चेन्नै, 22 फरवरी, 2026। (प्रेस विज्ञप्ति)। यहाँ अरुंबक्कम स्थित द्वारका दास गोवर्धन दास वैष्णव कॉलेज में “महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य और पुष्टिमार्ग: एक मानवीय दृष्टि” विषयक द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय (हाइब्रिड) संगोष्ठी धूमधाम से संपन्न हुई।
उद्घाटनकर्ता
मुख्य अतिथि गोस्वामी 108 श्री मधुसूदन जी महाराज ने पुष्टिमार्ग के सिद्धांतों, ब्रह्म-जीव संबंध तथा वल्लभाचार्य के मानवीय दर्शन पर प्रकाश डालते हुए
उनके विचारों को अपनाने का आह्वान किया तथा अष्टछाप कवियों, विशेषतः
सूरदास के काव्य में व्यक्त भक्ति-भाव का उल्लेख किया।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य कैप्टन
डॉ. एस. संतोष बाबू ने भारतीय दार्शनिक परंपरा को जीवन-मूल्यों का मार्गदर्शक
बताते हुए ऐसे आयोजनों को समाज और शिक्षा के बीच सेतु बताया।
सचिव डॉ. अशोक कुमार मूँधड़ा ने महाप्रभु श्री
वल्लभाचार्य के सिद्धांतों को अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि कृष्ण-भक्ति से
मातृशक्ति, प्रेम,
आनंद और ईश्वर-कृपा की अनुभूति प्रबुद्ध होती है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन प्रो. पी. राधिका
(कुलपति, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा), प्रो. विवेक मणि त्रिपाठी (ग्वांगतोंग विश्वविद्यालय, चीन) और डॉ. मनोज कुमार सिंह ने दक्षिण भारत की कृष्ण भक्ति धारा और
पुष्टिमार्ग की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए करुणा, अनुग्रह और सेवा-भाव को विश्व-मानवता के साझा मूल्य बताया।
संयोजक डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी ने संगोष्ठी की रूपरेखा
प्रस्तुत की और कहा कि यह आयोजन भक्ति, कृपा, सेवा-भाव तथा समकालीन जीवन में
पुष्टिमार्ग की प्रासंगिकता पर वैश्विक अकादमिक विमर्श स्थापित करने का प्रयास है।
दो दिनों में 1 अंतरराष्ट्रीय सत्र आभासी माध्यम से और कुल 3 अकादमिक सत्र प्रत्यक्ष माध्यम से संपन्न हुए। इन सत्रों की अध्यक्षता
प्रो. निर्मला एस. मौर्य (पूर्व कुलपति, जौनपुर
विश्वविद्यालय), प्रो. ऋषभदेव शर्मा, प्रो.
जयशंकर बाबु और प्रो. मंजुनाथ अंबिग ने की। मुख्य वक्ताओं और विषय विशेषज्ञों के
रूप में प्रो. साकेत कुशवाहा (कुलपति, लद्दाख विश्वविद्यालय,
लद्दाख), डॉ. पीबी वनिता, उमेश पाठक (सोरों, सूकरक्षेत्र), डॉ. सुधा त्रिवेदी, डॉ. विजया सिंह (प्रयागराज),
प्रो. राजशेखर (मॉरीशस) तथा प्रो. चंद्रशेखर सिंह (पूर्व निदेशक,,
समाज कार्य, काशी विद्यापीठ, वाराणसी), प्रो. मुकेश मिश्रा (बस्ती) तथा प्रो. डॉ.
आलोक पांडेय (हैदराबाद) सम्मिलित हुए। चारों सत्रों में देश-विदेश से लगभग 100 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
सभी सत्रों का सफल संचालन महाविद्यालय के प्राध्यापकों
डॉ. सरोज सिंह, डॉ.
प्रवीण कुमार मिश्र, डॉ. कुमार अभिषेक, डॉ. हर्षलता वी. शाह और डॉ. सुनील पाटिल ने मनोयोगपूर्वक किया। लगभग 200
छात्रों की निरंतर और सक्रिय उपस्थिति ने बाहर से आए विद्वानों को
विशेष रूप से प्रभावित किया। 000











कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें