भारतीय साहित्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
भारतीय साहित्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

डॉ. मंजु शर्मा की पुस्तक 'कथाकार नासिरा शर्मा का स्त्री विमर्श' लोकार्पित


मंजु शर्मा की पुस्तक 'नासिरा शर्मा का स्त्री विमर्श' लोकार्पित
"""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""
हैदराबाद, 20 फरवरी, 2019।
यहाँ हिंदी प्रचार सभा, नामपल्ली परिसर में कादंबिनी क्लब के तत्वावधान में आयोजित एक सादा समारोह में उस्मानिया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. शुभदा वांजपे के हाथों चिरक इंटरनेशनल में कार्यरत डॉ. मंजु शर्मा की पुस्तक 'नासिरा शर्मा का स्त्री विमर्श' का लोकार्पण संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता हैदराबाद की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अहिल्या मिश्र ने की। लेखिका की उपलब्धियों  और पुस्तक की विषयवस्तु पर प्रवीण प्रणव और अवधेश कुमार सिन्हा ने चर्चा की। पहली प्रति 'स्रवंति' की सहसंपादक डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा को समर्पित की गई जिसे उनके प्रतिनिधि ने स्वीकार किया। डॉ. ऋषभदेव शर्मा और मुरली मनोहर भटनागर ने शुभकामनाएँ दीं। साथ ही, साहित्य मंथन और कादंबिनी क्लब की ओर से लेखिका का सारस्वत अभिनंदन किया गया। संचालन मीना मुथा ने किया।

                                - समीक्षा शर्मा, हैदराबाद


बुधवार, 25 मार्च 2015

मुक्तिबोध की कविता ‘अंधेरे में’ पर त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 28 मार्च (शनिवार) से





0

रमेश पोखरियाल निशंक होंगे मुख्य अतिथि  

हैदराबाद, 24 मार्च (मीडिया विज्ञप्ति).

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा द्वारा संचालित उच्च शिक्षा और शोध संस्थान के खैरताबाद स्थित परिसर में कालजयी हिंदी साहित्यकार गजानन माधव मुक्तिबोध की दीर्घ कविता ‘अंधेरे में’ के प्रकाशन की अर्धशती के अवसर 28, 29 और 30 मार्च 2015 (शनि, रवि और सोमवार) को केंद्रीय हिंदी निदेशालय तथा स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद के आर्थिक सहयोग से त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है. उल्लेखनीय है कि यह वर्ष संस्थान की स्थापना का भी स्वर्ण जयंती वर्ष है.
राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक तथा आंध्र सभा के सचिव सी. एस. होसगौडर ने बताया कि इस समारोह का उद्घाटन शनिवार को प्रातः 9.30 बजे मुख्य अतिथि के रूप में पधार रहे प्रख्यात साहित्यकार उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के हाथों संपन्न होगा. इस अवसर पर विख्यात कला समीक्षक पद्मश्री जगदीश मित्तल, गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रो. योगेंद्रनाथ शर्मा ‘अरुण’, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रो. देवराज, संस्थान की कुलसचिव प्रो. निर्मला एस. मौर्य, आंध्र सभा की अध्यक्ष एम. सीतालक्ष्मी, ‘भास्वर भारत’ के संपादक डॉ. राधेश्याम शुक्ल, इफ्लू के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर, हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. वाई. वेंकट रमण राव, मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय की प्रो. शकीला खानम और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद के सहायक महाप्रबंधक डॉ. विष्णु भगवान शर्मा आदि विद्वान विशेष रूप से पधार रहे हैं.

इस अवसर पर ‘मुक्तिबोध : व्यक्ति और रचनाकार’ तथा ‘अंधेरे में : पुनर्पाठ’ विषयक विचार सत्रों में बीजेआर डिग्री कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्याम और बीडीएल के डॉ. बी. बालाजी के अतिरिक्त डॉ. साहिरा बानू बी. बोरगल, डॉ. गोरखनाथ तिवारी, डॉ. बलविंदर कौर और डॉ. मृत्यंजय सिंह आलेख प्रस्तुत करेंगे.

