राजभाषा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
राजभाषा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 10 मार्च 2020

(तकनीकी संगोष्ठी) रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और डीआरडीओ

हैदराबाद, 5 मार्च 2020. अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई) में रक्षा अनुसंधान एवं विकस संगठन की आठ प्रयोगशालाओं की द्वि दिवसीय अखिल भारतीय संयुक्त तकनीकी संगोष्ठी "रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और डीआरडीओ " का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने किया। (चित्र सौजन्यः- काज़िम अहमद, हिंदी अधिकारी, आरसीआई)
संगोष्ठी अध्यक्ष अरविंद कुमार पाठक, वैज्ञानिक 'जी' आरसीआई ने मुख्य अतिथि प्रो. ऋषभदेव शर्मा को सम्मान चिह्न समर्पित किया।  

आठों प्रयोगशालाओं के निदेशकों के साथ दीप प्रज्वलन 

मुख्य अतिथि का उद्बोधनः सरल भाषा में वैज्ञानिक साहित्य रचें

 मुख्य अतिथि प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने 'रक्षा अनुसंधान राजभाषा पोर्टल' लोकार्पित किया।

 
दीप ज्योति नमोस्तु ते : मुख्य अतिथि ने उद्घाटन-दीप प्रज्वलित किया 

डॉ.अर्चना पांडेय द्वारा संपादित काव्य संकलन "गुलमोहर" का विमोचन 

आयोजक प्रयोगशाला (आरसीआई) को शील्ड प्रदान की गई।

मुख्य अतिथि के हाथों सभी प्रयोगशाला निदेशकों को सम्मान चिह्न प्रदान किए गए।

मुख्य अतिथि का संबोधन : वैज्ञानिक और तकनीकी साहित्य सृजन के लिए हिंदी पूर्णतः समर्थ भाषा 
 :
आरसीआई की हिंदी गृह-पत्रिका 'इमारत' का विमोचन

आरसीआई, एएसएल, डीआरडीएल, डीएलआरएल, डीएमआरएल, अनुराग, चेस हैदराबाद एवं एनएसटीेल विशाखापट्टणम के निदेशकों के साथ मुख्य अतिथि

एक्सपोजिशन हॉल में... 

।। तमसो मा ज्योतिर्गमय ।।

आरंभ से पहले...
-प्रस्तुतिडॉ.बी.बालाजी, 
उप प्रबंधक, 
हिंदी अनुभाग एवं निगम संचार, 
मिश्र धातु निगम लिमिटेड

शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

मिधानि में राजभाषा ‘वाक प्रतियोगिता’ संपन्न





हैदराबाद, 26.07.2018।
आज यहाँ नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम) के तत्वावधान में मिश्र धातु निगम लिमिटेड के सभागृह में विभिन्न उपक्रमों में कार्यरत कार्मिकों के लिए ‘वाक प्रतियोगिता’ आयोजित की गयी। प्रतियोगिता में 19 उन्नीस उपक्रमों से आए हुए 25 प्रतिभागियों ने ‘ एक देश-एक भाषा (संघ की राजभाषा के संदर्भ में)’ तथा ‘देश और अभिव्यक्ति की आजादी’ पर अपने विचार प्रकट किए।
प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए मिश्र धातु निगम लिमिटेड के अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन एवं परिवर्तन प्रबंधन) के आनंद कुमार ने कहा इससे हम किसी विषय को तथ्यात्मक ढंग से संक्षेप में और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करना सीख सकते हैं। नराकास के सदस्य सचिव और बीडीएल के उप महाप्रबंधक (राजभाषा) होमनिधि शर्मा ने राजभाषा के रूप में हिंदी की व्यापक स्वीकार्यता बताते हुए प्रतिभागियों का स्वागत किया। प्रयोजक संस्था मिधानि की ओर से सहायक प्रबंधक (राजभाषा) डॉ बी बालाजी ने प्रतियोगिता के नियम स्पष्ट किए। निर्णायकद्वय प्रकाश जैन और ऋषभदेव शर्मा ने व्यक्तित्व विकास में मनुष्य के भाषाई और शारीरिक व्यवहार की महत्ता पर चर्चा की।
प्रतियोगियों के भाषणों के मूल्यांकन के आधार पर हिंदी भाषी वर्ग में ईएसआई आदर्श नगर के संदीप सिंह को प्रथम,बीएचईएल आरसी पुरम के विनोद सिंह को द्वितीय तथा बीडीएल के धीरज जोशी और एनएमडीसी की पल्लवी डांगे को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। अन्य भाषी वर्ग में एनएमडीसी की लक्ष्मी कुमार को प्रथम, एचपीसीएल की के एस अनंत लक्ष्मी को द्वितीय और बीएचईएल अनुसंधान एवं विकास के रामचंदर राव को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। नराकास के इन पुरस्कारों के अलावा डेली हिंदी मिलाप की ओर से चतुर्थ स्थान प्राप्त मिधानि के अमित सिंह (हिंदी भाषी वर्ग) और एचएएल की जयश्री (अन्य भाषी वर्ग) के लिए विशेष पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई।
आरंभ में सुरेखा, वर्षा, रमा मल्लिका, रतनसिंह और प्रतीक शर्मा ने मिधानि गीत प्रस्तुत किया। अंत में सभी प्रतिभागियों को मिधानी की ओर से स्मृति चिह्न के रूप में उपहार भेंट किया गया।
प्रतियोगिता में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से श्रद्धा नीलकंठ; बीडीएल से अंबिका मिशा; ईएसआई चिकित्सा महाविद्यालय से मिर्ज़ा असद बेग; बीएचईएल, आरसी पुरम से पी बाल सुब्रह्मण्यम; ईएसआई, अतिविशिष्ट अस्पताल से रत्नदीप सरकार; एचपीसीएल से नेहा कटारिया; आईटीआई से बी नंद किशोर; एमएमटीसी से राजेंद्र प्रसाद; मिधानि से डॉ प्रवीण ज्योति; ईसीआईएल से शर्मीला मुर्मू; एअर इंडिया से पी आर रवींद्र; आईओसीएल से ज़ाहिद अली एवं टीके शेखर; एचएएल से मंजय कुमार; तथा यूनाइटेड इंडिया इन्शुरेंस कंपनी से वी श्रवण कुमार ने उत्साह पूर्वक अपनी भागीदारी दर्ज कराई और राजभाषा हिंदी के प्रति निष्ठा व्यक्त की। इस अवसर पर हिंदी अधिकारीगण - बीडीएल के अवर प्रबंधक डॉ शिव कोटि, बीडीईएल आरसी पुरम के नवदीप कुमार, एनएमडीसी की जी सुजाता, एमएमटीसी के अजय कुमार मिश्र आईओसीएल के जितेंद्र साह तथा यूनाइटेड इंडिया इन्शुरेंस कंपनी की जी लक्ष्मी ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रेषक:
डॉ बी बालाजी, सहायक प्रबंधक (राजभाषा), मिधानि।

बुधवार, 28 मार्च 2018

एमएमटीसी में राजभाषा कार्यशाला संपन्न




हैदराबाद, 27 मार्च, 2018.भारत के दो सबसे बड़े विदेशी मुद्रा कमाने वाले संस्थानों में से  एक  खनिज तथा धातु व्यापार निगम लिमिटेड या एमएमटीसी लिमिटेड भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक व्यापारिक प्रतिष्ठान है. इसके हैदराबाद स्थित कार्यालय में त्रैमासिक राजभाषा कार्यशालाओं के सिलसिले में आज "भारत की राजभाषा नीति" और "कार्यालयीन शब्दावली और पत्राचार" पर डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने दो प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) दिए और प्रतिभागी अधिकारियों को राजभाषा-व्यवहार का प्रशिक्षण दिया. एमएमटीसी के महाप्रबंधक टी. श्रीनिवास राव ने कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि राजभाषा हिंदी को अपने कामकाज में अपनाना हमारी संवैधानिक दायित्व और राष्ट्रीय कर्तव्य है. सुरेश ताईशेट्टे और अजय मिश्र ने समन्वयक की ज़िम्मेदारी बखूबी निभाई.

गुरुवार, 30 नवंबर 2017

सफलता की कहानी और सोशल मीडिया लेखन पर कार्यशाला संपन्न


हैदराबाद, 29 नवंबर,2017. 
राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान (मैनेज) में नराकास-4 की बैठक के अवसर पर विभिन्न संस्थानों से आए हिंदीकर्मियों के निमित्त ''कल्पतरु : सृजनात्मक लेखन कार्यशाला'' संपन्न हुई.  विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने प्रतिभागियों को ''सफलता की कहानी'' (सक्सेस स्टोरी) लिखने और ''सोशल मीडिया लेखन'' का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया. डॉ. कस्तूरी श्रीवल्ली  ने कार्यक्रम का संचालन  किया. 


