शनिवार, 22 अक्तूबर 2022

डॉ. एम. शेषन को श्रद्धांजलि



डॉ. एम. शेषन को श्रद्धांजलि

खतौली, 22 अक्टूबर, 2022।
आज 'साहित्य मंथन' के तत्वावधान में तमिल भाषी विद्वान और भारतीय हिंदी आंदोलन के समर्थ कार्यकर्ता डॉ. एम. शेषन के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एक आयोजन संपन्न हुआ। इसमें हैदराबाद से पधारे प्रो ऋषभदेव शर्मा ने विस्तार से डॉ. एम. शेषन का परिचय दिया और उनकी हिंदी सेवा के साथ ही तमिल और हिंदी के बारे में जो तुलनात्मक अध्ययन हुआ है, उसके महत्वपूर्ण बिंदुओं की ओर सबका ध्यान खींचा। प्रो. ऋषभ ने इस बात पर बहुत बल दिया कि डॉ. एम. शेषन ने  हिंदी साहित्य में रीतिकाल और तमिल साहित्य की रीति परंपरा के बीच संबंध की जो अवधारणा प्रस्तुत की थी, उस पर गंभीर शोध किए जाने की आवश्यकता है।

 इस अवसर पर डॉ. एम. शेषन के खतौली पधारने की घटना का स्मरण दिलाते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लेखक जसवीर राणा ने यह प्रतिपादित किया कि जब शेषन जी हिंदी सेवी टी. एस. राजु शर्मा और प्रो. एन. सुंदरम म के साथ खतौली पधारे थे, तो उनकी स्पष्टवादिता तथा सहज व्यवहार ने सभी को प्रभावित किया था। उस समय उन्होंने उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच संबंध को हिंदी भाषा तथा साहित्य के सहारे अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया था, इसीलिए शेषन जी उत्तरापथ और दक्षिणापथ के मिलन को महत्व देने वाले राष्ट्रभक्त थे। जसवीर राणा ने उनके निधन को पूरे हिंदी आंदोलन और भारतीय भाषाओं की क्षति माना।

वरिष्ठ कवि-समीक्षक प्रो. देवराज ने इस अवसर पर डॉ. एम. शेषन के साथ अपने बरसों के संबंध को याद किया और यह कहा कि भारतीय साहित्य और हिंदी भाषा को मजबूत बनाने के लिए तथा सभी भारतीय भाषाओं की समृद्धि के लिए डॉ. एम. शेषन ने जो तुलनात्मक अध्ययन किया तथा अपने लेखन के माध्यम से हिंदी और तमिल के पाठकों को इन दोनों भाषाओं के साहित्य का जो ज्ञान दिया, वह कभी नहीं भुलाया जा सकता।

साहित्य मंथन के इस आयोजन में यह भी याद किया गया कि डॉ. एम. शेषन को हिंदी भाषा के प्रति रुचि तो अपने प्रारंभिक दिनों से ही हो गई थी, लेकिन उसका गहरा ज्ञान उन्होंने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी और डॉ. शिव प्रसाद सिंह के संपर्क में आकर अर्जित किया। आचार्य द्विवेदी ने अपने इस महान शिष्य को संस्कृति की ज़मीन से जोड़ने का जो कार्य किया था और भारतीयता को समझने की जो योग्यता दी थी, उसका शेषन जी ने सफल प्रयोग भारत की राष्ट्रीय चेतना को समृद्ध बनाने में किया। श्रद्धांजलि सभा के अंत में 2 मिनट का मौन रखकर शेषन जी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। 000

प्रेषक- 
जसवीर राणा
अध्यक्ष, साहित्य मंथन, खतौली।

https://sahityakunj.net/news/dr-sheshan-ko-shraddhanjali


शुक्रवार, 23 सितंबर 2022

"धूप के अक्षर" (ऋषभदेव शर्मा अभिनंदन ग्रंथ) : लेखक सूची



"धूप के अक्षर" 

(ऋषभदेव शर्मा अभिनंदन ग्रंथ)

000

दो भागों (कुल 6 खंड) में प्रकाशित इस ग्रंथ में सम्मिलित लेखकगण- 

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खंड 1: चिंतन के आयाम : 