उल्लेखनीय है कि ‘अंधेरे में’ कविता पहले-पहल नवंबर 1964 में हैदराबाद से प्रकाशित ‘कल्पना’ पत्रिका में छपी थी. इस घटना की अर्धशती के अवसर पर शनिवार को सायं 5.00 बजे चिरक इंटरनेशनल के बाल कलाकार ‘अंधेरे में’ की नाट्य-प्रस्तुति देंगे. विशेष रूप से इस आयोजन के लिए ‘अंधेरे में’ का 12 भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है. ये अनुवाद सभी इस संगोष्ठी में लोकार्पित किए जाएँगे तथा रविवार को अनुवाद विमर्श संबंधी सत्र में इन पर केंद्रित परिसंवाद आयोजित है. इस निमित्त ‘अंधेरे में’ का अनुवाद तेलुगु में डॉ. भागवतुल हेमलता (विजयवाडा), कन्नड में डॉ. एस. टी. मेरवाडे और साहेब हुसैन जहागीरदार (बीजापुर), तमिल में डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा (हैदराबाद), मलयालम में डॉ. श्याम प्रसाद (एरणाकुलम), मराठी में मेघा आचार्य (वर्धा), राजस्थानी में डॉ. मंजु शर्मा (हैदराबाद), उर्दू में डॉ. सैयद मासूम रज़ा (मणुगुरू), बांग्ला में डॉ. देवराज (वर्धा), ओडिया और ब्रज भाषा में विजेंद्र प्रताप सिंह (हाथरस), मणिपुरी में डॉ. ई. विजयलक्ष्मी (इम्फाल) और त्रिपुरा की भाषा कॉकबरक में मिलन जमातिया (अगरतला) ने किया है.

समारोह के तीसरे दिन सोमवार को पंजीकृत प्रतिभागी शोधार्थियों द्वारा समांतर सत्रों में शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएँगे. इं समांतर सत्रों की अध्यक्षता तेलंगाना विश्वविद्यालय की डॉ. प्रवीणा और मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के डॉ. करन सिंह ऊटवाल करेंगे.

संगोष्ठी निदेशक प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने सभी साहित्य प्रेमियों, हिंदी सेवियों, प्राध्यापकों, शोधकर्ताओं और छात्रों से इस त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में पधारने का अनुरोध किया है.

प्रेषक : डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा
प्राध्यापक
उच्च शिक्षा और शोध संस्थान
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा
खैरताबाद, हैदराबाद – 500 004
मोबाइल – 9849986346
ईमेल – neerajagkonda@gmail.com


रविवार, 8 मार्च 2015

राजमंड्री में रवींद्रनाथ ठाकुर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

5 और 6 मार्च 2015 को अक्षरा द्वारा राजमंड्री में संपन्न ''कवींद्र रवींद्र का भारतीय भाषाओँ पर प्रभाव'' विषयक
 द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर प्रकाशित स्मारिका को लोकार्पित करते हुए पद्मश्री डॉ. यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद.
साथ में -
डॉ. एस.वी.एस. एस. नारायण राजू, डॉ. कामेश्वर राव, डॉ. आर.एस. सर्राजू, डॉ. पेरिसेट्टि श्रीनिवास राव, डॉ. एंडलूरि सुधाकर ,
डॉ. ऋषभदेव शर्मा एवं अन्य.






सोमवार, 1 दिसंबर 2014

[संगोष्ठी] मध्यकालीन भारतीय साहित्य की मुक्तक रचनाएँ






हैदराबाद, 1 दिसंबर, 2014.
आज यहाँ सेंट पायस क्रास स्नातक एवं स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, नाचाराम और केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में ''मध्यकालीन भारतीय साहित्य की मुक्तक रचनाएँ'' विषयक दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी महाविद्यालय के प्रेक्षागृह में आरंभ हुई. संयोजक डॉ. राज्य लक्ष्मी ने सबका भावभीना स्वागत किया.

उद्घाटन समारोह ढाई बजे शुरू हुआ जिसमें डॉ. राधेश्याम शुक्ल और प्रो. शुभदा वांजपे ने अपने विचार रखे तथा डॉ. श्रीराम परिहार ने बीज वक्तव्य दिया. 

पहले विचार सत्र में डॉ. ऋषभ देव शर्मा ने मध्यकालीन मुक्तक साहित्य की प्रेरणा के रूप में विशेष रूप से संस्कृत के कवि ''भर्तृहरि'' के शतकों पर चर्चा की. डॉ. अश्वत्थ नारायण ने ''बिहारी''  के मुक्तक काव्य की विवेचना की. अध्यक्षता करते  हुए प्रो. वाई. वेंकट रमण राव ने कहा कि भारतीय कविता के आकर ग्रंथों के अंतर्गत रामायण और महाभारत के आख्यानों की ही भाँति भर्तृहरि की शतकत्रयी को भी गिना जाना चाहिए क्योंकि नीति, शृंगार और वैराग्य विषयक उनकी उक्तियों ने शताब्दियों से रचनाकारों को प्रभावित किया है.