शनिवार, 24 सितंबर 2016

[स्रवंति] बदलती चुनौतियाँ और हिंदी की आवश्यकता : प्रो. ऋषभदेव शर्मा


 "बदली हुई परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में हिंदी को राष्ट्रभाषा और राजभाषा जैसी नारेबाजी से दूर रखकर, भाषा के रूप में प्रचारित-प्रसारित किए जाने की जरूरत है – जिसे मनुष्य सूचनाओं के आदान-प्रदान, जिज्ञासाओं की शांति, आत्मा की अभिव्यक्ति और संप्रेषण की सिद्धि के निमित्त सीखा करते हैं। भावुकता और बाध्यता दोनों ही अतियाँ हैं। भाषा मनुष्य की सहज आवश्यकता के रूप में सीखी जाती है। हम इस सहज आवश्यकता का अनुभव करें-कराएँ, तो हिंदी भी सहजता से पढ़ी-पढ़ाई, सीखी-सिखाई जा सकती है। विश्वविद्यालयों के हिंदी विभागों से लेकर स्वैच्छिक हिंदी प्रचार संस्थाओं तक को चाहिए कि वे अपने घिसेपिटे रवैये को बदलें और हिंदी को अधुनातन ज्ञान की व्यावहारिक भाषा के रूप में प्रचारित-प्रसारित करें।"





बुधवार, 21 सितंबर 2016

विश्व वात्सल्य मंच की बैठक संपन्न



 

हैदराबाद. 
18 सितंबर, 2016  को  विश्व वात्सल्य मंच, हैदराबाद और वैश्विक हिंदी सम्मलेन, मुंबई  की एक  बैहक मुरारका पैलेस में संपन्न हुई. हिंदी को तकनीकी से जोड़ने पर चर्चा हुई. काव्यपाठ तो हुआ ही.डॉ. मोती लाल गुप्ता 'आदित्य' और डॉ. अहिल्या मिश्र का सम्मान किया गया.अध्यक्षता प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने की.

मंगलवार, 20 सितंबर 2016

आ प्र हिंदी अकादमी में व्याख्यान 20 सितंबर, 2016 को

डेली हिंदी मिलाप : 20 सितंबर, 2016 : पृष्ठ 17

मिश्र धातु निगम में हिंदी पक्षोत्सव समापन समारोह


====मिश्र धातु निगम में हिंदी पक्षोत्सव समापन समारोह : 14 सितंबर 2016 ====
डेली हिंदी मिलाप : 20 सितंबर 2016 : पृष्ठ 17 

बुधवार, 16 दिसंबर 2015

"व्यक्तित्व प्रबंधन और भाषिक व्यवहार" पर विशेष व्याख्यान संपन्न

भानूर [मेदक], 15 दिसंबर 2015.
भारत डायनामिक्स लिमिटेड [बीडीएल] की भानूर इकाई में आयोजित द्विदिवसीय राजभाषा कार्यशाला के दूसरे दिन आज यहाँ ''व्यक्तित्व प्रबंधन और भाषिक व्यवहार" विषय पर प्रो. ऋषभदेव शर्मा का विशेष व्याख्यान संपन्न हुआ. अतिथि वक्ता ने मनोविज्ञान और भाषाविज्ञान के हवाले से यह प्रतिपादित किया कि मनुष्य का भाषिक आचरण उसके व्यक्तित्व की कुंजी होता है. साथ ही उन्होंने सकारात्मक व्यक्तित्व के विकास और नकारात्मक वृत्तियों के निराकरण के सहज उपाय के रूप में '21-सूत्री नित्य-संकल्प' पर भी चर्चा की.  हिंदी के माध्यम से इस प्रकार की गतिविधि को प्रतिभागियों ने उपयोगी और आवश्यक बताया. 

.                                                                                                                     प्रस्तुति : डॉ. बी. बालाजी
अवर प्रबंधक (रा.भा. एवं सा.प्रशा.)
बीडीएल, भानूर
मोबाइल: 8500920391

हिंदी में कृषि साहित्य पर केंद्रित राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न


हैदराबाद, 9 दिसंबर 2015.
यहाँ राजेंद्र नगर स्थित 'राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान' [मैनेज] के तत्वावधान में 9 दिसंबर को "हिंदी में तकनीकी साहित्य का सृजन और उसका विस्तृत संचार : कृषि साहित्य के विशेष संदर्भ में" विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई. इस अवसर पर प्रतिभागियों को 'प्रयोजनमूलक हिंदी और अनुवाद : पारिभाषिक शब्दावली' पर प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने  संबोधित किया. उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों और राजभाषा कर्मियों से अनुरोध किया कि अधिकाधिक अद्यतन जानकारी की हिंदी और भारतीय भाषाओँ में सरल-सहज शब्दों में मुद्रित माध्यम और इंटरनेट पर उपलब्धता सुनिश्चित करें ताकि साधारण किसानों तक उसकी पहुँच हो सके.

