शनिवार, 11 जनवरी 2014

चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मलेन : विचार सत्र 2

भोजन अवकाश के उपरांत.

तीसरा सत्र 'कामकाजी माताओं के बच्चों की समस्याओं' पर केंद्रित रहा. इस सत्र की अध्यक्षता जापान से पधारी डॉ. तोमोको किकुची ने की. डॉ. उषा महाजन, डॉ. केवल कृष्ण पाठक, डॉ. शशिप्रभा वाजपेयी, डॉ. सरदार मुजावर, डॉ. अनिता नायर तथा  डॉ. सुंदरम मंचासीन थे. इस सत्र में कुल 20 शोधपत्रों का वाचन हुआ. 

उषा महाजन ने कहा कि कामकाजी स्त्रियों को Flexible Time देना चाहिए ताकि वे बच्चों की अच्छी परवरिश कर सके, अच्छी Guidance दे सकें. माता-पिता के बीच यदि संबंध अच्छे हो तो घर-परिवार का वातावरण भी अच्छा होगा और बच्चे भी स्वस्थ परिवेश में पलेंगे-बढ़ेंगे. स्त्री-पुरुष को एक-दूसरे के Competitor बनकर नहीं बल्कि सहयोगी बनकर रहना होगा. 

इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए  तोमोको किकुची ने कहा कि जापान और भारत में बहुत समानताएँ हैं विशेष रूप से कामकाजी माताओं के बच्चों की समस्याओं के संदर्भ में. उन्होंने एक सर्वे के हवाले से यह कहा कि जापान की आधी जनसंख्या (5 करोड)  महिलाएँ हैं - कामकाजी महिलाएँ. उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक व्यवस्था होनी चाहिए ताकि बच्चों को माँ का भरपूर प्यार मिले.
- जी. नीरजा 

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