कल तीन विचार सत्र और होंगे तथा समापन सत्र पौने तीन बजे होगा.

प्रो. एम. वेंकटेश्वर जी ने प्रथम विचार सत्र के फोटो मुहैया कराए हैं जो धन्यवाद सहित यहाँ दर्शित हैं.


शनिवार, 21 जून 2014

डी. लिट. : हिंदी-मलयालम उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन

16 जून 2014 को डॉ. पी.राधिका (एरणाकुलम, केरल) ने ''हिंदी-मलयालम उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन'' शीर्षक अपना शोधप्रबंध डी. लिट. शोधोपाधि हेतु विधिवत प्रस्तुत किया. यह सुविस्तृत शोधकार्य  डॉ. ऋषभ देव शर्मा (हैदराबाद) के निर्देशन में संपन्न हुआ है.  

प्रो. पी. राधिका को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं!!1

गुरुवार, 21 नवंबर 2013

'तेलुगु साहित्य का हिंदी पाठ' प्रो. एन. गोपि को समर्पित



प्रो. ऋषभ देव शर्मा की सद्यःप्रकाशित समीक्षा पुस्तक 'तेलुगु साहित्य का हिंदी पाठ' का समर्पण वाक्य तेलुगु के शीर्षस्थ समकालीन साहित्यकार प्रो. एन. गोपि को लक्ष्य करके लिखा गया है, जो इस प्रकार है - "समकालीन भारतीय कविता के उन्नायक 'नानीलु' के प्रवर्तक परम आत्मीय अग्रज कवि प्रो. एन. गोपि को सादर"

20 नवंबर 2013 को इस पुसतक की पहली प्रति समर्पित करने जब डॉ. ऋषभ देव शर्मा रात्रि 8 बजे डॉ. एन. गोपि के घर पहुँचे तो पुस्तक का समर्पण वाक्य पढ़कर प्रो. एन. गोपि रोमांचित और गद्गद हो उठे. उल्लासपूर्वक उन्होंने अपनी अर्धांगिनी प्रतिष्ठित तेलुगु कवयित्री एन. अरुणा जी को आवाज लगाई और अभ्यागत लेखक को अंगवस्त्र द्वारा सम्मानित करने के लिए कहा. 

भावविभोर होकर बार बार प्रो. एन. गोपि कहते रहे - पुस्तक समर्पण और स्वीकार मेरे लिए कोई नई बात नहीं है लेकिन आपने यह पुस्तक मुझे समर्पित करके हिंदी की ओर से तेलुगु का जो सम्मान किया है उसे मैं आजीवन एक सुखद अनुभव की तरह याद रखूँगा. 

ऐसे अवसर पर प्रो. ऋषभ देव शर्मा का अवाक् रह जाना सहज ही था! 




सोमवार, 19 अगस्त 2013

फणीश्वर नाथ 'रेणु' पर प्रो. दिलीप सिंह का वक्तव्य



13/14 अगस्त 2013 को केंदीय विश्वविद्यालय, हैदराबाद में फणीश्वर नाथ 'रेणु' पर केंद्रित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी निवर्तमान प्रोफ़ेसर डॉ.सुवास कुमार के सम्मान में आयोजित थी. पहले सत्र की अध्यक्षता प्रो. दिलीप सिंह ने की. उस सत्र में अन्य मित्रों के साथ अपुन को भी ''आंचलिकता की प्रासंगिकता और हिंदी उपन्यास'' पर बोलने का सुयोग मिला. उसी दिन लंच-काल में प्रो. दिलीप सिंह का यह वक्तव्य रिकॉर्ड किया गया था.साथ ही अन्य भी कई विद्वानों के उदगार. (ऋषभ देव शर्मा)

शनिवार, 6 अप्रैल 2013

"भारतीय साहित्य की प्रवृत्तियाँ" : प्रश्न डॉ. ऋषभ के, उत्तर डॉ. देवराज के

1 अप्रैल 2013, हैदराबाद.
प्रो. देवराज (अधिष्ठाता, अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा) और प्रो. ऋषभ देव शर्मा (हैदराबाद) की फोन वार्ता : प्रश्न डॉ. ऋषभ के, उत्तर डॉ. देवराज के. 
विषय : "भारतीय साहित्य की प्रवृत्तियाँ"