इस कार्यशाला में कृषि साहित्य  के अनुवाद, कृषि क्षेत्र में सरकारी योजनाओं, हिंदी में कृषि विषयक ज्ञान की उपलब्धता, सूचना एवं संपर्क तकनीक, किसान पोर्टल और विकास पीडिया पर अत्यंत उपयोगी विचार एवं कार्य सत्र संपन्न हुए.  कार्यशाला डॉ. वी. पी.  शर्मा के निर्देशन में डॉ. के श्रीवल्ली द्वारा संयोजित की गई. 

मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

‘कार्यालयीन व्याकरण’ पर विशेष व्याख्यान संपन्न

     
 14 दिसंबर 2015 को बीडीएल, भानूर में आयोजित राजभाषा कार्यशाला के अवसर पर
विशेष वक्ता प्रो. ऋषभदेव शर्मा, संयोजक डॉ. बी. बालाजी एवं प्रतिभागीगण 

*********  
भानूर (मेदक), 14 दिसंबर 2015 (मीडिया विज्ञप्ति). 
आज यहाँ भारत डायनामिक्स लिमिटेड के परिसर में स्थित तकनीकी सूचना केंद्र में दो-दिवसीय राजभाषा कार्यशाला आरंभ की गई. प्रथम सत्र में प्रतिभागियों को राजभाषा संबंधी संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी देते हुए कार्यालयीन पत्राचार से अवगत कराया गया. 

द्वितीय सत्र में अतिथि व्याख्याता के रूप में पधारे प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने ‘कार्यालयीन व्याकरण’ पर पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विशेष व्याख्यान दिया. प्रो.शर्मा ने यह स्पष्ट किया कि कार्यालयीन भाषा में निर्वैयक्तिकता, पारिभाषिकता, तथ्यात्मकता और अभिधात्मक पारदर्शिता के गुण होना आवश्यक है. उन्होंने प्रारूपण एवं टिप्पण हेतु आमतौर पर प्रयुक्त हिंदी के वाक्य सांचों का अभ्यास भी कराया जिसमें प्रतिभागियों ने विशेष रुचि प्रदर्शित की. 

आरंभ में अवर प्रबंधक डॉ.बी.बालाजी ने अतिथि वक्ता का परिचय दिया. प्रतिभागियों की ओर से धन्यवाद प्रस्ताव के साथ प्रथम दिन की कार्यशाला संपन्न हुई.
प्रस्तुति : डॉ. बी. बालाजी
अवर प्रबंधक (रा.भा. एवं सा.प्रशा.)
बीडीएल, भानूर
मोबाइल: 8500920391
         

गुरुवार, 27 नवंबर 2014

अखिल भारतीय हिन्दी अधिकारी सम्मेलन


रामोजी फिल्मसिटी , हैदराबाद | 

दिनांक 14 एवं 15 नवम्बर , 2014 को हैदराबाद स्थित रामोजी फिल्मसिटी के सितारा होटल के सम्मेलन कक्ष में दि "न्यू इंडिया एश्योरंस कंपनी लिमिटेड " अखिल भारतीय हिन्दी अधिकारी सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया | यह सम्मेलन प्रधान कार्यालय द्वारा प्रायोजित था जिसका आयोजन हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने किया |


सम्मेलन की अध्यक्षता श्री पी नायक , महा प्रबन्धक प्रधान कार्यालय ने किया | श्री संजीव सिंह , उप महा प्रबन्धक प्रधान कार्यालय ने सम्मेलन की हिन्दी कार्यान्वयन में भूमिका पर प्रकाश डाला |

श्री के वी कृष्णा , उप महा प्रबन्धक हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने स्वागत भाषण दिया |

सम्मेलन के मुख्य अतिथि प्रो. ऋषभदेव शर्मा , प्रोफेसर एवं अध्यक्ष ,उच्च शिक्षा और शोध संस्थान ,दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा , खैरताबाद , थे | श्री शर्मा ने संपर्क भाषा के रूप में हिन्दी के औचित्य पर प्रकाश डाला और हिन्दी के प्रचार -प्रसार में हिन्दीतर भाषियों के योगदान की चर्चा की |

