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मंगलवार, 21 दिसंबर 2021

गुर्रमकोंडा नीरजा की पुस्तक ‘समकालीन साहित्य विमर्श’ लोकार्पित


लोकार्पित कृति को स्वीकार करते हुए प्रो.ऋषभदेव शर्मा 


हैदराबाद; 21 दिसंबर, 2021।

साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ‘साहित्य मंथन’ और दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना के संयुक्त कार्यक्रम में गुर्रमकोंडा नीरजा की पुस्तक ‘समकालीन साहित्य विमर्श’ का लोकार्पण संपन्न हुआ।

प्रो. गोपाल शर्मा 

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अरबा मींच विश्वविद्यालय के पूर्व अंग्रेजी प्रोफेसर डॉ.गोपाल शर्मा ने कहा कि यह उन विमर्शों का युग है जिनको अब तक विमर्श के बाहर रखा जाता रहा और यह पुस्तक उन विमर्शों का सोदाहरण प्रस्तुतीकरण है। पुस्तक में संकलित 24 आलेखों में सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषिक मुद्दों को रेखांकित किया जा सकता है।
प्रो. शुभदा वांजपे 

लोकार्पण वक्तव्य में मुख्य अतिथि उस्मानिया विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर डॉ. शुभदा वांजपे ने कहा कि आज स्त्री और दलित विमर्श पर अधिकांश रूप से प्रकाश डाला जा रहा है, किंतु लोकार्पित पुस्तक ‘समकालीन साहित्य विमर्श’ में इन दो विमर्शों के अतिरिक्त हरित, किन्नर, आदिवासी, विस्थापन आदि पर भी गंभीर विमर्श किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि 'समकालीन साहित्यकार गति-अवरोधक मूल्यों के प्रति सदैव विद्रोही और अपनी रचनाओं में नवीन विचारों की स्थापना कर चेतना भरने वाले रहे हैं। उनकी रचनाएँ नवीन विषय वस्तु और शैलीय भंगिमा की दृष्टि से अभिनव हैं। उनके प्रयोगात्मक वैशिष्ट्य तथा आधुनिक वैचारिक दृष्टि को अभिव्यंजित करने में यह पुस्तक पूरी तरह सफल हुई है।'

श्री प्रवीण प्रणव 
मुख्य वक्ता माइक्रोसॉफ्ट के प्रोग्राम मैनेजमेंट निदेशक प्रवीण प्रणव ने कहा कि इस पुस्तक में पाँच खंडों में सम्मिलित 24 आलेखों में विभिन्न विमर्शों को पुल के अलग-अलग भागों की तरह एक साथ लाकर इस तरह जोड़ा गया है कि अपने स्वरूप में वे पूर्णता को प्राप्त कर लें। ये सभी लेख अलग-अलग समय में लिखे गए हैं इसलिए इनकी अपनी अलग पहचान तो है ही, लेकिन इस किताब में संकलित हो जाने और इन्हें एक साथ पढ़ने से पाठक इन लेखों के ‘तेरहवें स्वाद’ से भी परिचित हो सकेंगे।

प्रो. ऋषभदेव शर्मा 
लोकार्पित पुस्तक की प्रथम प्रति स्वीकार करते हुए प्रतिष्ठित साहित्यकार प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने कहा कि इस पुस्तक में बोलने और लिखने की भाषा के द्वैध को मिटाने का प्रयास किया गया है तथा अधिकतर आलेखों में विविध विमर्शों की भाषा पर अलग-अलग ढंग से प्रकाश डाला गया है; और यह पहचानने की कोशिश की गई है कि अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले रचनाकार किस तरह से हिंदी भाषा के दायरे को कितना विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विमर्शीय लेखन ने साहित्य की भाषा को जनता की भाषा के अधिकाधिक नज़दीक लाने का काम किया है।

प्रो. करन सिंह ऊटवाल 


विशेष अतिथि मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. करन सिंह ऊटवाल ने कहा कि कहने का अंदाज अलग अलग भले ही होता है, लेकिन साहित्य हर काल में समाज सापेक्ष रहा है। अवसर पर साहित्य मंथन की ओर से प्रोफेसर ऊटवाल का अभिनंदन किया गया।

आरंभ में अतिथियों ने दीप-प्रज्वलन किया और शिक्षा महाविद्यालय की प्राध्यापक शैलेषा नंदूरकर ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। संचालन और धन्यवाद ज्ञापन की जिम्मेदारी मिश्र धातु निगम के हिंदी अनुभाग एवं निगम संचार उपनिदेशक डॉ. बी. बालाजी ने निभाई।


इस अवसर पर दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना, हैदराबाद द्वारा निरंतर 66 वर्षों से प्रकाशित द्विभाषा (हिंदी-तेलुगु) मासिक 'स्रवंति' (नवंबर 2021) के अंक का लोकार्पण करते हुए प्रो. गोपाल शर्मा ने कहा कि यह पत्रिका शोध की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।  

इस अवसर पर वीरेंद्र कुमार, सुरेश राचपूड़ी, डॉ. रियाजुल अंसारी, डॉ. साहिराबानू बी. बोरगल, डॉ. बलविंदर कौर, डॉ. गोरखनाथ तिवारी, डॉ. शक्ति कुमार द्विवेदी, डॉ. सी. एन. मुगुटकर, डॉ. ए. जी. श्रीराम, खादर अली खान, जकिया परवीन, डॉ. डी. डी. देसाई, एकांबरेश्वरुडु, जुबेर अहमद, डॉ. शंकर सिंह ठाकुर, के. राजन्ना, जी. परमेश्वर, डॉ. सुपर्णा मुखर्जी, जी. संगीता, डॉ. सीमा मिश्रा, अशोक तिवारी, डॉ. श्याम सुंदर, अब्दुल हमीद खान, हुड़गे नीरज, रूपा प्रभु, फिज़ा बानू, पार्वती देशपांडे, डॉ. संतोष विजय मुनेश्वर, वी. कृष्णा राव, लोहित्या, श्रीसाहिती, राधाकृष्ण मिरियाला, किशोर बाबू, रमाकांत, नेक परवीन, जी. शिरीष बाबू, डॉ. राजेंद्र, संजय, शारदा आदि साहित्य प्रेमियों, विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, छात्रों और शोधार्थियों ने उपस्थित होकर लेखिका को शुभकामनाएँ दीं। संकल्य, हिंदी अकादमी, साहित्य मंथन और हिंदी हैं हम विश्व मैत्री मंच ने लेखिका का सारस्वत सम्मान किया। 000




मंगलवार, 14 दिसंबर 2021

अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति का 15 वां राष्ट्रीय अधिवेशन एवं कर्नाटक साहित्य महोत्सव 26 को बेंगलुरु में


अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति (नई दिल्ली) का तीन-दिवसीय पंद्रहवां राष्ट्रीय अधिवेशन एवं कर्नाटक साहित्य महोत्सव आगामी 26 से 28 दिसंबर को बेंगलुरु में आयोजित किया जा रहा है। उद्घाटन 26 दिसंबर, रविवार, को शाम 4 बजे द वर्ल्ड कल्चर सेंटर, बसवनगुडी, बेंगलुरु में संपन्न होगा। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अधिवेशन की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं पत्रकार प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव (दिल्ली) करेंगे तथा इस राष्ट्रीय अधिवेशन के संयोजक बेंगलुरु के प्रतिष्ठित साहित्यकार ज्ञान चंद मर्मज्ञ हैं, जिनके कुशल मार्गदर्शन में अधिवेशन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

अधिवेशन में देश के विभिन्न प्रांतों के प्रतिष्ठित साहित्यकार और पत्रकार सम्मिलित हो रहे हैं, जिन्हें इस अवसर पर उनके उल्लेखनीय रचनात्मक योगदान हेतु अलंकृत किया जाएगा। इसके अलावा पुस्तक प्रदर्शनी और पुस्तक लोकार्पण के साथ ही “राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी और कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा। याद रहे कि अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति देश-विदेश के दस हज़ार बहुभाषी लेखकोंवाली देश की एक ऐसी गैर-राजनीतिक, अग्रणी वैश्विक साहित्यिक (पंजीकृत) संस्था है, जो राष्ट्रपति भवन में कवि सम्मेलन के अलावा देश के विभिन्न चौदह राज्यों में अपने सफल और सार्थक राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित कर चुकी है। इन विभिन्न राष्ट्रीय अधिवेशनों में पद्मश्री टी.एन. चतुर्वेदी (राज्यपाल कर्नाटक), डॉक्टर मृदुला सिन्हा (महामहिम राज्यपाल गोवा), कप्तान सिंह सोलंकी (राज्यपाल पंजाब, हरियाणा), पद्मभूषण डॉक्टर विन्देश्वर पाठक (संस्थापक: सुलभ सेनेटरी ओर्गेनाइजेशन), लब्ध-प्रतिष्ठ साहित्यकार एवं राजनेता डॉक्टर कर्ण सिंह एवं सुप्रसिद्ध गीतकार पद्मभूषण डॉक्टर गोपाल दास नीरज जैसी अनेक विशिष्ट विभूतियाँ शिरकत कर चुकी हैं। अनेक विश्वविद्यालयों के कुलपति, राजदूत और गृहसचिव भी इसके साथ संबद्ध रहे हैं।

अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के इस पंद्रहवें राष्ट्रीय अधिवेशन में जो साहित्यकार सम्मिलित हो रहे हैं उनमें सर्वश्री सुरेश चौधरी (कोलकाता), ऋचा सिन्हा (मुंबई), रामवरण ओझा (ग्वालियर),पंडित सुरेश नीरव (ग़ाज़ियाबाद),मधु मिश्रा (ग़ाज़ियाबाद), अरुण कुमार पासवान (दिल्ली), विमल बहुगुणा (श्रीनगर), नीरज नैथानी (रुड़की), सविता चड्ढा (दिल्ली), डॉक्टर कल्पना पांडेय (नोएडा), डॉक्टर सविता तिवारी उपाध्याय (गुरुग्राम), डॉक्टर मधु चतुर्वेदी (गजरौला),डॉक्टर वीणा मित्तल (ग़ाज़ियाबाद), धीरेन्द्र रांगड (ऋषिकेश), यशपाल सिंह यश (गुरुग्राम), माधुरी नैथानी (श्रीनगर), शिवनरेश पांडेय, (नोएडा),अनीता पांडेय (नोएडा), डॉक्टर प्रकाश चमोली, मीनाक्षी चमोली (श्रीनगर), आरती पुण्डीर (श्रीनगर), ब्रह्मदेव शर्मा(दिल्ली), सुधा अहलुवालिया तथा दर्शन बेज़ार (बैंगलुरु) प्रमुख हैं।

सोमवार, 15 मार्च 2021

'राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में हिंदी की विकास यात्रा' पर एकदिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन


हैदराबाद, 14 मार्च, 2021 (प्रेस विज्ञप्ति).

डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा 'अरुण'
प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय 

                    यहाँ जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना के सचिव श्री जी. सेल्वराजन ने यह स्पष्ट किया कि 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में हिंदी की विकास यात्रा' विषयक एकदिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन केंद्रीय हिंदी निदेशालय, शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली और दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 16 मार्च, 2021 को खैरताबाद स्थित सभा परिसर में संपन्न होगा।  इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक एवं श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पांडेय जी करेंगे और मुख्य अतिथि हैं रुड़की के प्रख्यात साहित्यकार और भारतविद्या के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रो. योगेंद्र नाथ शर्मा 'अरुण'  जी। विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, हैदराबाद के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष प्रो. ऋषभदेव शर्मा, नई दिल्ली के प्रख्यात हिंदी विद्वान डॉ. बेचैन कंडियाल, प्रो. गोपाल शर्मा और केंद्रीय हिंदी निदेशालय के उपनिदेशक तथा 'भाषा' पत्रिका के संपादक डॉ. राकेश कुमार शर्मा उपस्थित रहेंगे। संयोजक ने नगरद्वय के हिंदी प्रेमियों को इस सारस्वत आयोजन में भाग लेने का आग्रह किया है.

डॉ. बेचैन कंडियाल 
डॉ. राकेश कुमार शर्मा 
 



- कार्यक्रम संयोजक
जी. सेल्वराजन
सचिव एवं संपर्क अधिकारी
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा - आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना
खैरताबाद, हैदराबाद - 500004

शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

सृजनलोक अंतरराष्ट्रीय साहित्योत्सव संपन्न

हैदराबाद, 20 सितंबर, 2019। 
डॉ. संगीता शर्मा की पुस्तक का लोकार्पण करते हुए सुप्रसिद्ध कथाकार चित्रा मुद्गल।
विशेष अतिथि डॉ. ऋषभदेव शर्मा को सम्मानित करते हुए 
कुलपति डॉ. संदीप संचेती, मुख्य अतिथि चित्रा मुद्गल 
और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिविक रमेश।
एस आर एम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलोजी, चेन्नै तथा सृजनलोक प्रकाशन समूह के संयुक्त तत्वावधान में एस आर एम विश्वविद्यालय के चेन्नै स्थित सभागार में ‘हिंदी की विकास यात्रा : विविध आयाम’ विषयक द्विदिवसीय सृजनलोक अंतरराष्ट्रीय साहित्योत्सव संपन्न हुआ। इस समारोह में चित्रा मुद्गल, डॉ. दिविक रमेश, शरद आलोक (नॉर्वे), डॉ. सत्यनारायण मुंडा, डॉ. बी.एल.आच्छा, डॉ. पुष्पिता अवस्थी (सूरीनाम), कुसुम भट्ट, रानू मुखर्जी, कंचन शर्मा, डॉ. उषा रानी राव आदि उपस्थित रहे। समारोह का उद्घाटन एस आर एम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संदीप संचेती ने किया। 

दो-दिवसीय सम्मेलन में सृजनलोक के चित्रा मुद्गल विशेषांक सहित आठ पुस्तकों का लोकार्पण भी संपन्न हुआ। अवसर पर हैदराबाद की डॉ. संगीता शर्मा की पुस्तक ‘चित्रा मुद्गल की कहानियों में यथार्थ और कथाभाषा’ का लोकार्पण स्वयं चित्रा मुद्गल के हाथों हुआ। इस अवसर पर देश भर के 9 मौलिक रचनाकारों को ‘सृजनलोक सम्मान’ प्रदान किया गया।


रविवार, 13 जनवरी 2019

डॉ. मंजु शर्मा श्रीनाथद्वारा में सारस्वत सम्मान से अलंकृत


हैदराबाद, 5 जनवरी, 2019. 
चिरेक इंटरनेश्नल स्कूल की हिंदी विभाग अध्यक्ष डॉ. मंजु शर्मा को श्रीनाथद्वारा में आयोजित विशाल सम्मान समारोह में श्रीनाथद्वारा साहित्य मंडल एवं केन्द्रीय हिंदी संस्थान के सयुंक्त तत्वावधान में ‘ललितशंकर दीक्षित स्मृति सम्मान’ से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उन्हें दक्षिण भारत में रहकर हिंदी भाषा और साहित्य की उत्कृष्ट सेवा के लिए विनोद बब्बर और किशोर काबरा जैसे साहित्यकारों की उपस्थिति में डॉ. बीना शर्मा और श्यामजी देवपुरा ने प्रदान किया। सम्मान के अंतर्गत श्रीफल, प्रमाणपत्र, अंगवस्त्र, मेवाती पगड़ी और नकद धनराशि शामिल है | 

कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 7 विचार सत्र संपन्न हुए जिनमें हिंदी भाषा और साहित्य के विविध पक्षों और समस्याओं पर गहन मंथन हुआ। डॉ. मंजु शर्मा ने ‘दक्षिण में हिंदी की स्थिति’ परअपना आलेख प्रस्तुत किया. उन्होंने यह सुझाव दिया कि दक्षिण में हिंदी की स्वीकार्यता को भावनात्मक स्तर पर बढ़ाने के लिए यह आवश्यक है कि हिंदी भाषी प्रान्तों में बच्चों को प्राथमिक स्तर से ही एक दक्षिण भारतीय भाषा की शिक्षा दी जाए। उनके इस प्रस्ताव का उपस्थित विद्वानों ने खुले मन से स्वागत किया। 

तीन दिन के इस समारोह में देशभर से आए हिंदी सेवियों और साहित्यकारों ने भाग लिया जिनमें डॉ. विजय प्रकाश त्रिपाठी (कानपुर), अवधेश शुक्ल (सीतापुर), डॉ सविता चड्ढा(दिल्ली), हेमराज मीणा, कल्पना गवली (बड़ोदरा),अमरेंद्र पत्रकार (लोकसभा चैनल) आदि के नाम प्रमुख हैं। 

[प्रेषक : समीक्षा .manju.samiksha@gmail.com]

रविवार, 2 सितंबर 2018

मारीशस में रामकथा पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियाँ और सम्मान समारोह संपन्न


मुंबई।(प्रेस विज्ञप्ति)। 2 सितंबर,2018।

भारत और मारीशस का संबंध दुनिया के किन्हीं अन्य दो देशों से बिलकुल अलग किस्म का है। मारीशस अपनी पहचान और इतिहास की जड़ें खोजने के लिए भारत की ओर देखता है। हिंदी भाषा और रामकथा के मजबूत धागों से इन दोनों देशों के रिश्ते बुने हुए हैं। मारीशस की नई पीढ़ी को अपने पुरखों की ज़मीन से जोड़े रखने के लिए हमें हिंदी और राम की आज भी ज़रूरत है। 


 ये विचार पिछले दिनों विश्व हिंदी सम्मेलन के संदर्भवश मारीशस गए साहित्यिक-सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई के प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में महात्मा गांधी संस्थान, मारीशस के सुब्रह्मण्य भारती सभागार में वहाँ के हिंदी छात्रों के निमित्त आयोजित एक विशिष्ट परिसंवाद (एन इंटेरेक्टिव सेशन)का उदघाटन करते हुए महात्मा गांधी संस्थान की निदेशक डॉ. विद्योत्तमा कुंजल ने प्रकट किए। छात्रों को संबोधित करने वाले विद्वानों में मारीशस के प्रो. हेमराज सुंदर, प्रो. अलका धनपत और प्रो. प्रीति हरदयाल, रूस के डॉ. रामेश्वर सिंह और नादिया सिंह तथा भारत के प्रो. संतप्रसाद गौतम, प्रो. प्रदीप कुमार सिंह, प्रो. प्रदीप के. शर्मा और प्रो. हरिमोहन के नाम सम्मिलित है। 