सारे अक्षर सूर्यमुखी हो जाएँ-

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डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा 

डॉ. अनीता शुक्ल 

प्रो. प्रतिभा मुदलियार 

डॉ. चंदन कुमारी 

डॉ. डॉली 

श्रीमती शीला बालाजी 

डॉ. मंजु शर्मा  

प्रो. संजय एल. मादार 

डॉ. विजेंद्र प्रताप सिंह 

डॉ. अनुपमा तिवारी 

श्री हुडगे नीरज 

श्रीमती शशि राय  

डॉ. सुषमा देवी 


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खंड 2: काव्य कृतित्व : 

रोशनी का इक दुशाला लाइए-

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डॉ. कैलाश चंद्र भाटिया 

डॉ. प्रेमचंद्र जैन 

श्री चंद्रमौलेश्वर प्रसाद 

प्रो. एस. ए. सूर्यनारायण वर्मा 

प्रो. देवराज (2) 

प्रो.दिलीप सिंह 

डॉ. कविता वाचक्नवी 

डॉ. रामजी सिंह 'उदयन'

डॉ. प्रमीला के. पी.

डॉ. एन. लक्ष्मी 'प्रिया' 


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खंड 3: आलोचना दृष्टि : 

रोशनदान ज़रूरी है -

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डॉ. बालशौरि रेड्डी 

प्रो. एम. वेंकटेश्वर (2) 

प्रो. देवराज (4) 

प्रो. जगमल सिंह

प्रो. गोपाल शर्मा 

डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा (2) 

डॉ. बी. बालाजी 

डॉ. परमान सिंह 

श्री प्रवीण प्रणव 


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खंड 4: संपादकीय विवेक : 

हम प्रकाश के प्रहरी -

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डॉ. योगेंद्रनाथ मिश्र 

प्रो. निर्मला एस. मौर्य 

प्रो.गोपाल शर्मा 

डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा 

डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ 

डॉ. चंदन कुमारी 

श्री प्रवीण प्रणव (2) 


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खंड 5: व्यक्तित्व : 

दिशाओं को लीपती श्वेत हँसी -

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प्रो. देवराज 

कु. समीक्षा शर्मा 

डॉ. अंतरिक्ष सैनी 

श्री पवन कुमार 'पवन' 

श्री जसवीर राणा 

डॉ. दिनेश प्रताप तोमर 

डॉ. अहिल्या मिश्र 

डॉ. करन सिंह ऊटवाल 

प्रो. पी. राधिका 

श्रीमती पवित्रा अग्रवाल 

डॉ. वर्षा सोलंकी 

डॉ. रामनिवास साहू 

डॉ. रेखा अग्रवाल 

श्री संजीव कुमार 

डॉ. सैयद मासूम रज़ा 

श्री अमन कुमार त्यागी 

श्री चंद्रप्रताप सिंह 

श्री लक्ष्मी नारायण अग्रवाल 

डॉ. गिरिजा रानी खन्ना   

डॉ. विनीता कृष्णा 

डॉ. सुपर्णा मुखर्जी 

डॉ. शिवकुमार राजौरिया 

डॉ. आशा मिश्रा 'मुक्ता' 

डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा 


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खंड 6: मूल्यांकन: 

उपजे बीज अनेक, बाली गेहूँ की-

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श्री प्रवीण प्रणव 

श्री अवधेश कुमार सिन्हा 

डॉ. राकेश कुमार शर्मा 

श्री ज्ञानचंद मर्मज्ञ 

डॉ. चंदन कुमारी 

डॉ. बी. बालाजी 

डॉ. संगीता शर्मा 

प्रो. गोपाल शर्मा 


🙏🌹🙏


प्रधान संपादक- 

डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा 


संपादक मंडल- 

डॉ. राकेश कुमार शर्मा  

डॉ. बी. बालाजी 

डॉ. चंदन कुमारी 

डॉ. मंजु शर्मा 

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अनंग प्रकाशन, दिल्ली-110053.

मो. 9350563707, 9540176542.

रविवार, 17 जुलाई 2022

"नई शिक्षा नीति 2020 और भारतीय भाषाएँ" विषयक द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

"नई शिक्षा नीति 2020 और भारतीय भाषाएँ" विषयक द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न


केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा (उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) एवं अहमदनगर जिला मराठा विद्या प्रसारक समाज के न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस महाविद्यालय, शेवगांव, अहमदनगर (महाराष्ट्र) के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में "नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और भारतीय भाषाएँ" विषय पर द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन दिनांक 15 तथा 16 जुलाई, 2022 को शेवगाँव स्थित महाविद्यालय के सभागार में किया गया।


इस संगोष्ठी को कुल 5 सत्रों में विभाजित किया गया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में प्रमुख उद्घाटक के रूप में प्रोफेसर कुलदीप चंद अग्निहोत्री (पूर्व कुलपति, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला) उपस्थित रहे। प्रो. अग्निहोत्री ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वागत करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को बदलने का कार्य इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से हो रहा है।


प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय हिंदी संस्थान (आगरा) की निदेशक प्रो. बीना शर्मा ने अपने मंतव्य में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का महत्व प्रतिपादित किया। बीज-भाषक के रूप में उपस्थितं प्रो. सदानंद भोसले (पुणे) ने भारतीय भाषाओं में शिक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए भारतीय भाषाओं की गौरवशाली परंपरा का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि इस नीति के केंद्र में स्वराज्य की संकल्पना निहित है तथा इसका लक्ष्य छात्रों को विश्व मानव बनाना है।


एडवोकेट वसंतराव कापरे (सदस्य, गवर्निंग काउंसिल, अहमदनगर जिला मराठा विद्या प्रसारक समाज, अहमदनगर) उद्घाटन समारोह के अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे एवं नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के महत्व पर अपने अभिभाषण के माध्यम से प्रकाश डाला। 


संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. पुरुषोत्तम कुंदे द्वारा लिखित पुस्तक "काल से होड़ लेते कवि शमशेर और ग्रेस" का विमोचन उपस्थित अतिथियों के कर कमलों से हुआ।


संगोष्ठी के प्रथम सत्र "नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का स्वरूप" में प्रमुख वक्ता के रूप में प्रो. सुनील डहाले, (वैजपुर महाराष्ट्र) उपस्थित रहे तथा उन्होंने नई शिक्षा नीति का स्वरूप विस्तार से स्पष्ट किया। इस सत्र के अध्यक्ष के रूप में डॉ. सजीत शशि (वरकला, केरल) उपस्थित रहे। संगोष्ठी के द्वितीय सत्र "भारतीय भाषाओं में रोजगार के अवसर" में प्रमुख वक्ता के रूप में डॉ. मोहनन (कन्नूर, केरल) उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने भाषण के माध्यम से भारतीय भाषाओं में रोजगार के अवसर विषय पर विशेष मार्गदर्शन किया।   तृतीय सत्र "जनसंचार माध्यम और भारतीय भाषाएँ" के प्रमुख वक्ता डॉ ज्योतिमय बाग (चितरंजन, पश्चिम बंगाल) ने अनुवाद, डॉक्यूमेंट्री एवं भारतीय भाषाएँ विषय पर मार्गदर्शन किया। सत्र के अध्यक्ष डॉ शैलेश कदम (वर्धा, महाराष्ट्र) ने जनसंचार माध्यम और भारतीय भाषाएँ विषय पर मार्गदर्शन किया। चतुर्थ सत्र "नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय लोक भाषाएँ एवं बोलियाँ" के प्रमुख वक्ता डॉ. राकेश कुमार सिंह (दिल्ली) ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय लोक भाषाएँ एवं बोलियाँ विषय पर विस्तृत मार्गदर्शन किया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. कृष्ण कुमार कौशिक (दिल्ली) ने की। पंचम सत्र "नई शिक्षा नीति और भारतीय भाषाओं का भविष्य" के ‌प्रमुख वक्ता  डॉ. बालासाहेब सोनवने (पुणे, महाराष्ट्र) रहे तथा सत्र के अध्यक्ष के रूप में प्रो. जे. एस. मोरे (कोपरगांव, महाराष्ट्र) ने नई शिक्षा नीति और भारतीय भाषाओं का भविष्य विषय पर मार्गदर्शन किया।