सम्मेलन में भारत के विभिन्न प्रांतों से हिन्दी अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया |

सम्मेलन की शुरूआत में हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय के राजभाषा अधिकरी , कुमार अनिल मलदहियार ने सभी प्रतिभागियों का अभिनंदन किया और पदाधिकारियों एवं मुख्य अतिथि को मंचासीन होने का निमंत्रण दिया | उसके बाद दीप प्रज्ज्वल्न ,सरस्वती वंदना और इतनी शक्ति हमें देना दाता गान की प्रस्तुति प्रधान कार्यालय की टीम द्वारा किया गया और सम्मेलन की कार्रवाई शुरू हो गई | 

अध्यक्षीय भाषण के पश्चात मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया |

चायपान के बाद (क ) और (ख) क्षेत्र का पॉवर पाइंट प्रजेंटेशन हुआ | 

दिनांक 15 नवम्बर को (ग ) क्षेत्र का पॉवर पाइंट प्रजेंटेशन हुआ | उसके बाद खुला सत्र हुआ |

तत्पश्चात पुरस्कार वितरण हुआ और राष्ट्रीय गान के साथ समेलन एक खुशनुमा वातावरण में सम्पन्न हुआ | 

- कुमार अनिल मलदहियार 
राजभाषा अधिकारी , हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय
 |

गुरुवार, 18 सितंबर 2014

नाबार्ड में हिंदी समारोह की धूम

हैदराबाद.

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के हैदराबाद स्थित तेलंगाणा और आंध्र प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय में हिंदी दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया. कार्यालय में 28 अगस्त 2014 से 12 सितंबर 2014 तक हिंदी पखवाड़ा मनाया गया. 12 सितंबर 2014 को आयोजित मुख्य समारोह में डॉ ऋषभदेव शर्मा, प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ार्इ और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिंदी पर ओजपूर्ण वक्तव्य दिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक श्री जिजि माम्मेन ने की.

अपने वक्तव्य में डॉ ऋषभदेव शर्मा जी ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ाने में हिंदी ने बहुत बड़ी भूमिका निभार्इ है. हिंदी भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत जैसे वैविध्यपूर्ण देश में सांस्कृतिक और मानसिक एकता के लिए एक भाषा का होना जरूरी है और संपर्क भाषा के रूप में हिंदी ने यह भूमिका निभार्इ है और आज भी देश के भिन्न-भिन्न प्रांतों के लोगों को एकसूत्र में बांधे रखने के लिए सबसे सशक्त माध्यमों में से एक है. 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक श्री जिजि माम्मेन ने कहा कि राजभाषा के कार्यान्वयन का कार्य केवल पखवाड़े तक ही सीमित न होकर, पूरे वर्ष निष्ठापूर्वक किया जाता है. राजभाषा पखवाड़े को हम एक उत्सव के रूप में मनाते हैं. 

इस अवसर पर हिंदी पखवाड़े के मुख्य समारोह में महाप्रबंधक श्री एल मुंडा ने केंद्रीय गृह मंत्री का संदेश पढ़ा तथा श्री पंकज दास, उप महाप्रबंधक ने कार्यालय में राजभाषा कार्यान्वयन की स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत की. श्री किशन सिंह, महाप्रबंधक ने सभा को संबोधित किया.

हिंदी पखवाड़े का उद्घाटन दिनांक 28 अगस्त 2014 को किया गया था. इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद की क्षेत्रीय निदेशक, डॉ. शकुंतलम्मा वार्इ ने आज के दौर में हिंदी पर मीडिया, विज्ञापनों आदि के प्रभाव पर प्रकाश डाला. हिंदी पखवाड़े के दौरान कार्यालय के स्टाफ सदस्यों के लिए सुलेखन, वर्ग पहेली, प्रश्नमंच, अंताक्षरी, कथा-कथन, शब्दावली, टिप्पण व प्रारूपण आदि जैसी कर्इ रोचक व ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया.



पखवाड़े के समापन पर दिनांक 12 सितंबर 2014 को आयोजित मुख्य समारोह में प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया. श्री एम एस मूर्ति, प्रबंधक (राजभाषा) के धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह कार्यक्रम संपन्न हुआ.

प्रस्तुति -  एम एस मूर्ति, प्रबंधक (राजभाषा), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), हैदराबाद 





हिंदी दिवस पर साहित्य नभ की काव्य गोष्ठी



दिल्ली, 14 सितम्बर 2014.



हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में नांगलोई क्षेत्र में साहित्य नभ संस्था की ओर से काव्य गोष्ठी का कार्यक्रम सफलता पूर्वक संपन्न हुआ.

पेश है कार्यक्रम की  कुछ झलकिया--

कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत प्रवक्ता यस्शवी कवि .कहानीकार पंडित हरनाम शर्मा जी ने की. मुख्य अतिथि  श्री किशोर श्रीवास्तव जी थे. 

मेरे साथी मित्र लघु कथाकार अनिल शूर आजाद जी के किसी कारणवश न आ पाने के कारण मंच सञ्चालन का कार्यभार श्री ललित कुमार मिश्र जी को सौपा गया.

मकेश जी ने अपनी कविता "सिसकता गॉव बिलखती गलियां " से लोगो का मन मोह लिया और खूब तालिय बटोरी.वहीँ राजीव जी ने छोड़ हरकत शैतानो की, बन तू इंसान रे" के माध्यम से युआ पीड़ी को दलदल से बहार रहने का सन्देश दिया.

आलोचना और समीक्षा में महरत रखने वाले संदीप तोमर (मैं) ने सामाजिक विसंगति को आधार बना कुछ क्षणिकाएं प्रस्तुत की, लधु कथा में महारथ रखने वाले संदीप तोमर ने व्यंग्य शैली कविता पाठ करके पुराने साथियों को आश्चर्य चकित किया -
इस बस्ती का जनाब 
अजीब मटियामेट है
छत टपकती कमरों की
क्या आलिशान गेट है 
मुखी मरती जनता यहाँ 
मुखिया धन्नासेठ है .........


साथ ही गजल में भी उन्होंने हाथ आजमाए------
रिश्तों के बोझ से कब दबती है जिन्दगी
मुट्ठी के रेत सी यूँ निकलती है जिन्दगी I ........
कहीं आँखों से आंसूं ही ना छलक जाये "उमंग"
बहाना ही बना दो के कुछ खटकती है जिन्दगी I

मनोज मैथिल की कविता ---- "मेरे पास शब्द नहीं हैं .... क्या तुम मुझे दोगे उधार शब्द "
धारदार हथियार कि तरह पैनापन लिए थी.

अखिलेश द्विवेदी अकेला ने "हे नाथ शक्ति दीजिये" के माध्यम से परमेश्वर का आव्हान किया जिसने अध्यक्ष महोदय का मन मोह लिया.

ललित कुमार मिश्र जी की ने सुनाया---- " गुजर जाता हूँ मैं आज भी उन गलियों से ..... जहा तेरा आना जाना था"  उनकी दूसरी कविता "आ जाओ प्रिये" में वो अन्यास ही अपनी प्रेयसी का आह्वान करते हैं .जो निश्चित ही रचना कर्म का एक अभिन्न हिस्सा है.

शशि श्रीवास्तव ने "मेरे दो मन है" काश मेरे घर में होती एक अदद बेटी " नमक रचनाये सुनाई. पहली बार उसके मुख से कविता सुनकर अच्छा लगा.

एक और कवयित्री भावना ने " आज मैं बहुत उदास हूँ " कविता के माध्यम से लोगो कि रही सही उदासी को भी दूर किया.

संजय कुमार कश्यप ने जिस प्रकार मंच संचालक के बिना आग्रह के मंच पर " माँ "और "पिता " विषय पर काव्य पाठ किया वो बेहद प्रशंशनीय था. असल में पता चला कि कवि में अगर उर्जा अहि तो बस मंच काफी है. कविता के उद्गारों के लिए समय का क्यों इंतज़ार किया जाये. उनकी कविता "चाँद कि चांदनी गर मुझे मिल जाये" भी काफी अच्छी रचना रही.

किशोर श्रीवास्तव ने दो गीत सुनाये ----
"उसकी पल पल की ख़बरों से 
रूबरू हो जाती है सारी  दुनिया "
और 
"नहीं अलगाव की हम बात किया करते है 
हम तो हर सख्स से खुल के मिला करते है"
गीत बेहद लाजबाब थे.

अध्यक्ष महोदय ने भी आधुनिक उग की  कविता सुनाकर सभी कनिष्ठ साथियों को कविता लिखने के राज़ बताये. और उनके अध्यक्षीय भाषण से सभी को प्रेरणा मिली. और उन्होंने सभी साहित्य नभ परिवार के सदस्यों को आगामी कार्यक्रमों कि रुपरेखा के लिए भी प्रेरित किया.

प्रस्तुति -संदीप तोमर , दिल्ली 

मंगलवार, 17 सितंबर 2013

बी डी एल में हिंदी दिवस समारोह एवं पक्षोत्‍सव संपन्‍न


 हैदराबाद, 14 सितंबर.  

रक्षा मंत्रालय के उद्यम भारत डायनामिक्‍स लिमिटेड में आज हिंदी दिवस समारोह तथा हास्‍य कवि सम्‍मेलन संपन्‍न हुआ. 1 से 14 सितंबर तक मनाये गये इस हिंदी पक्षोत्‍सव का उद्घाटन निगम कार्यालय में शब्‍दावली एवं श्रुतलेख प्रतियोगिताओं से हुआ. पक्षोत्‍सव समारोह के दौरान कंचनबाग, भानूर तथा विशाखापट्टणम इकाइयों में श्रुतलेख, शब्‍दावली, प्रश्‍नमंच, कंप्‍यूटर पर हिंदी टाइपिंग तथा कंप्‍यूटर पर हिन्‍दी में तकनीकी विषय प्रस्‍तुतीकरण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया. इन प्रतियोगिताओं के अलावा संसदीय राजभाषा समिति के सुझाव के अनुपालन में दि. 6 सितंबर को कंचनबाग स्‍थित निगम कार्यालय में विश्‍वप्रसिद्ध फिल्‍म निर्देशक पद्मभूषण श्‍याम बेनेगल की राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित फिल्‍म ‘वेल डन अब्‍बा’ और दि. 13 सितंबर को भानूर इकाई में ‘बोस-दि फारगाटन हीरो‘ फिल्‍में मल्‍टीमीडिया व्‍यवस्‍था के ज़रिये दिखायी गईं. 

हिंदी दिवस एवं पुरस्‍कार वितरण समारोह 14 सितंबर को उद्यम के अधिशासी निदेशक (मानव संसाधन) व राजभाषा प्रभारी डॉ. एन के राजू तथा अधिशासी निदेशक (अभिकल्‍प एवं अभियांत्रिकी) श्री एल धनंजय की उपस्‍थिति में संपन्‍न हुआ. 

इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. एन के राजू ने कहा कि हिन्‍दी में कामकाज कर इसे आगे बढ़ाना हमारा दायित्‍व है और बी डी एल में इसका पालन भली-भांति किया जा रहा है. 


इसी क्रम में श्री एल धनंजय ने अपने संबोधन में कहा कि यह समारोह पूरे भारतीय भाषाओं का समारोह है. हिन्‍दी में काम करने से सभी भाषाओं का मान बढ़ता है अत: हिन्‍दी का प्रयोग संवैधानिक दायित्‍व से अधिक पूरे सहज भाव और मन से करना चाहिए. 

कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि के रूप में उपस्‍थित दक्षिण भारत हिन्‍दी प्रचार सभा के पी जी संस्थान  के प्रधान प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने कहा कि हिन्‍दी बहुत ही सक्षम और समृद्ध भाषा है जिसमें ज्ञान, मनोरंजन, तकनीकी व प्रशासनिक क्षेत्रों का काम सरलता से किया जा सकता है. उन्‍होंने कहा कि हिन्‍दी में व्‍यवसाय और कंप्‍यूटर पर कामकाज की दक्षता बखूबी सिद्ध हो चुकी है. अमरीका, यूरोप, रूस, जर्मनी और अन्‍य देशों में कंप्‍यूटर व मशीनी रूप में हिन्‍दी का प्रयोग ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्रों में और आगे बढ़ाने पर हो रहे शोध कार्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि हिन्‍दी की गति अब अवरूद्ध नहीं की जा सकती. राजभाषा के प्रयोग के रूप में हिन्‍दीतर क्षेत्रों में हो रहे निरंतर विकास पर खुशी ज़ाहिर  करते हुए उन्‍होंने बताया कि कार्यालय प्रधान दैनिक कामकाज में निरंतर हिन्‍दी लेखन का प्रयास संकल्‍प और दृढ़ता से करते रहें तो सरकारी कार्यालयों में भी हिन्‍दी की स्‍थिति में तेजी से सुधार आयेगा.

कार्यक्रम के आरंभ में भारत सरकार के गृह-मंत्री एवं रक्षा मंत्री का संदेश तथा सितंबर माह के दौरान कंचनबाग तथा भानूर इकाइयों में आयोजित कार्यक्रमों की रिपोर्ट श्री होमनिधि शर्मा, वरिष्‍ठ प्रबंधक (का. एवं प्रशा. – रा.भा.) ने प्रस्‍तुत की. इसके बाद हिंदी पक्षोत्‍सव के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा कार्यालय के दैनिक कामकाज में हिंदी का प्रयोग कर इसके प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले कर्मचारियों को नकद पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया गया. 
कार्यक्रम के अगले चरण में प्रो. ऋषभदेव शर्मा की अध्‍यक्षता में हास्‍य कवि-सम्‍मेलन संपन्‍न हुआ जिसमें सुप्रसिद्ध कवि श्री नरेंद्र रॉय, श्री वेणुगोपाल भट्टड, श्री वहीद पाशा क़ादरी एवं श्रीमती ज्‍योति नारायण ने अपनी नवीन, सामयिक और प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया. इस अवसर पर राजभाषा विभाग के प्रतिनिधि के रूप में श्री श्रीरामसिंह शेखावत भी उपस्‍थित रहे. कार्यक्रम के सफल आयोजन में बी डी एल हिंदी विभाग के सभी सदस्‍यों का सक्रिय योगदान रहा. 

-होमनिधि शर्मा, 
वरिष्‍ठ प्रबंधक(राजभाषा) एवं 
सचिव, नगर राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति (उपक्रम)

शुक्रवार, 21 जून 2013

बीडीएल, भानूर इकाई में हिंदी कार्यशाला संपन्न

बीडीएल, भानूर में संपन्न हिंदी कार्यशाला के दूसरे दिन (21 जून) को प्रतिभागी अधिकारियों के साथ अतिथि व्याख्याता डॉ. ऋषभ देव शर्मा 

मेदक जिले [आंध्र प्रदेश] में स्थित भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल), भानूर इकाई में दि.20-21 जून 2013 को राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भानूर इकाई के तत्वावधान में दोदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में इकाई के अधिकारियों को राजभाषा नीति, हिंदी व्याकरण, कार्यालयी पत्रचार, टिप्पण एवं प्रारूपण तथा अनुवाद आदि विषयों का ज्ञान कराया गया।

हिंदी कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए अपर महाप्रबंधक (उ.) जय  प्रकाश पूर्वे ने कार्यशाला में प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह कार्यशाला दैनिक काम-काज में हिंदी के प्रयोग में आनेवाली कठिनाइयों को हल करके प्रयोग के सरल तरीकों पर चर्चा करने और झिझक को दूर करने के लिए आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रसार के लिए आवश्यक है कि हम सब हिंदी सीखने के बाद अपने दैनिक काम काज में इसका इस्तेमाल करना आरंभ करें और अन्य कर्मचारियों को भी प्रेरित करें। 

दिनांक 20 जून, 2013 को प्रथम सत्र में  बृहस्पति शर्मा ने हिंदी भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बड़े ही रोचक और सरल ढंग से कार्यालय  में प्रयोग किए जाने वाले सामान्य टिप्पणियाँ और प्रारूप हिंदी में लिखने का अभ्यास कराया। द्वितीय सत्र में इकाई के अवर प्रबंधक (राजभाषा) डॉ बी बालाजी ने राजभाषा कार्यान्वयन में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को  रेखांकित करते हुए राजभाषा हिंदी का सामान्य परिचय दिया और कार्यालय में प्रयोग किए जाने वाले कार्यालयी पत्र लिखवाए और उनका अभ्यास करवाया।

दिनांक 21 जून, 2013 को दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद के प्रो. ऋषभ देव शर्मा ने प्रथम सत्र में कार्यालयीन व्याकरण सिखाया और उसका प्रतिभागियों से अभ्यास कराया। द्वितीय सत्र में संस्कृत, हिंदी, तेलुगु, उर्दू, अंग्रेजी का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए पारिभाषिक शब्दावली निर्माण की प्रक्रिया और इसके प्रयोग की जानकारी दी। 

कार्यक्रम की सफलता में कार्मिक एवं प्रशासन विभाग के सभी कर्मचारियों का सक्रिय योगदान रहा। डॉ बी बालाजी ने कार्यक्रम का संचालन किया।

प्रस्तुति : बी बालाजी
अवर प्रबंधक (राजभाषा), भारत डायनामिक्स लिमिटेड , भानूर