दूसरे चरण में हिंदी प्रचारिणी सभा, मारीशस में “वैश्विक राम की कथायात्रा” पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह संपन्न हुआ। अध्यक्षता करते हुए सभा के वर्तमान प्रधान डॉ. यंतु देव बुधु ने मारीशस में हिंदी के इतिहास और हिंदीसेवियों के संघर्ष पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि के रूप में सभा के मंत्री धनराज शंभु और कोषाध्यक्ष टहल रामदीन ने संबोधित किया। विषयविशेषज्ञ के रूप में कुलपति प्रो. एसपी गौतम ने जिज्ञासाओं का समाधान किया। 



अवसर पर मारीशस, रूस और भारत के 50 हिंदी सेवियों को हिंदी प्रचारिणी सभा, मारीशस और साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई की ओर से “अंतरराष्ट्रीय हिंदीसेवी सम्मान” से अलंकृत किया गया तथा विभिन्न विधाओं की 12 पुस्तकें लोकार्पित की गईं। दोनों आयोजनों का संचालन प्रो. ऋषभदेव शर्मा और डॉ. सत्यनारायण ने किया। धन्यवाद प्रो. प्रदीप कुमार सिंह और डॉ. सतीश कनौजिया ने व्यक्त किया। 


प्रेषक- सतीश कनौजिया, 
प्रबंधक, साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, 
उल्हासनगर, मुंबई, भारत 


गुरुवार, 5 जुलाई 2018

'मानव संसाधन विकास के नए आयाम’ पुस्तक लोकार्पित


प्रो. ऋषभ देव शर्मा  द्वारा डॉ. मोहसिन उद्दीन की पुस्तक
 “मानव संसाधन विकास के नए आयाम : भारतीय परिप्रेक्ष्य” का लोकार्पण 
हैदराबाद, 5 जुलाई, 2018। 

काचिगुड़ा स्थित बद्रुका कॉलेज के सभाकक्ष में बुधवार को हिंदी अध्यापकों और लेखकों की संस्था ‘हिंदी हैं हम विश्व मैत्री मंच’ की साहित्यिक सभा आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता प्रो. शकुंतला रेड्डी ने की तथा संयोजन डॉ. रियाजुल अंसारी ने किया। मुख्य अतिथि प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने एनआईआरडी में वरिष्ठ प्रोजेक्ट फ़ैकल्टी के रूप में कार्यरत डॉ. मोहसिन उद्दीन की सद्य:प्रकाशित पुस्तक “मानव संसाधन विकास के नए आयाम : भारतीय परिप्रेक्ष्य” को लोकार्पित किया। लोकार्पण वक्तव्य में प्रो. शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक प्रबंधन जैसे आधुनिक विषय पर स्तरीय पाठ्यपुस्तकों के अभाव की पूर्ति का एक सफल प्रयास है। उन्होंने प्रत्येक अध्याय में सम्मिलित वास्तविक समस्याओं के अध्ययन और उससे जुड़े अभ्यासों के समावेश की विशेष प्रशंसा की। 
‘हिंदी हैं हम विश्व मैत्री मंच’ द्वारा प्रो. ऋषभदेव शर्मा का सम्मान 

इस अवसर पर डॉ. ऋषभदेव शर्मा के 62वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में उनकी चर्चित स्त्रीवादी काव्यकृति ‘देहरी’ के राजस्थानी अनुवाद की पांडुलिपि अनुवादिका डॉ.मंजु शर्मा द्वारा उन्हें भेंट की गई। मंच की ओर से अतिथियों का स्वागत-सत्कार डॉ. विद्याधर, डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा, डॉ. संध्या दास और शीला इंगले ने किया। समारोह को जीवंत बनाने में चिरक इंटरनेशनल स्कूल की छात्राओं के विचारोत्तेजक प्रश्नों की विशेष भूमिका रही। डॉ. सुषमा, डॉ. बी एल मीणा, डॉ. प्रभा कुमारी, डॉ. सुपर्णा बंद्योपाध्याय, डॉ. सीमा मिश्रा, अशोक तिवारी, फ़ौजिया बेगम, वुल्ली कृष्णा और जयदीप मुखर्जी आदि ने हिंदी भाषा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर इस चर्चा में सक्रिय भागीदारी निभाई । 
'देहरी' का राजस्थानी भाषा में अनुवाद कवि को समर्पित 

प्रस्तुति : डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा, 
सह-संपादक : ‘स्रवंति’, 
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा,
 हैदराबाद-500004.

मंगलवार, 3 अक्टूबर 2017

प्रो. ऋषभदेव शर्मा को 'अंतरराष्ट्रीय हिंदी मित्र सम्मान'








28 -29 सितंबर,2017 को मुंबई में विले पार्ले स्थित साठ्ये महाविद्यालय में संपन्न "रामकथा और आदिवासी साहित्य" विषयक "द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी" के अवसर पर हैदराबाद के हिंदी आचार्य एवं साहित्यकार प्रो.ऋषभदेव शर्मा को मॉस्को की संस्था रूसी-भारतीय मैत्री संघ 'दिशा' एवं मुंबई की संस्था साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्थान की ओर से "अंतरराष्ट्रीय हिंदी मित्र सम्मान" से अलंकृत किया गया। यह सम्मान प्रो.ऋषभ को उनकी हिंदी भाषा, शिक्षा, साहित्य और सामाजिक कार्यों के प्रति अनवरत सेवाओं के लिए प्रदान किया गया है। साथ ही, पूर्वोत्तर भारत के सम्मान चिह्नों द्वारा भी उनका अभिनंदन किया गया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता साठ्ये कॉलेज की प्राचार्य डॉ. कविता रेगे ने की। इस अवसर पर अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ. दिलीप सिंह, महात्मा गांधी संस्थान-मॉरीशस की निदेशक डॉ. विद्योत्तमा कुंजल, हिंदी प्रचारिणी सभा-मॉरीशस के प्रधान डॉ. यंतु देव बुधु, श्रीलंका की हिंदी लेखिका डॉ. वजीरा गुणसेना, सिने अभिनेत्री पुष्पा वर्मा, हिंदी संगम फाउंडेशन-अमेरिका के निदेशक डॉ. अशोक ओझा, वैश्विक राम साहित्य के विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, स्पाइल दर्पण-नार्वे के संपादक डॉ. सुरेश शुक्ल, संवाद पत्रिका के संपादक डॉ. अमित कुमार पांडेय, कुतुबनुमा की संपादक डॉ. राजम नटराजन पिल्लै सहित देश-विदेश के अनेक हिंदीसेवी एवं साहित्यकार उपस्थित थे। संचालन डॉ. अनिल सिंह ने किया।

(रिपोर्ट : डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा)
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गुरुवार, 24 अगस्त 2017

'समकालीन सरोकार और साहित्य' लोकार्पित



हैदराबाद, 20 अगस्त,2017. 

कादंबिनी क्लब-हैदराबाद एवं साहित्य मंथन के संयुक्त तत्वावधान में रविवार, 20 अगस्त को हिंदी प्रचार सभा, नामपल्ली परिसर में क्लब की 301वीं गोष्ठी एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह अरबामिंच विश्वविद्यालय, इथियोपिया के आचार्य डा० गोपाल शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ .क्लब की अध्यक्ष डा० अहिल्या मिश्र एवं कार्यकारी संयोजक मीना मुथा ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस अवसर पर मुख्य अतिथि कानपुर से पधारे वरिष्ठ गीतकार बृजनाथ श्रीवास्तव और अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य डा० एम० वेंकटेश्वर के साथ डा० अहिल्या मिश्र और डा० ऋषभदेव शर्मा मंचासीन हुए. संचालन प्रवीण प्रणव और मीना मुथा ने किया.

समारोह के पहले सत्र में मंचासीन अतिथियों ने तालियों की गूँज के बीच ‘पुष्पक’ के पैंतीसवें अंक को लोकार्पित किया. विमोचित पत्रिका का परिचय देते हुए कार्यकारी संपादक अवधेश कुमार सिन्हा ने कहा कि हर बढ़ते अंक से साथ ‘पुष्पक’ अधिक से अधिक पाठकों तक अपनी पहुँच बना रहा है तथा स्थानीय रचनाकारों के साथ-साथ भारत भर से सशक्त रचनाएँ प्राप्त हो रही हैं. संपादकीय को ‘पुष्पक’ की विशेषता बताते हुए उन्होंने कहा कि कहानी, गीत, कविता, ग़ज़ल, संस्मरण, समीक्षा, लघु कथा, आलेख, पुस्तक परिचय आदि विधाओं में बेहतरीन रचनाओं का चुनाव संपादक मंडल की दूरदृष्टि का परिचायक है.

दूसरे सत्र में डा० ऋषभदेव शर्मा एवं डा० जी० नीरजा द्वारा संपादित पुस्तक ‘समकालीन सरोकार और साहित्य’ को मुख्य अतिथि प्रो० एम० वेंकटेश्वर ने लोकार्पित किया. लोकार्पण वक्तव्य में डा० एम० वेंकटेश्वर ने कहा कि साहित्य जटिल अनुशासन है तो शोधपरक लेखन जटिलतर है. उन्होंने अध्यापकों और शोधार्थियों से लेकर सामान्य जनता तक में स्वाध्याय की प्रवृत्ति के अकाल पर चिंता जताते हुए कहा कि साहित्य कभी चलकर मनुष्य के पास नहीं जाएगा, हमें मनुष्य को साहित्य के पास जाने को प्रेरित करते रहना पड़ेगा. उन्होंने विमोचित पुस्तक से कई लेखों का उद्धरण देते हुए उनकी गुणवत्ता की चर्चा की और उसे न सिर्फ शोधार्थियों के लिए बल्कि सभी साहित्य प्रेमियों के किए पठनीय और संग्रहणीय बताया. साथ ही उन्होंने संपादकों की अति उदारता की आलोचना करते हुए उन्हें चयन में निर्मम होने की सलाह भी दी. 
लोकार्पित पुस्तक की प्रथम प्रति डा० अहिल्या मिश्र को उनकी सप्ततिपूर्ति की पूर्ववेला के उपलक्ष्य में समर्पित की गई. हिंदी साहित्य सेवा में तन-मन-धन से समर्पित वरिष्ठ स्त्रीविमर्शकार लेखिका, नाटककार, कहानीकार, कवयित्री, निबंधकार और संपादक डा० अहिल्या मिश्र को जीवन के 70वें वर्ष के पायदान पर शुभकामनाएँ देते हुए ‘साहित्य मंथन’ की ओर से सारस्वत सम्मान से अलंकृत किया गया. इसके अंतर्गत अभिनंदन पत्र, शाल, माला, श्रीफल, लेखनी और पुस्तक समर्पित की गई. अभिनंदन पत्र एवं समर्पण वाक्य का वाचन डा० ऋषभदेव शर्मा ने किया.
डा० अहिल्या मिश्र ने सम्मान-स्वीकृति-वक्तव्य में कहा कि कादंबिनी क्लब की यह 301वीं गोष्ठी अविस्मरणीय रहेगी. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि ‘साहित्य मंथन’ के बहाने समशील साहित्यिक बिरादरी ने आज जो सम्मान दिया है, इसमें निहित प्रेम में सारे कलुष और ताप को हरने की शक्ति है अतः मैं इस आत्मीय अभिनंदन को शिरोधार्य करती हूँ. बृजनाथ श्रीवास्तव एवं अन्य वक्ताओं ने डा० अहिल्या मिश्र को बधाई देते हुए कहा कि वे सही अर्थ में साहित्य और सारस्वत वातावरण की सूत्रधार हैं.
डा० गोपाल शर्मा ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि अंग्रेजी और विश्व की अन्य भाषाओं में शोधलेखन में संदर्भ देने की शैलियों पर अनेक पुस्तकें हैं लेकिन हिंदी में इस तरह की कोई प्रामाणिक पुस्तक नहीं है अतः लोकार्पित पुस्तक में इस अभाव की पूर्ति का भी एक विनम्र प्रयास शामिल है. उन्होंने याद दिलाया कि इस पुस्तक में स्थानीय व राष्ट्रीय लेखकों के 30 शोधपरक आलेख शामिल हैं. उन्होंने शोधार्थियों से कहा कि शोधपत्र लिखने से पहले विषय की विस्तृत समझ के लिए ज्यादा से ज्यादा साहित्यकारों को पढ़ें. इसके बाद सहयोगी लेखकों को पुस्तक की लेखकीय प्रतियाँ भेंट की गईं.

आरंभ में शहर के वरिष्ठ पत्रकार, कर्मठ सामाजिक कार्यकर्ता, हिंदी साहित्यसेवी डा० हरिश्चंद्र विद्यार्थी के दुखद निधन पर मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई. शुभ्रा मोहंतो द्वारा सस्वर प्रस्तुत निराला रचित सरस्वती वंदना के पश्चात अतिथियों का स्वागत करते हुए डा० अहिल्या मिश्र ने कहा कि गोष्ठी की निरंतरता सदस्यों की नियमित उपस्थिति से ही संभव हुई है तथा संस्था हिंदी साहित्य की सेवा, प्रचार-प्रसार में पूर्ण समर्पण से कार्य कर रही है.