संगोष्ठी के समापन सत्र में प्रमुख अतिथि के रूप में डॉ  गंगाधर वानोडे (क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र) ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वागत करते हुए भारतीय भाषाओं का महत्व प्रतिपादित किया। उन्होंने केंद्रीय हिंदी संस्थान की सभी योजनाओं से रू-ब-रू कराया‌। 


विशिष्ट अतिथि प्रो. ऋषभदेव शर्मा (पूर्व आचार्य, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद) ने मानव मूल्यों के लिहाज से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की विवेचना की। उन्होंने अपने मंतव्य में भारतीय संस्कृति की जड़ें मजबूत करने के लिए नई शिक्षा नीति कितनी उपयुक्त है, इसे भी स्पष्ट किया। प्रो. शर्मा ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनेक सकारात्मक पहलुओं को उजागर करते हुए यह भी कहा कि इसके कार्यान्वयन की जिम्मेदारी अध्यापकों की है। उन्होंने कहा कि भाषा विभिन्न व्यक्तियों और समुदायों के बीच प्रेम और सौहार्द को बढ़ाती है तथा हमारी कोशिश भी यही होनी चाहिए। 


समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. पुरुषोत्तम कुंदे ने की। संगोष्ठी का मंच संचालन सुश्री आशा वडणे ने किया।


संगोष्ठी के विभिन्न स्तरों में चर्चा-परिचर्चा में विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से पधारे अध्यापक, आलेख वाचक तथा शोधार्थी छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। 000


प्रेषक-

डॉ. गोकुल क्षीरसागर

हिंदी विभागाध्यक्ष

न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस महाविद्यालय, शेवगांव, अहमदनगर (महाराष्ट्र)




बुधवार, 13 जुलाई 2022

प्रो. ऋषभदेव शर्मा की तपस्या का फल है 'धूप के अक्षर'






हैदराबाद।

प्रो. ऋषभदेव शर्मा की तपस्या का फल है 'धूप के अक्षर'

हैदराबाद।


भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री और प्रसिद्ध लेखक डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, खैरताबाद, हैदराबाद के सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह में 'धूप के अक्षर' का लोकार्पण करते हुए कहा कि यह ग्रंथ प्रो. ऋषभदेव शर्मा की जीवन भर की तपस्या का फल है। उनकी इस तपस्या को दक्षिण भारत ने हृदय से स्वीकार किया है जिसके दर्शन उनके अभिनंदन समारोह में हो रहे हैं। वे डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा के प्रधान संपादकत्व में दो खंडों में प्रकाशित प्रो. ऋषभदेव शर्मा के सम्मान में लोकार्पित किए जाने वाले आयोजन में बोल रहे थे।

डॉ. निशंक ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारतवर्ष को विश्वगुरु के पथ पर पुनः प्रतिष्ठित करने के लिए तेलुगु, तमिल, कन्नड, मलयालम, बंगला, मराठी, पंजाबी, असमी आदि सभी भाषाओं को सम्मिलित भूमिका निभानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रो. ऋषभदेव शर्मा हिंदी के माध्यम से सारी भारतीय भाषाओं के लिए कार्य कर रहे हैं। यह कार्य हैदराबाद में हो रहा है जिस पर हम गर्व कर सकते हैं।


अभिनंदन समारोह का उद्घाटन शीर्षस्थ भारतीय लेखक प्रो. एन. गोपि ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रो. शर्मा एक आदर्श अध्यापक और प्रख्यात लेखक ही नहीं है, बल्कि वे एक उत्तम मनुष्य भी हैं। दक्षिण में उनका आना भाषा और साहित्य के लिए एक वरदान जैसा है।


प्रो. ऋषभदेव शर्मा के अभिनंदन समारोह की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व अधिष्ठाता प्रो.देवराज ने कहा हर एक को चारों दिशाओं की संस्कृति को आत्मसात करना होगा। साहित्य और संस्कृति में ही देश को जोड़ने की शक्ति निहित है। संस्कृति और साहित्य केवल पाखंड नहीं हैं। ये सबसे पहले व्यक्ति के भीतर जिज्ञासा जगाते हैं। सवाल करना असिखाते हैं और फिर उनका समाधान ढूँढ़ने की जज्बा पैदा करते हैं। हर तरह से व्यक्ति को प्रशिक्षित करते हैं।

अतिविशिष्ट अतिथि रूप में डॉ. पुष्पा खंडूरी (देहारदून) के साथ प्रो. गोपाल शर्मा, जसवीर राणा, डॉ. अहिल्या मिश्र, डॉ. वर्षा सोलंकी, डॉ. राकेश कुमार शर्मा, पी. ओबय्या, जी. सेल्वराजन, एस. श्रीधर, प्रो. संजय एल मादार आदि मौजूद थे।

सभी वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने हैदराबाद, चेन्नै और एरणाकुलम आदि में रहते हुए जो कार्य किया उसका भाषायी और साहित्यिक महत्व ही नहीं है बल्कि सांस्कृतिक महत्व भी है। उनका कार्य दक्षिणापथ और उत्तरापथ के मध्य संस्कृति सेतु का कार्य है।

आयोजन का संचालन 'धूप के अक्षर' ग्रंथ की प्रधान संपादक डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा ने किया। समारोह के प्रारंभ में कलापूर्ण सस्वर सरस्वती वंदना शुभ्रा मोहंता ने प्रस्तुत की। 'धूप के अक्षर' ग्रंथ के सहयोगी लेखकों को यह ग्रंथ भेंट भी किया गया।

इस समारोह में हैदराबाद के साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। पद्मश्री एडलप्पली वेंकटेश्वर राव, विनीता शर्मा, वेणुगोपाल भट्टड, अजित गुप्ता, लक्ष्मीनारायण अग्रवाल, पवित्रा अग्रवाल, रामदास कृष्ण कामत, सुरेश गुगालिया, जी. परमेश्वर, डॉ. श्रीपूनम जोधपुरी, डॉ. जयप्रकाश नागला, डॉ. रियाजुल अंसारी, डॉ. बी. एल. मीणा, मुकुल जोशी, डॉ. शिवकुमार राजौरिया, रवि वैद, डॉ. एस. राधा, सरिता सुराणा, वर्षा कुमारी, हुडगे नीरज, रूपा प्रभु, उत्तम प्रसाद, नीलम सिंह, नेक परवीन, संदीप कुमार, मुकुल जोशी, डॉ. कोकिला, एफ. एम. सलीम, डॉ. के. श्रीवल्ली, डॉ. बी. बालाजी, डॉ. करन सिंह ऊटवाल, वुल्ली कृष्णा राव, ए. जानकी, किशोर बाबु, रमाकांत, राधाकृष्ण मिरियाला, शीला बालाजी, समीक्षा शर्मा, डॉ. सुषमा देवी, सुनीता लुल्ला, प्रवीण प्रणव,, डॉ. गंगाधर वानोडे, डॉ. सी. एन. मुगुटकर, डॉ. रामा द्विवेदी, डॉ. संगीता शर्मा, प्रो. दुर्गेशनंदिनी, डॉ. रेखा शर्मा, चवाकुल रामकृष्णा राव, एम. सूर्यनरायन, नागराज, प्रवीण, केशवलु, जे. रामकृष्ण, मुरली, एम. शिवकुमार, नृपुतंगा सी. के., डॉ. के. चारुलता, जी, एकांबरेश्वरुडु, शैलेषा नंदूरकर, जाकिया परवीन, शेक जुबर अहमद, डॉ. गौसिया सुलताना, विकास कुमार आजाद, पल्लवी कुमारी, निशा देवी, डॉ. पठान रहीम खान, के. राजन्ना, डॉ. एस. तुलसीदेवी, डॉ. रजनी धारी, गीतिका कुम्मूरी, डॉ. गोरखनाथ तिवारी, डॉ. साहिरा बानू बी. बोरगल, डॉ. बिष्णु कुमार राय, डॉ. शक्ति कुमार द्विवेदी, डॉ. ए. जी. श्रीराम, हरदा राजेश कुमार, डॉ. संतोष विजय मुनेश्वर, काज़िम अहमद, अनिल लोखंडे और अनेक लोग अंडमान, दिल्ली, वर्धा, खतौली, नांदेड, कर्नाटक, चेन्नै, अहमदाबाद, बनारस से भी पधारे थे।






सोमवार, 27 जून 2022

ऋषभदेव शर्मा अभिनंदन ग्रंथ - "धूप के अक्षर" : सम्मिलित लेखक/ लेख





ऋषभदेव शर्मा अभिनंदन ग्रंथ - "धूप के अक्षर" 

 सम्मिलित लेखक/ लेख 

संख्या

लेखक

भाग

शीर्षक

1.       

योगेंद्रनाथ शर्मा अरुण

1,2

आशीर्वचन

2.       

  दिलीप सिंह

1,2

·        शुभाशंसा

·        धूप ने कविता लिखी है, गुनगुनाने के लिए

3.       

 गुर्रमकोंडा नीरजा 

1, 2

·        संपादकीय

·        संघर्ष और जिजीविषा की बुलंद आवाज

·        तेलुगु साहित्य से प्रेम का प्रतीक

·        साहित्य, संस्कृति और भाषा का मूल त्रिकोण

·        देश दुनिया के ‘सवाल’ और पत्रकारिता के ‘सरोकार’

·        सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय

4.       

 अनीता शुक्ला

1, 2

तेवरी काव्यांदोलन के पुरोधा

5.       

 प्रतिभा मुदलियार

1

मुझे पंख दोगे?

6.       

 डॉली

1

स्त्री प्रश्न: सशक्तीकरण से मानवाधिकार तक

7.       

 शीला बालाजी

1

स्त्री और बच्चे : मानवाधिकार चेतना

8.       

 बी. बालाजी

1

·        अनुवाद अध्ययन : संस्कृति सेतु का निर्माण

·        कविता के समुद्र में लोक का आकाश

9.       

 मंजु शर्मा

1

लोकतांत्रिक चेतना और सजग नागरिकता

10.    

 समीक्षा शर्मा

2

प्यार से भरी पवित्र आत्मा

11.    

 संजय एल. मादार

1

किसान प्रश्न : पीड़ा से राजनीति तक

12.    

 विजेंद्र प्रताप सिंह

1

इतनी सारी मौत, आदमी अकेला

13.    

 अनुपमा तिवारी

1

विमर्शों का नया आयाम

14.    

 हुड़गे नीरज

1

हेलो मनुष्य! हरित विमर्श 

15.    

 शशि राय

1

अमृत फल उगाने वाला कवि

16.    

 सुषमा देवी

1

सूझहिं राम चरित मनि मानिक

17.    

 प्रेमचंद्र जैन

1

‘तरकश’ के तीर

18.    

 कविता वाचक्नवी

1

समकाल की सनद 

19.    

 चंद्रमौलेश्वर प्रसाद

1

सत्य की लेकर लुकाठी वह खड़ा बाजार में

20.    

एसए सूर्यनारायण वर्मा

1

कर्मेषणा एवं दुर्लभ संवेदनशीलता की कविता

21.    

 कैलाशचंद्र भाटिया

1

जन-सम्मुखी कविता के तेवर

22.    

 रामजी सिंह ‘उदयन’

1

एक विद्रोह की मंगल-भूमि

23.    

 प्रमीला के. पी.

1

एक कवि है यहाँ - स्त्रीपक्षीय

24.    

 देवराज

1 , 2

·       कविता के लिए

·       कल धमाके में मरा जो, कौन था

·       कविता में मनुष्यता की स्वतंत्रता की परख

·       समकाल में कविता

·       हिंदी भाषा और उसके समाज की परख

·       विश्लेषक और रचनाकार का संश्लेष 

·       जीवन धारा बहे निरंतर

25.    

 एन. लक्ष्मी प्रिया 

1

धूप ने कविता लिखी है : एक विश्लेषण

26.    

 जगमल सिंह

1

दो दशकों की काव्य यात्रा

27.    

