनी क्लब की यह 301वीं गोष्ठी अविस्मरणीय रहेगी. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि ‘साहित्य मंथन’ के बहाने समशील साहित्यिक बिरादरी ने आज जो सम्मान दिया है, इसमें निहित प्रेम में सारे कलुष और ताप को हरने की शक्ति है अतः मैं इस आत्मीय अभिनंदन को शिरोधार्य करती हूँ. बृजनाथ श्रीवास्तव एवं अन्य वक्ताओं ने डा० अहिल्या मिश्र को बधाई देते हुए कहा कि वे सही अर्थ में साहित्य और सारस्वत वातावरण की सूत्रधार हैं.
डा० गोपाल शर्मा ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि अंग्रेजी और विश्व की अन्य भाषाओं में शोधलेखन में संदर्भ देने की शैलियों पर अनेक पुस्तकें हैं लेकिन हिंदी में इस तरह की कोई प्रामाणिक पुस्तक नहीं है अतः लोकार्पित पुस्तक में इस अभाव की पूर्ति का भी एक विनम्र प्रयास शामिल है. उन्होंने याद दिलाया कि इस पुस्तक में स्थानीय व राष्ट्रीय लेखकों के 30 शोधपरक आलेख शामिल हैं. उन्होंने शोधार्थियों से कहा कि शोधपत्र लिखने से पहले विषय की विस्तृत समझ के लिए ज्यादा से ज्यादा साहित्यकारों को पढ़ें. इसके बाद सहयोगी लेखकों को पुस्तक की लेखकीय प्रतियाँ भेंट की गईं.

आरंभ में शहर के वरिष्ठ पत्रकार, कर्मठ सामाजिक कार्यकर्ता, हिंदी साहित्यसेवी डा० हरिश्चंद्र विद्यार्थी के दुखद निधन पर मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई. शुभ्रा मोहंतो द्वारा सस्वर प्रस्तुत निराला रचित सरस्वती वंदना के पश्चात अतिथियों का स्वागत करते हुए डा० अहिल्या मिश्र ने कहा कि गोष्ठी की निरंतरता सदस्यों की नियमित उपस्थिति से ही संभव हुई है तथा संस्था हिंदी साहित्य की सेवा, प्रचार-प्रसार में पूर्ण समर्पण से कार्य कर रही है.

अंतिम सत्र में भँवरलाल उपाध्याय के संचालन में कवि गोष्ठी संपन्न हुई. बृजनाथ श्रीवास्तव, प्रो० गोपाल शर्मा, डा० ऋषभदेव शर्मा और डा० अहिल्या मिश्र मंचासीन हुए. देवाप्रसाद मायला, शशि राय, ज्योति नारायण, डा० बी० बालाजी, दीपक दीक्षित, मिलन बिश्नोई, संतोष कुमार रज़ा, डा० ऋषभदेव शर्मा, डा० अहिल्या मिश्र, एल० रंजना, दर्शन सिंह, सरिता सुराणा जैन, डा० गीता जांगिड़, प्रवीण प्रणव, चिराग राजा, अवधेश कुमार सिन्हा, श्रीमन्नारायण विराट चारी, मीना मुथा, भँवरलाल उपाध्याय और डा० रियाजुल अंसारी ने काव्य पाठ किया. बृजनाथ श्रीवास्तव ने अध्यक्षीय काव्यपाठ किया. डा० मदनदेवी पोकरणा, डा० सीता मिश्र, कुंजबिहारी गुप्ता, दयालचंद अग्रवाल, लक्ष्मी निवास शर्मा, ज्योतिष कुमार यादव, आशा मिश्र, श्रीसेन कुमार भारती, चेन्नकेशव रेड्डी, शिवकुमार तिवारी कोहिर, राघवेंद्र, शोभा महाबल, डा० सिरिपुरपु तुलसी देवी, श्रुतिकांत भारती, लीला बजाज, वर्षा कुमारी, डा० श्रद्धा तिवारी, डा० सुपर्णा मुखर्जी, टी० निरंजन, बनवारीलाल मीणा, भूपेंद्र मिश्र आदि की उपस्थिति रही.  मीना मुथा के आभार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.