अंतिम सत्र में भँवरलाल उपाध्याय के संचालन में कवि गोष्ठी संपन्न हुई. बृजनाथ श्रीवास्तव, प्रो० गोपाल शर्मा, डा० ऋषभदेव शर्मा और डा० अहिल्या मिश्र मंचासीन हुए. देवाप्रसाद मायला, शशि राय, ज्योति नारायण, डा० बी० बालाजी, दीपक दीक्षित, मिलन बिश्नोई, संतोष कुमार रज़ा, डा० ऋषभदेव शर्मा, डा० अहिल्या मिश्र, एल० रंजना, दर्शन सिंह, सरिता सुराणा जैन, डा० गीता जांगिड़, प्रवीण प्रणव, चिराग राजा, अवधेश कुमार सिन्हा, श्रीमन्नारायण विराट चारी, मीना मुथा, भँवरलाल उपाध्याय और डा० रियाजुल अंसारी ने काव्य पाठ किया. बृजनाथ श्रीवास्तव ने अध्यक्षीय काव्यपाठ किया. डा० मदनदेवी पोकरणा, डा० सीता मिश्र, कुंजबिहारी गुप्ता, दयालचंद अग्रवाल, लक्ष्मी निवास शर्मा, ज्योतिष कुमार यादव, आशा मिश्र, श्रीसेन कुमार भारती, चेन्नकेशव रेड्डी, शिवकुमार तिवारी कोहिर, राघवेंद्र, शोभा महाबल, डा० सिरिपुरपु तुलसी देवी, श्रुतिकांत भारती, लीला बजाज, वर्षा कुमारी, डा० श्रद्धा तिवारी, डा० सुपर्णा मुखर्जी, टी० निरंजन, बनवारीलाल मीणा, भूपेंद्र मिश्र आदि की उपस्थिति रही.  मीना मुथा के आभार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.

मंगलवार, 7 मार्च 2017

डॉ. ऋषभदेव शर्मा ‘अंतरराष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान’ से अलंकृत

 राजेंद्र भवन ट्रस्टनई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह के अवसर पर
प्रो. ऋषभदेव शर्मा को "अंतरराष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान" ग्रहण करते हुए श्रीलंका में भारत की उच्चायुक्त डॉ.प्रज्ञा सिंह, जे. एस. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरिमोहन तथा  युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच के अध्यक्ष रामकिशोर उपाध्याय। साथ में, आशीष भारद्वाज एवं पीयूष भारद्वाज। 
 

रूसी-भारतीय मैत्री संघ – दिशा (मास्को), हिंदी संस्थान – कुरुनेगल (श्रीलंका), सामाजिक संस्था – पहल (दिल्ली) और साहित्यक-सांस्कृतिक शोध संस्था (मुंबई) के संयुक्त तत्वावधान में दीनदयाल मार्ग, दिल्ली स्थित राजेंद्र भवन न्यास के सभाकक्ष में ‘अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह’ का संक्षिप्त लेकिन भव्य आयोजन संपन्न हुआ. समारोह की अध्यक्षता जे. एस. विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश के कुलपति प्रो. हरिमोहन ने की तथा संचालन उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, हैदराबाद के पूर्व अध्यक्ष प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने किया.

  
मुख्य अतिथि के रूप में साहित्य गंगा, मुंबई के अध्यक्ष डॉ. योगेश दुबे मंचासीन हुए जिन्हें अंतरराष्ट्रीय हिंदी शलाका सम्मान से अलंकृत किया गया. प्रो. हरिमोहन को अंतरराष्ट्रीय हिंदी रत्नाकर सम्मान, हैमबर्ग विश्वविद्यालय - जर्मनी से आए डॉ. रामप्रसाद भट्ट को अंतरराष्ट्रीय हिंदी भास्कर सम्मान, साठ्ये महाविद्यालय – मुंबई के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह को अंतरराष्ट्रीय हिंदी मित्र सम्मान, श्रीलंका में भारत की उच्चायुक्त डॉ. प्रज्ञा सिंह को अंतरराष्ट्रीय साहित्य और भाषा सम्मान तथा हैदराबाद के वरिष्ठ समीक्षक एवं कवि प्रो. ऋषभदेव शर्मा को अंतरराष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान प्रदान किए गए. अन्य सम्मानित विभूतियों में देश के विभिन्न अंचलों से पधारे चालीस से अधिक हिंदीसेवी और साहित्यकार सम्मिलित हैं.


इस अवसर पर अलंकृत विभूतियों के सम्मान में देशी-विदेशी सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए. विशेषतः रूस से आई हुईं किशोर नृत्यांगनाओं मारिया और वोल्गा द्वारा दो रूसी लोक नृत्य-गीतों की जीवंत प्रस्तुति ने सभी आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. मगध विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ. विनय कुमार के धन्यवाद-ज्ञापन और सामूहिक राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ.