सोमवार, 27 अगस्त 2012

तेलुगु से अनूदित पाँच पुस्तकें लोकार्पित



राचकोंडा बहनों द्वारा तेलुगु से अनूदित पाँच पुस्तकों और 'स्रवन्ति' के अगस्त अंक के लोकार्पण के अवसर पर (बाएं से - गुंटूर रजनी प्रभा, मुनुकुट्ला रजनी प्रभा, पारनंदि निर्मला,डॉ.स्वराज्य लक्ष्मी, एम.सीतालक्ष्मी,
डॉ.राधेश्याम शुक्ल, डॉ.ऋषभ देव शर्मा, डॉ.एम.वेंकटेश्वर, डॉ.गोपाल शर्मा, सी.एस.होसगौडर और डॉ.जी.नीरजा)

दर्शक दीर्घा में - डॉ.रामप्रवेश राय, वी.कृष्णा राव, जी.परमेश्वर, 
लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, डॉ.पी.घनाते, प्रमोद परीट और अन्य 

दर्शक दीर्घा में संपत देवी मुरारका, आर.शांता सुंदरी, डॉ.सी.भवानीदेवी , विनीता शर्मा, पवित्रा अग्रवाल, एलिजाबेथ कुरियन मोना,  ज्योति नारायण और अन्य 

उत्कृष्ट अनुवाद के लिए राचकोंडा बहनों का सारस्वत सम्मान : (दाएँ से ) डॉ.स्वराज्य लक्ष्मी, पारनंदि निर्मला, मुनुकुट्ला पद्मा राव और गुंटूर रजनी प्रभा 

सरस्वती वंदना करते हुए ज्योति नारायण 


हैदराबाद, 27 अगस्त 2012. 

साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ‘साहित्य मंथन’ के तत्वावधान में यहाँ खैरताबाद स्थित दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के सम्मलेन कक्ष में प्रो.ऋषभ देव शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित एक समारोह में तेलुगु से हिंदी में अनूदित पाँच साहित्यिक और आध्यात्मिक पुस्तकों तथा सभा की द्विभाषी पत्रिका ‘स्रवन्ति’ के नए अंक का लोकार्पण संपन्न हुआ.

वकुलाभरणम रामकृष्ण की तेलुगु पुस्तक ‘कंदुकूरि वीरेशलिंगम’ के पारनंदि निर्मला द्वारा किए गए हिंदी अनुवाद को लोकार्पित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं भाषा चिंतक डॉ.राधेश्याम शुक्ल ने कहा कि यह कृति तेलुगु नवजागरण के एक पुरोधा के जीवन और साहित्य पर चर्चा के माध्यम से देश सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक चेतना को जगाने में समर्थ है.

दो खण्डों में प्रकाशित ‘तेलुगु की प्रतिनिधी कहानियां’ शीर्षक पुस्तकमाला के प्रथम खंड का लोकार्पण अंग्रेज़ी और विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य डॉ.एम.वेंकटेश्वर ने किया. उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में संकलित तेलुगु के बारह प्रमुख कहानीकारों की 24  कहानियों का पारनंदि निर्मला ने हिंदी भाषा की प्रकृति के अनुरूप सफल अनुवाद किया है जिसके कारण इसमें पठनीयता का गुण स्वतः ही आ गया है.

 इस पुस्तकमाला के द्वितीय खंड में तेलुगु की 22  कहानियों का हिंदी अनुवाद सम्मिलित है जो चार राचकोंडा बहनों के रूप में जानी जाने वाली अनुवादिकाओं डॉ.स्वराज्य लक्ष्मी, पारनंदि निर्मला, मुनुकुट्ला पद्मा राव और गुंटूर रजनी प्रभा द्वारा हिंदी में रूपांतरित की गई हैं. इस खंड को लोकार्पित करते हुए वोलेगा यूनीवर्सिटी (पूर्वी अफ्रीका) के अंग्रेज़ी विभाग के आचार्य डॉ.गोपाल शर्मा ने कहा कि राचकोंडा बहनों ने मूल रचनाओं को आत्मसात करके उन्हें लक्ष्य भाषा हिंदी के मुहावरे में इस प्रकार ढाला है कि यह अनुवाद मौलिक रचना पढ़ने जैसा आनंद देता है.

चौथी लोकार्पित पुस्तक ‘कार्तिक महात्म्य’ का विमोचन करते हुए दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा–आंध्र के सचिव सी.एस.होसगौडर ने भारतीय जीवन मूल्यों का संरक्षण करने वाले पौराणिक और आध्यात्मिक साहित्य की प्रासंगिकता पर भी चर्चा की और इस अनुवाद रूपी अनुष्ठान के लिए राचकोंडा बहनों को बधाई दी.

पांचवी पुस्तक ‘विज्ञान ज्योति’ का लोकार्पण कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ.ऋषभ देव शर्मा ने किया. उन्होंने अनुवादकर्ता चारों विदुषियों के अनुवादकर्म की प्रशंसा करते हुए कहा कि अनुवाद हमारे समक्ष अन्य समाजों तक पहुँचने वाली अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक खिड़कियाँ खोलता है और हमें कूपमंडूकता से मुक्त करके व्यापक और समृद्ध बनाता है.

इस अवसर पर दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आंध्र की अध्यक्ष एम.सीतालक्ष्मी ने सभा की साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘स्रवन्ति’ के अगस्त 2012 के अंक का लोकार्पण किया. रचनाकारों और अनुवादकों को शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न भारतीय भाषाओं की सामग्री को हिंदी में लाने का काम राष्ट्रभाषा और राष्ट्र की सेवा का काम है जिसके माध्यम से भारतीय साहित्य की मूलभूत एकता को समझने में सहायता मिलती है.

आरंभ में अतिथियों ने सरस्वती-दीप प्रज्वलित किया और ‘साहित्य मंथन’ की संरक्षक ज्योति नारायण ने मंगलाचरण किया. इस अवसर पर अनुवाद के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए चारों राचकोंडा बहनों का सारस्वत अभिनन्दन भी किया गया.

कार्यक्रम का संचालन उच्च शिक्षा और शोध संस्थान की प्राध्यापक डॉ.गुर्रमकोंडा नीरजा ने किया तथा ‘साहित्य मंथन’ के संयोजक डॉ.बी.बालाजी ने धन्यवाद ज्ञापित किया.

इस अवसर पर डॉ.गोरखनाथ तिवारी, वेमूरि ज्योत्स्ना कुमारी, कोसनम नागेश्वर राव, राधाकृष्ण मिरियाला, जी.संगीता, डॉ.रामप्रवेश राय, लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, पवित्रा अग्रवाल, विनीता शर्मा, संतोष काम्बले, प्रमोद परीट, डॉ.एम.रंगय्या, जे.परमेश्वर, एलिजाबेथ कुरियन मोना, देवेंद्र शर्मा, वी.कृष्णा राव, आर.शांता सुंदरी, पारनंदि माधवराम, संपत देवी मुरारका, अशोक तिवारी, सीमा मिश्रा, आकाश तिवारी, ए.जी.श्रीराम, डॉ.पी.घनाते, के.अनुराधा, उमा दुर्गा देवी, प्रो.पी.वी.रमणमूर्ति, पी.सुधा, पी.काव्या, चावली उषा, चावली विश्वेश्वर राव, फनी, पूर्णिमा, पल्लवी, सूर्या, तेजा चंद्रशेखर, वेंकटेश्वर राव, बी.पी.करुणाकर आदि उपस्थित होकर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की.

[चित्र-सौजन्य : डॉ. बी बालाजी, सम्पत देवी मुरारका और राधाकृष्ण मिरियाला].