मंगलवार, 29 जुलाई 2014

(मिलाप/ स्वतंत्र वार्ता) प्रो. दिलीप सिंह की पुस्तक लोकार्पित


स्वतंत्र वार्ता : 29 जुलाई 2014
प्रो. दिलीप सिंह की पुस्तक ‘कविता पाठ विमर्श’ लोकार्पित

हैदराबाद के समग्र साहित्य परिदृश्य पर सटीक और सार्थक चर्चा

हैदराबाद, 28 जुलाई 2014. [मीडिया विज्ञप्ति]

यहाँ दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के खैरताबाद स्थित सभागार में साहित्य-संस्कृति मंच के तत्वावधान में प्रो. दिलीप सिंह की समीक्षा-कृति ‘कविता पाठ विमर्श’ का लोकार्पण भारतीय एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. एम. वेंकटेश्वर के हाथों संपन्न हुआ. लोकार्पण वक्तव्य में प्रो. एम. वेंकटेश्वर ने कहा कि ‘कविता पाठ विमर्श’ के माध्यम से प्रो. दिलीप सिंह ने साहित्य की शैलीवैज्ञानिक समीक्षा के सर्वथा अछूते आयामों को उद्घाटित किया है. उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में हैदाराबाद के हिंदी और उर्दू के पुराने और नए 15 कवियों के व्यक्तित्व और कृतित्व का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है जो अपने आप में अनूठा है.

इस अवसर पर उच्च शिक्षा और शोध संस्थान द्वारा प्रकाशित भाषाविज्ञान, हिंदी भाषा और साहित्य पर नई सोच की अर्धवार्षिक पत्रिका ‘बहुब्रीहि’ के ताजा अंक का लोकार्पण इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली से पधारे डॉ. सत्यकाम ने किया. उन्होंने ‘बहुब्रीहि’ को हिंदी और भारतीयता के समन्वयात्मक चरित्र की जोरदार अभिव्यक्ति मानते हुए कहा कि इसके द्वारा सिनेमा और मीडिया जैसे शब्द-प्रयोग के साहित्य से इतर क्षेत्रों पर भी सार्थक विमर्श सामने आया है.

साथ ही दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की हिंदी-तेलुगु द्विभाषा मासिक पत्रिका ‘स्रवंति’ के जुलाई अंक का लोकार्पण केंद्रीय हिंदी निदेशालय, दिल्ली से संबद्ध डॉ. एच. बालसुब्रह्मण्यम ने किया और कहा कि अपने स्थायी स्तंभों और दोनों भाषाओं के सृजन व समीक्षा की प्रस्तुति के कारण ‘स्रवंति’ समसामयिक साहित्यिक पत्रकारिता में विशेष पहचान बना चुकी है.

लोकार्पण समारोह के निर्देशक डॉ. ऋषभ देव शर्मा ने इस आयोजन को ‘कविता पाठ विमर्श’ के बहाने हैदराबाद के हिंदी-उर्दू साहित्य के समग्र परिदृश्य पर सार्थक और सटीक चर्चा बताया जिसमें मखदूम मोईनुद्दीन से लेकर शशि नारायण स्वाधीन तक की कविताओं का मूल्यांकन किया गया.

प्रो. दिलीप सिंह ने अपने भावुकतापूर्ण उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि हैदराबाद की हिंदी कविताई और उर्दू शायरी में एक ख़ास तरह का सहज सलोनापन है जो विभिन्न भाषा-समुदायों के दैनंदिन व्यवहार की मिश्रित भाषा की सर्जनात्मकता के कारण अपनी ओर आकर्षित करता है. 

समारोह की अध्यक्षता करते हुए ‘भास्वर भारत’ के संपादक डॉ. राधेश्याम शुक्ल ने लेखन और पत्रकारिता के माध्यम से नए हिंदी आंदोलन की दिशा प्रशस्त करने के लिए भाषावैज्ञानिक प्रो. दिलीप सिंह और दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा को साधुवाद दिया.

आरंभ में संयोजिका डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा ने अतिथि-अभ्यागतों का स्वागत-सत्कार किया तथा अंत में डॉ. एस.वी.एस.एस. नारायण राजू ने कृतज्ञता-प्रस्ताव रखा.

सोमवार, 28 जुलाई 2014

उच्च शिक्षा और शोध संस्थान : नए सत्र में प्रवेश प्रक्रिया चालू

हैदराबाद.
यहाँ दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के विश्वविद्यालय विभाग - उच्च शिक्षा और शोध संस्थान - में सत्र 2014 -2015 के लिए विविध पाठ्यक्रमों में  प्रवेश की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है. 

एम ए हिंदी, स्नातकोत्तर अनुवाद डिप्लोमा और स्नातकोत्तर पत्रकारिता डिप्लोमा में पहले आओ पहले पाओ आधार पर प्रवेश उपलब्ध है. इसके लिए न्यूनतम पात्रता हिंदी के साथ त्रिवर्षीय डिग्री कोर्स है.

एम. फिल. हिंदी और पीएच. डी. हिंदी में प्रवेश केवल प्रवेश-परीक्षा के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है. प्रवेश-परीक्षा 20 अगस्त 2014 को संपन्न होगी

एम.फिल. के लिए न्यूनतम अर्हता  एम.ए. हिंदी [55%] है तथा पीएच.डी. के लिए एम.फिल. हिंदी में उत्तीर्ण होना आवश्यक है.

इन सब पाठ्यक्रमों के लिए निर्धारित आवेदन-पत्र संस्थान के खैरताबाद, हैदराबाद - 500 004 स्थित कार्यालय में उपलब्ध हैं.
फोन - 040 - 23391190.

  

शनिवार, 26 जुलाई 2014

प्रो.दिलीप सिंह की पुस्तक 'कविता पाठ विमर्श' लोकार्पित

बुधवार, 23 जुलाई 2014

प्रो. दिलीप सिंह की पुस्तक ‘कविता पाठ विमर्श’ का लोकार्पण 26 को



हैदराबाद, 23/07/2014(मीडिया विज्ञप्ति).

यहाँ दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के खैरताबाद स्थित परिसर में आगामी शनिवार, 26 जुलाई को सायं 5 बजे प्रसिद्ध साहित्य समीक्षक और भाषावैज्ञानिक प्रो. दिलीप सिंह की पुस्तक ‘कविता पाठ विमर्श’ के लोकार्पण समारोह का आयोजन किया जा रहा है. 

समारोह की अध्यक्षता ‘भास्वर भारत’ के संपादक डॉ.राधे श्याम शुक्ल करेंगे. इस अवसर पर अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर मुख्य अतिथि होंगे तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के प्रो. सत्यकाम एवं केंद्रीय हिंदी निदेशालय के डॉ. एच. सुब्रमण्यम बतौर विशेष अतिथि उपस्थित रहेंगे. 

प्रो. दिलीप सिंह ने एक मुलाकात में बताया कि वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘कविता पाठ विमर्श’ में कविता की भाषावैज्ञानिक विवेचना के सर्वथा नए प्रतिमान स्थापित करते हुए हैदराबाद के 15 कवियों की कविताओं का विस्तार से पाठ विश्लेषण किया गया है. हैदराबाद के जिन हिंदी-उर्दू रचनाकारों की कविताओं का इस पुस्तक में विश्लेषण किया गया है उनमें ओम प्रकाश निर्मल, कमल प्रसाद कमल, राजा दुबे, इंदु वशिष्ठ, प्रतिभा गर्ग, मखदूम मोईनुद्दीन और वेणुगोपाल जैसे दिवंगत साहित्यकारों के अलावा नई-पुरानी पीढ़ी के जनकवि दुलीचंद शशि, नेह्पाल सिंह वर्मा, नरेन्द्र राय, शशि नारायण स्वाधीन, साकिब बनारसी, किशोरीलाल व्यास नीलकंठ, बालकृष्ण शर्मा रोहिताश्व और ऋषभ देव शर्मा जैसे रचनाकार शामिल हैं. 

कार्यक्रम की संयोजक डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा ने समस्त साहित्य प्रेमियों से इस समारोह में भाग लेने का अनुरोध किया है. 

शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

27 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में सम्मानित होंगे 28 हिंदी सेवी

प्रसन्नता का विषय है कि वर्ष 2010 और 2011 के लिए पूर्व घोषित केंद्रीय हिंदी संस्थान के पुरस्कार आगामी 27 अगस्त 2014 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति के हाथों प्रदान किए जाएँगे. इन पुरस्कारों से पुरस्कृत विद्वानों को भारत के राष्ट्रपति एक लाख रुपए नगद, शाल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करते हैं. 

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रचार,प्रसार और विकास में योगदान के लिए वर्ष 2010 और 2011 के लिए सात श्रेणियों में 28 हिंदी सेवियों को पुरस्कृत करने की घोषणा की गई थी जिसके अनुसार हिंदी पत्रकारिता के लिए दिए जाने वाले गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से दिलीप चौबे, रवीश कुमार, शिवनारायण और गोविंद सिंह को सम्मानित किया जाएगा.

वहीं, हिंदी आलोचना के क्षेत्र में दिए जाने वाले सुब्रहमण्यम भारती पुरस्कार से प्रो़. सुधीश पचौरी, प्रो़. नित्यानंद तिवारी, प्रो. दिलीप सिंह और श्याम सुंदर दुबे को सम्मानित किया जाएगा. हिंदी में खोज और अनुसंधान के लिए दिए जाने वाले महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन पुरस्कार से प्रो़. असगर वजाहत, वेद राही, परमानंद पांचाल और रघुवीर चौधरी को चुना गया है.

इसके अलावा, विदेशी हिंदी विद्वान वर्ग में दिए जाने वाले जार्ज ग्रियर्सन पुरस्कार से डॉ. शमतोव आजाद (उजबेकिस्तान) और डॉ. उ जो किम (दक्षिण कोरिया) को सम्मानित किया जाएगा और विदेशों में हिंदी के प्रसार के लिए मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार से मदनलाल मधु (रूस) और तेजेंद्र शर्मा (इंग्लैंड) को सम्मानित किया जाएगा.

हिंदीतर भाषी राज्यों में हिंदी के प्रचार के लिए दिए जाने वाले गंगाशरण सिंह पुरस्कार से आर.एफ. नीरलकटटी, पद्मा सचदेव, जान्हू बरूआ, एस.ए. सूर्यनारायण वर्मा, एच. बालसुब्रमण्यम, राबिन दास, टी.आर. भटट और एस.एम. कुलचंद्र शर्मा को सम्मानित किया जाएगा. वहीं, वैज्ञानिक तकनीकी साहित्य तथा उपकरण विकास के क्षेत्र में कार्य के लिए दिए जाने वाले आत्माराम पुरस्कार से अनिल कुमार चतुर्वेदी, काली शंकर, महेश डी कुलकर्णी और विजय कुमार मल्होत्रा को सम्मानित किया जाएगा. 


- वशिनी शर्मा, 53, कैलाश विहार, आगरा - 7 (उ.प्र), मोबाइल - +91 9837392009

मंगलवार, 15 जुलाई 2014

साहित्य गरिमा पुरस्कार


छठा 'साहित्य गरिमा पुरस्कार' 13 जुलाई 2014 को हैदराबाद के होटल रेसीडेंसी इन में आयोजित समारोह में नीलम कुलश्रेष्ठ (गुजरात) को उनके कहानी संग्रह 'शेर के पिंजड़े में' पर प्रदान किया गया. 


शांति अग्रवाल के कहानी संग्रह 'गुलमोहर' के लोकार्पण के अवसर पर 
जस्टिस टी. गोपाल सिंह, विश्वजीत सपन, प्रो. ऋषभ देव शर्मा, डॉ. अहिल्या मिश्र, 
डॉ. पुष्पेश एवं अन्य 


ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, हैदराबाद चैप्टर और साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति की ओर से 
डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा (कुर्सी पर) के सम्मान के अवसर पर 
बाएँ से : शांति अग्रवाल, नीलम कुलश्रेष्ठ, विश्वजीत सपन, शीला सोंथालिया, 
डॉ. अहिल्या मिश्र एवं डॉ. ऋषभ देव शर्मा   

  

प्रबुद्ध दर्शक गण 

सोमवार, 14 जुलाई 2014

डा. बाछोतिया को राहुल सांकृत्यायन पर्यटन पुरस्कार

कवि, लेखक, यायावर डा. बाछोतिया को वर्ष 2012-13 के लिए पर्यटन मंत्रालय द्वारा उनकी पुस्तक “दर्शनीय भारत : अतुल्य भारत” पर राहुल सांकृत्यायन पर्यटन पुरस्कार से नवाजा गया है। डा. हीरालाल बाछोतिया यायावर के साथ यात्रा साहित्य के जाने – माने लेखक हैं। नहीं रुकती है नदी, भारत से बाहर भारत, दर्शनीय भारत : अतुल्य भारत के अलावा उनके अनेक यात्रा संस्मरण पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं । इसके अलावा उनके तीन कविता संकलन , पाँच लघु उपन्यास, पाँच शिक्षा विषयक पुस्तकें 10 से अधिक भाषा संबंधी पुस्तकों के अलावा सओ के करीब पाठ्य पुस्तकें भी प्रकाशित हैं । उन्हें हिंदी अकादमी दिल्ली , सहस्राब्दि हिंदी सम्मान, चित्र कला संगम हिंदी सम्मान सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।[9810680305]