 गोपाल शर्मा

1, 2

·        सरसता, एकता और बंधुता के लिए भारतीय साहित्य

·        शब्दहीन का बेमिसाल सफर

·        हिंदी में वैश्विक

28.    

 एम. वेंकटेश्वर

1

·     हिंदी भाषा : इतिहास और अनुप्रयोग

·     कथा-साहित्य के प्रति विशेष शोधपरख दृष्टि 

29.    

 परमान सिंह

1

हिंदी भाषा की विकास यात्रा : विविध सोपान

30.    

 प्रवीण प्रणव

1, 2 

·        हम हैं बिलोकना चाहते जिस तरु को फूला-फला 

·        तू न समझेगा सियासत, अब टू नादान है

·        आज की रात बचेंगे, तो सहर देखेंगे

·        दीवानों की बस्ती में उम्मीदों का रोशनदान  

31.    

 योगेंद्रनाथ मिश्र

1

एक रिश्ता : मिठास और परेशानी का

32.    

 निर्मला एस. मौर्य

1, 2  

·       संपादकीय टिप्पणियों में सच से वार्तालाप

·       सहज अनुभूति का सौंदर्य

33.    

 वेदप्रकाश अमिताभ

1

समकालीन चुनौतियों और विडंबना से मुठभेड़

34.    

 चंदन कुमारी

1, 2

·     नहीं, मैं गुड़िया नहीं

·     पत्रकारिता के लोकतांत्रिक सरोकार

·     गँवई मन का कवि 

35.    

 संजीव कुमार

2

एक भेंट जो गंतव्य तक ले गई

36.    

 अंतरिक्ष सैनी

2

जीवन संघर्ष का राज़दार यार

37.    

 पवन कुमार ‘पवन’

2

कविताओं को जिया भी है

38.    

 जसवीर राणा

2

धूप के विकिरण से पिंडुरियों के धोवन तक 

39.    

 दिनेश प्रताप तोमर

2

यारों के यार

40.    

 अहिल्या मिश्र

2

शाश्वत क्षणों के हस्ताक्षर 

41.    

 आशा मिश्रा ‘मुक्ता’

2

आशावादिता के आधार-स्तंभ

42.    

 करन सिंह ऊटवाल

2

लघु गुरु

43.    

 पी. राधिका

2

सूरज में चंद्रमा की शीतलता

44.    

 वर्षा सोलंकी

2

मानवीय संवेदनाओं की ईश्वरी वरदान

45.    

 रामनिवास साहू

2

हिंदी का पारस मणि दक्षिण भारत में

46.    

 रेखा अग्रवाल

2

स्नेह और प्रेरणा के स्रोत

47.    

 सैयद मासूम रज़ा

2

जीवन को सिंचित करता अमृत कलश

48.    

 अमन कुमार त्यागी

2

नैतिकता, इंसानियत और सादगी

49.    

 चंद्रप्रताप सिंह

2

बंदउँ गुरु पद पदुम परागा 

50.    

 पवित्रा अग्रवाल

2

खुशबू नेचुरल विद्वत्ता की

51.    

लक्ष्मी नारायण अग्रवाल

2

गुरु-शिष्य परंपरा के आदर्श

52.    

 गिरिजा रानी खन्ना

2

सौभाग्य की बात

53.    

 विनीता कृष्णा

2

गुरु कुम्हार शिष्य कुंभ है 

54.    

 सुपर्णा मुखर्जी

2

चातक की तृष्णा : रोहिणी का जल

55.    

शिवकुमार राजौरिया

2

बिल्कुल कछुए की तरह

56.    

 अवधेश कुमार सिन्हा  

2

काव्य में मिथक : प्रयोग की प्रासंगिकता

57.    

 राकेश कुमार शर्मा

 2

वैचारिक प्रगल्भता और संघर्षप्रियता

58.    

 ज्ञानचंद मर्मज्ञ

2

युग चेतना के वशिष्ठ

59.    

  संगीता शर्मा      

2

असंतोष और आक्रोश से विद्रोह और क्रांति तक

60.    

बालशौरि रेड्डी

1

दो दशकों की कविता स्रवंती का अवगाहन